Wednesday, Mar 20, 2019

25 से 35 साल के युवाओं का सता रहा है हड्डियों का ये रोग, लापरवाही बन रही है घातक

  • Updated on 2/13/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। तेजी से बदलती लाइफस्टाइल में गलत खान पान और लापरवाही से आज खुद नौजवानों को भी अर्थराइटिल जैसी बीमारियां घेर रही हैं। युवाओं में अक्सर ये देखा जा रहा है कि कोहनी, हाथ की कलाईयों और जोड़ों में दर्द रहता है। ऑफिस जाने वाले हों या फिर कॉलेज जाने वाले किशोर सभी को कभी ना कभी हाथ, पैर का दर्द सताने लगा है। इसके पीछे कारण है उठने, बैठने और पढ़ने के तरीके में लापरवही बरतना। 

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अगर किसी को अर्थराइटिस की शिकायत है तो इससे हाथों को घुमाने, मोड़ने और हिलाने में काफी तकलीफ होती है। इसे राजमर्रा के कामों में दिकक्त आती है और चलने फिरने में भी दिक्कत होती है। आएये जानते हैं कि आज के समय में अर्थराइटिस का कौन सा प्रकार युवाओं को ज्यादा परेशान कर रहा है। 

सोराइटिक अर्थराइटिस

इसतरह के अर्थराइटिस में पैरों और टखनों में दर्द बना रहता है। कई बार इस वजह से पैरों में सूजन भी आ जाती है। इससे पैरों में खिंचाव, जोड़ों से प्रभावित होते हैं। कई बार ये पैरों के अलावा कमर, घुटना, पीठ को भी प्रभावित करता है। इससे बचने के लिए पैरों की मसाज करवाएं या फिर हल्की पैरों की स्ट्रेचिंग करें। 

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पोलिमायलगिया रूमेटिका 

ये खासतौर से 25 से 35 साल के उम्र के लोगों को हो रहा है। इसमें जोड़ों के साथ-साथ पूरे शरीर को प्रभावित करता है। इसकी वजह से पैरों के जोड़ों में दर्द केसाथ, सूजन, मांसपेशियों में कमजोरी, बुखार तक हो जाता है। शरीर के किसी भी जोड़ में हो सकता है। 

सिस्टेमिक लयूपस अर्थिमेटोसस

ये हड्डियों की ऐसी बीमारी है जो बाद में त्वचा और दूसरे अंगों को भी प्रभावित करती है। ये खासतौर पर बच्चों की जन्म देनी वाली महिलाओं में देखी जाती है। ये एक ऑटो इम्यून बीमारी है जो ध्यान ना देने पर खतरनाक हो सकती है।

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