Tuesday, Dec 07, 2021
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SC में कामकाज हिंदी में करने के लिए कानून बनाने की उठी मांग, राज्यसभा में BJP ने कही ये बात

  • Updated on 2/11/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राज्यसभा (Rajyasabha) में भाजपा (BJP) के एक सदस्य ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय में कामकाज हिंदी में और उच्च न्यायालयों में कामकाज स्थानीय भाषाओं में किए जाने के लिए कानून बनाने की मांग की है और कहा कि इससे आम आदमी को वास्तविक रूप से न्याय मिल पाएगा। भाजपा के हरनाथ सिंह ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र की अवधारणा में जनता सर्वोपरि होती है। देश की 98 फीसदी आबादी या तो हिंदी बोलती है या स्थानीय भाषा में संवाद करती है। मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

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कानून बनाए जाने की मांग
सिंह ने कहा आम आदमी को पता चलना चाहिए कि यदि उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में उसे लेकर कोई फैसला दिया गया है तो वह क्या है। इसके लिए यह जरूरी है कि उच्चतम न्यायालय में कामकाज हिंदी में हो और उच्च न्यायालयों में स्थानीय भाषा में कामकाज हो। सिंह ने इसके लिए कानून बनाए जाने की मांग की। शून्यकाल में ही कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने कहा कि अनुसूचित जनजाति के लोगों के कल्याण के लिए कई तरह की योजनाएं बनाई जाती हैं।

लेकिन कई जगहों पर अलग अलग कारणों से इस समुदाय के लोग इन योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में सहरिया जनजाति अत्यंत पिछड़ी जनजाति है।

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सरकार ने सबके लिए तय किए लक्ष्य
इस समुदाय के लोगों को राज्य के चंबल और ग्वालियर संभागों में अनुसूचित जनजाति श्रेणी के लाभ मिल रहे हैं लेकिन सागर संभाग और भोपाल संभाग में उनको यह लाभ नहीं मिलता। इस पर सदन में मौजूद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि इस बारे में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से इस संबंध में कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

बीजद के डॉ अमर पटनायक ने सौर ऊर्जा उत्पादन से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि हर राज्य के पास इसके लिए अधिक क्षमता नहीं है लेकिन सरकार ने सबके लिए लक्ष्य तय कर दिया है। उन्होंने कहा कि ओडिशा इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता, हालांकि उसके पास पनबिजली व्यवस्था से ऊर्जा उत्पादन की क्षमता है।  

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क्षतिपूर्ति राशि दी जानी चाहिए
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटने से हुए हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से दो दो लाख रूपये दिए गए जो पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने मांग की की यह राहत राशि 25 लाख रुपये होनी चाहिए। उन्होंने कहा जिन लोगों को संपत्ति का नुकसान हुआ है, उनको क्षतिपूर्ति राशि दी जानी चाहिए।

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