Wednesday, Apr 14, 2021
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रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के कहानी संग्रह ‘भीड़ साक्षी है’ पर हुई परिचर्चा

  • Updated on 2/28/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बहुत अभावों में जीने वाला व्यक्ति जिसने अभावों को जिंदा रखा, उन्होंने अपने जीवन में बहुत कठिनाईयां झेली हैं। मैंने उन्हें बनते हुए देखा है। एक बार बेझिझक उन्होंने कहा था कि यदि जीवन में दोराहा आ गया तो मैं राजनीति का रास्ता छोड दूंगा साहित्य की ओर मुड जाउंगा क्योंकि राजनीति मुझे भूत बना देगी लेकिन साहित्य मुझे अमर कर देगा। उक्त बातें प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरूण’ ने केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के कहानी संग्रह ‘भीड साक्षी है’ पर स्याही ब्ल्यू की ओर से आयोजित रविवारीय पुस्तक वार्ता के दौरान कहीं।

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इस परिचर्चा की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ हरीश नवल ने करते हुए कहा कि ये कहानियां कपोर कल्पित नहीं है ये वो हैं जो व्यवहारिक होती हैं। ये बोध कथाएं हैं जो आत्म दर्शन करवाती हैं। उनका पात्र दर्शन है जो आपके अंर्तमन को झांक रहा है। वहीं बतौर मुख्य वक्ता डीयू में हिंदी विभाग के प्रोफेसर कैलाश नारायण तिवारी ने कहा कि निशंक के साहित्य को पढकर लगता है कि उनकी रचनाओं को पढकर उनके भावनाओं का जब मुल्यांकन करते हैं तो लगता है कि उनका मन काफी कोमल है।

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वहीं वक्ताओं में संस्कृत महाविद्यालय ऊना हिमाचल से डॉ कृष्ण मोहन पांडेय ने कहा कि यदि व्यक्ति अपने भीतर संकल्प कर लेता है तो वो निश्चय सफल होता है ये निशंक की रचना संसार की कहानी के पात्रों की विशेषता है। कवि एवं आलोचक डॉ बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि उनकी कहानी ‘रोशनी की एक किरण’ अपने व्यक्तित्व को लोगों के बीच में कैसे बचाकर रखें यह बताती है जोकि आम जीवन से काफी मिलती-जूलती है।

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