Friday, May 20, 2022
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dggi clarified regarding the tax liability of piyush jain, a businessman sent into custody rkdsnt

हिरासत में भेजे गए कारोबारी पीयूष जैन की टैक्स देनदारी को लेकर DGGI ने दी सफाई

  • Updated on 12/30/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग ने कानपुर के इत्र कारोबारी पीयूष जैन के ठिकानों की तलाशी के दौरान बरामद 197.49 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी को कारोबार के रूप में देखे जाने संबंधी खबरों को‘विशुद्ध अटकल’बताते हुए खारिज कर दिया है। जीएसटी महानिदेशालय की खुफिया इकाई (डीजीजीआई) ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि जैन के ठिकानों की तलाशी के दौरान कुल 197.49 करोड़ रुपये नकदी, 23 किलो सोना और कुछ अन्य कीमती‘आपत्तिजनक सामान’बरामद किए गए हैं। 

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यह बरामदगी सुगंधित उत्पाद बनाने वाली कंपनी ओडोकेम इंडस्ट्रीज से जुड़े परिसरों से की गई है। जैन इसी कंपनी का प्रवर्तक है। इतनी बड़ी मात्रा में बेहिसाबी नकदी बरामद होने के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह कहा गया कि जीएसटी विभाग इसे जैन का कारोबार मानकर उसका एक चौथाई हिस्सा कर के रूप में चुकाने की मंजूरी देने का फैसला कर सकता है। 

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लेकिन डीजीजीआई ने इन खबरों को नकारते हुए कहा कि आरोपी के स्वैच्छिक बयान की अभी जांच की जा रही है और जांच के बाद ही उस पर देनदारी की सही स्थिति पता चल पाएगी। उसने इन खबरों को निराधार एवं अटकल बताते हुए कहा, 'तलाशी में जब्त समूची रकम भारतीय स्टेट बैंक के पास जमा कराई गई है।' डीजीजीआई ने कहा, 'जब्त रकम में से मैसर्स ओडोकेम इंडस्ट्रीज की तरफ से किसी भी बकाया कर का भुगतान नहीं किया गया है। अभी कर देनदारी का निर्धारण होना बाकी है।'

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उसने जैन की तरफ से दी गई जानकारियों का ब्योरा न देते हुए कहा कि स्वैच्छिक बयान चल रही जांच का विषय है और जब्त नकदी के स्रोत एवं कर देनदारी का फैसला तलाशी के दौरान मिले साक्ष्यों की पड़ताल पर निर्भर करेगा। उसने कहा कि जैन के अपनी गलती मानने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया था। जीएसटी विभाग के हाथों गिरफ्तार होने के बाद जैन को 27 दिसंबर को कानपुर की अदालत में पेश किया गया था जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। 

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