Wednesday, Feb 01, 2023
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Depreciation point  to be brought back for PhD students: JNU

पीएचडी छात्रों के लिए फिर लाया जाएगा डेप्रिवेशन प्वाइंट मॉडल : जेएनयू

  • Updated on 7/13/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने कहा कि जेएनयू पीएचडी छात्रों के लिए अपनी दाखिला नीति की सबसे अनूठी व्यवस्था डेप्रिवेशन प्वाइंट मॉडल को फिर से लागू करने की योजना बना रहा है। विश्वविद्यालय ने दाखिला लेने के लिए पिछड़े क्षेत्रों से आने वाले छात्रों, विशेषकर महिलाओं की मदद करने के लिए डेप्रिवेशन प्वाइंट मॉडल तैयार किया था। छात्रों के एक वर्ग की ओर से कड़ी आलोचना किए जाने के बीच, विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एम जगदीश कुमार के नेतृत्व में इस मॉडल के इस्तेमाल को कुछ साल पहले बंद कर दिया गया था।

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आरक्षित श्रेणियों की सीटें नहीं भर पा रहीं थीं 
कई छात्र और शिक्षक इस मॉडल को बहाल करने की लंबे समय से मांग रहे हैं। शांतिश्री ने कहा कि विश्वविद्यालय, परिसर में समावेशिता एवं समानता के लिए डेप्रिवेशन प्वाइंट मॉडल फिर से लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम पीएचडी छात्रों के लिए डेप्रिवेशन प्वाइंट मॉडल पुन: ला रहे हैं क्योंकि हमारी आरक्षित श्रेणियों की सीट भर नहीं पातीं। मैं एक आरक्षित वर्ग से आती हूं, मैं इसे लागू होते देखना चाहती हूं। खासकर आरक्षित वर्ग की महिलाओं के लिए हम समावेशिता और समानता चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश में एकमात्र जेएनयू ही ऐसा विवि. है, जो ये डेप्रिवेशन प्वाइंट देता है और यही कारण है कि हम सबसे अलग हैं।

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महिला छात्रावासों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे और परिसर के चारो ओर 10 फुट ऊंची दीवार बनेगी
इससे इतर विवि. में यौन उत्पीडऩ की बढ़ती सूचनाओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय महिला छात्रावास में सीसीटीवी कैमरे लगाने और परिसर के चारों ओर १० फुट ऊंची दीवार बनाने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने वर्तमान में परिसर की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एजेंसी को बदलने के मकसद से एक नई सुरक्षा निविदा जारी की है। छात्र एवं शिक्षक नई सुरक्षा एजेंसी को लाने की प्रशासन से पूर्व में कई बार मांग कर चुके हैं।

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