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नोटबंदी के 3 साल पूरे होने पर बोलीं प्रियंका, इस आपदा ने देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी

  • Updated on 11/8/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आज यानि 8 नवंबर को देश में नोटबंदी को तीन साल हो गए हैं। तीन साल पहले 8 नवंबर, 2016 मेंमोदी सरकार (Modi Government) ने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए थे। इस पर आज विपक्ष एक बार फिर सरकार को घेर रही है और सरकार के इस फैसले को आर्थिक आपदा बता रही है।

विपक्ष के कई नेता इस पर हमला बोले रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस (Congress) के कई नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी (Demonetisation) एक 'आपदा' साबित हुई है जिसने देश की अर्थव्यवस्था (Economy) को बर्बाद कर दिया।

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उन्होंने लिखा, "नोटबंदी को तीन साल हो गए। सरकार और इसके नीम-हकीमों द्वारा किए गए, 'नोटबंदी सारी बीमारियों का र्शितया इलाज' के सारे दावे एक-एक करके धराशायी हो गए। नोटबंदी एक आपदा साबित हुई जिसने हमारी अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी।" कांग्रेस महासचिव ने हैशटैग "डीमोनेटाइजेशन डिजास्टर" का उपयोग करते हुए सवाल पूछा है, "इस 'तुगलकी' कदम की जिम्मेदारी अब कौन लेगा?"

अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर प्रियंका का तंज- सरकार मस्त, लोग त्रस्त

आठ नवंबर का दिन देश की अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक खास दिन के तौर पर दर्ज है। यही वह दिन है जब तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 500 और 1,000 रुपए के नोटों को चलन से बाहर करने की घोषणा की थी। नोटबंदी की यह घोषणा उसी दिन आधी रात से लागू हो गई। इससे कुछ दिन देश में अफरातफरी का माहौल रहा और बैंकों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं। बाद में 500 और 2000 के नये नोट जारी किए गए। सरकार ने ऐलान किया कि उसने देश में मौजूद काले धन और नकली मुद्रा की समस्या को समाप्त करने के लिए यह कदम उठाया है। देश में इससे पहले 16 जनवरी 1978 को जनता पार्टी की गठबंधन सरकार ने भी इन्हीं कारणों से 1000, 5000 और 10,000 रुपये के नोटों का विमुद्रीकरण किया था। 

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नोटबंदी के प्रभाव

  • 2000 के नये नोटों ने लोगों के कैश होल्ड करने की क्षमता बढ़ा दी।
  • नकद लेन-देन में कमी लाना नोटबंदी का एक प्रमुख उद्देश्य था। 
  • अभी भी 36 फीसदी लोग ग्रोसरी तथा 31 फीसदी लोग घरेलू नौकरों को नकद ही भुगतान करते हैं। 
  • सिर्फ 12 फीसदी लोगों ने बताया कि वे कोई भुगतान नकद नहीं करते हैं। 
  • नोटबंदी के बाद पूरे देश में नकली नोटों के पकड़े जाने की घटनायें काफी कम हो गई हैं। 

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नोटबंदी के लाभ

42 फीसदी लोगों का मानना है कि टैक्स चोरी करने वाले लोग अब बड़ी संख्या में टैक्स के दायरे में आ गये हैं। वहीं 21 फीसदी मानते हैं कि अर्थव्यवस्था में ब्लैक मनी घटी है। 12 फीसदी लोगों के अनुसार इससे प्रत्यक्ष कर में  वृद्धि हुई है। वहीं 25 फीसदी लोग नोटबंदी में कोई फायदा नहीं देखते हैं। 

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