Monday, Oct 22, 2018

दिल्ली को पराली से होने वाले प्रदूषण से मिलेगी निजात, वैज्ञानिकों ने ढूंढी नई तरकीब

  • Updated on 10/11/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राजधानी दिल्ली में मौसम को मिजाज अब बदल गए हैं, जिसके साथ ही राजधानी में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है। दिल्ली की खराब हवा का एक कारण किसानों द्वारा जलाई जा रही पराली भी है। आमूमन फसल काटने के बाद खेत में बची पराली को किसान जला देते हैं, जिसके कारण हवा में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता है।

पराली के कारण पिछले तीन साल से राजधानी दिल्ली की हवा काफी खराब हुई है। इसी के कारण पिछले साल दिल्लीवासियों को सांस लेने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। इसी बीच किसानों और वातावरण के लिए समस्या का कारण बनी पराली का हल वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला है।अब वैज्ञानिक पराली को एक अलग ढंग से प्रयोग में लाएंगे।

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भारतीय वैज्ञानिकों ने इससे हाइब्रिड कंपोजिट तैयार करने की तकनीन ढूंढ़ ली है जिसका इस्तेमाल घरों की छतें, दीवारें, फर्श आदि बनाने के लिए किया जा सकता है। वैज्ञानिक एवं औघोगिक अनुसंधान परिषद की प्रयोगशाला 'एडवांस्ड मटेरियल्स एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टीट्यूट' के वैज्ञानिक डॉ. अशोकन पप्पू  ने पराली समेत अनेक प्रकार के कूड़े को हाइब्रिड कंपोजिट में बदलने की तकनीक विकसित की है।

उन्होंने बताया कि पराली से बनी शीट सागवान की लकड़ी की तुलना में चार गुणा मजबूत, उससे हल्की और 30 प्रतिशत सस्ती है। यह आग से पूरी तरह सुरक्षित है। यह मौसम,नमी और फंगस से सुरक्षित है। 

उन्होंने सीमेंट उघोग से निकलने वाले 'फ्लाई ऐस' में फाइबर मिलाकर एक दूसरा हाइब्रिड कंपोजिट तैयार किया है जो सागवान की लकड़ी स 10 गुणा मजबूत और 40 प्रतिशत सस्ता है।

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डॉ. पप्पू ने बताया कि वह 15 साल से इस तकनीक पर काम कर रहे थे और उत्पाद और उत्पादन प्रक्रिया दोनों का भारत और अमेरिका में पेटेंट कराया जा चुका है। करीब डेढ़ साल पहले छत्तीसगढ़ की कंपनी इको ब्राइट शीट को यह तकनीक ट्रांसफर की गई।इन उत्पादों की मांग इतनी थी कि कंपनी अपनी पूरी क्षमता पर उत्पादन करते हुए भी मांग पूरी नहीं कर पा रही है।

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