Sunday, Oct 02, 2022
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diffrence between pm modi and imran khan speech in united nation

UNGA: जानें PM मोदी और इमरान के संबोधन में क्यों है जमीन-आसमान का अंतर

  • Updated on 9/28/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका अग्रवाल। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 74वें सत्र में जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने महज 17 मिनट के भाषण में आतंकवाद को पूरे विश्व के लिए चुनौती करार देते हुए इसके खिलाफ दुनिया से एकजुट होने का आह्वान किया तो वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी पीएम इमरान खान (PM Imran khan) ने अपने 50 मिनट के संबोधन में लगभग 30 मिनट तक कश्मीर का ही रोना रोया।

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UNGA में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदी में संबोधित करते हुए आतंकवाद (Terrorism) के खिलाफ दुनिया से एकजुट होने का आह्वान किया और विश्व शांति के प्रति भारत के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हमने दुनिया को ‘युद्ध नहीं बुद्ध’ दिए हैं। पीएम मोदी ने एक जिम्मेदार देश की तरह बिना किसी का नाम लिए कहा कि आतंक के नाम पर बटी दुनिया उन सिद्धांतों को ठेस पहुंचाती है, जिनके आधार पर संयुक्त राष्ट्र का जन्म हुआ। मैं समझता हूं कि आतंकवाद के खिलाफ पूरे विश्व का एकजुट होना अनिवार्य है। 



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दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही बौखलाए पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने अपने संबोधन में कश्मीर का ही रोना रोया। उन्होंने लगभग 30 मिनट तक कश्मीर पर ही संबोधन केंद्रित रखा। इमरान ने मजहब की आड़ लेते हुए दावा किया कि 9/11 घटना के बाद से 'इस्लामोफोबिया (इस्लाम को लेकर पैदा किया जा रहा भय)' चिंताजनक ढंग से बढ़ा है और इसके चलते बंटवारा हो रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों में 'हिजाब' पहनना समुदाय के खिलाफ एक हथियार बना गया है।


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इससे पहले 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था। प्रधानमंत्री ने अपने ताजा संबोधन में कश्मीर और पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं किया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा मिशनों में भारत ने सबसे ज्यादा योगदान दिया है। संयुक्त राष्ट्र के इन मिशनों में सेवा देते हुए कम से कम 160 भारतीय शांतिरक्षकों ने अपने जीवन का बलिदान दिया। 

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1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के लिए निर्धारित समय सीमा का ध्यान रखा। महासभा में सभी वक्ताओं को लगभग 15 मिनट में अपना संबोधन समाप्त करना था। पीएम मोदी ने समय का ध्यान रखते हुए 16 मिनट 50 सेकेंड में तमाम मुद्दों पर अपनी बाते सभा के सामने रखी।

2. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान समय की सीमा को तोड़ते हुए 50 मिनट तक बोलते रहे। उनका भाषण पूरी तरह इस्लामोफोबिया और कश्मीर के ईद-गिर्द घूमता रहा। इस दौरान इमरान खान को कई बार बर्जर बजाकर और लाल बत्ती जलाकर संबोधन समाप्त करने का संकेत दिया जाता रहा, लेकिन इन चेतावनियों के बावजूद भी वह लगातार कश्मीर पर रोते रहे और समय-सीमा का ध्यान नहीं रखा।

3. पीएम मोदी ने अपने भाषण में विकास, पर्यावरण, शांत, अहिंसा, सद्भावना, जलवायु परिवर्तन, लोकतंत्र, जन कल्याण और आतंकवाद के खात्मे की बात रखी। उन्होंने संयुक्त्त राष्ट्र के मंच से पूरी दुनिया को समृद्ध भारतीय परंपरा और भारत के गौरवशाली इतिहास से भी रूबरू कराया। इसके साथ ही उन्होंने स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण का जिक्र करते हुए शांति एवं सौहार्द का संदेश दिया। 

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4. इमरान खान ने पूरे भाषण के दौरान कश्मीर के नाम पर परमाणु युद्ध का शिगूफा छोड़ा और जंग की गीदड़भभकी दी। पाक पीएम ने यूएन के मंच से चेतावनी दी कि यदि परमाणु शक्ति संपन्न दोनों पड़ोसियों के बीच टकराव हुआ तो उसके नतीजे उनकी सीमाओं से परे जाएंगे। पाक पीएम का युद्ध राग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उसी मंच से कुछ समय पहले दिए गए शांति संदेश के ठीक उलट था। 

5. यूएम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार भी पाकिस्तान या इमरान खान का नाम नहीं लिया।

6. इमरान खान ने लगभग 50 मिनट के भाषण में 25 पाकिस्तान और कश्मीर, 17 बार भारत, 12 बार पीएम मोदी का नाम लिया। इतना ही नहीं पाक पीएम ने कई बार भारत से जुड़ी चीजों का भी नाम लिया। इमरान खान ने 11 बार 9/11 हमले का जिक्र किया। 12 बार आरएसएस, आठ बार यूएन, छह बार अफगानिस्तान और छह बार हिंदू शब्द का इस्तेमाल किया। पांच बार कर्फ्यू, पांच बार खून-खराबा, तीन बार युद्ध और दो बार पुलवामा का नाम लिया। इमरान खान भाजपा को लेकर आपत्तिजनक और गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी करते रहे।

7. पीएम मोदी ने जब अपने भाषण की शुरुआत की तो उनका भाषण सिर्फ भारत की समस्या पर नहीं था, उन्होंने तो अपने भाषण में विश्वस्तर की समस्या का चिंतन किया। उन्होंने सभी से यहीं अनुरोध किया कि अगर हम सभी साथ मिल जाए तो गंभीर से गंभीर चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। जिससे स्पष्ट होता है कि उन्हें अपने भारत के साथ ही अन्य देशों की भी चिंता है।  

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8. वहीं, इमरान खान हमेशा की तरह अपने जिद पर अड़े रहे और पूरे भाषण के दौरान उन्होंने अपनी गलत बातों को मनवाने की कोशिश की। उनके भाषण की बात करें तो वो एक ऐसे नेता के विचार थे जिसने राजनीति की दुनिया में बस कदम ही रखा हो और जिसे काफी कुछ सीखना बाकी हो।

9. पीएम मोदी के पूरे भाषण पर गौर किया जाएं तो उन्होंने सिर्फ ऐसे मुद्दों को उठाया है जिसमें भारत ही नहीं पूरे विश्व की भलाई हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गंभीर समस्याओं को अपने भाषण में जगह दी। इसके साथ ही भारत इससे निपटने के लिए किस तरह के प्रयास कर रहा है उनकी भी जानकारी संयुक्त राष्ट्र महासभा को दी। 

10.आतंकवाद को अपने घर में पनाह देने वाले पाक पीएम इमरान खान ने आतंकवाद जैसे  गंभीर मुद्दे पर बात करना सही नहीं समझा। उन्होंने तो अपने भाषण में जलवायु परिवर्तन व मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मुद्दों का जिक्र किया।

 

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