Thursday, Aug 18, 2022
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disgruntled officials be brought ustice for making false revelations gujarat riots: court

गुजरात दंगों में अल्पसंख्यक विरोधी साजिश का कोई सबूत नहीं, RB श्रीकुमार और संजीव भट्ट को फटकारा

  • Updated on 6/25/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सुप्रीम कोर्ट ने 2002 गुजरात दंगा मामले में SIT की ओर से नरेंद्र मोदी को दी गई क्‍लीन चिट बरकरार रखी है। कोर्ट ने SIT के काम की तारीफ करते हुए कहा कि राज्य प्रशासन के कुछ अधिकारियों की लापरवाही का मतलब यह नहीं कि राज्य प्रशासन की साजिश थी। कोर्ट ने मोदी और अन्‍य को फंसाने के लिए झूठी गवाही देने वाले आईपीएस अधिकारियों- आरबी श्रीकुमार और संजीव भट्ट को फटकारा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं हैं कि गोधरा कांड और उसके बाद की हिंसा सुनियोजित साजिश का नतीजा थी। पूर्व कांग्रेस सांसद जकिया जाफरी की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्‍पणी की 

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि उसे राज्य सरकार की इस दलील में दम नजर आता है कि संजीव भट्ट (तत्कालीन आईपीएस अधिकारी) और आरबी श्रीकुमार (अब सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी) की गवाही मामले को केवल सनसनीखेज बनाने और इसके राजनीतिकरण के लिए थी, जबकि ‘यह झूठ से भरा हुआ था।’ 

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शीर्ष अदालत ने कहा कि संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार ने खुद को उस बैठक के चश्मदीद गवाह होने का झूठा दावा किया, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री (नरेन्द्र मोदी) द्वारा कथित तौर पर बयान दिए गए थे और विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उनके दावों को खारिज कर दिया था। न्यायालय ने कहा, 'अंतत: यह हमें प्रतीत होता है कि गुजरात सरकार के असंतुष्ट अधिकारियों के साथ-साथ अन्य लोगों का एक संयुक्त प्रयास (इस प्रकार के) खुलासे करके सनसनी पैदा करना था, जबकि उनकी जानकारी झूठ पर आधारित थी। 

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न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘विस्तृत जांच के बाद एसआईटी ने उनके दावों के झूठ को पूरी तरह से उजागर कर दिया था।’ पीठ ने कहा, ‘किसी गुप्त उद्देश्य के लिए मामले को जारी रखने की गलत मंशा से प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करने वालों को कटघरे में खड़ा करके उनके खिलाफ कानून के दायरे में कार्रवाई की जानी चाहिए।’

न्यायालय ने कहा, ‘‘वास्तव में, प्रक्रिया के इस तरह के दुरुपयोग में शामिल सभी लोगों को कटघरे में रखने और कानून के अनुसार आगे बढऩे की आवश्यकता है।’ पीठ ने कहा, ‘‘उच्चतम स्तर पर बड़े आपराधिक षड्यंत्र की संरचना का आरोप लगाने वाला झूठा दावा एसआईटी द्वारा गहन जांच के बाद ताश के पत्तों की तरह ढह गया।’’ 

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पीठ ने कहा, ‘एसआईटी द्वारा गहन जांच के बाद एकत्रित विश्वसनीय निर्विवाद सामग्री के आधार पर इस तरह के दावे का झूठ पूरी तरह से उजागर हो गया है।’  शीर्ष अदालत ने कहा कि दो व्यक्तियों- संजीव भट्ट और आरबी श्रीकुमार के दावों के झूठ को उजागर करने के अलावा, एसआईटी ने ऐसी सामग्री जुटाई है जो पूरे गुजरात में सामूहिक हिंसा की सहज विकसित स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संबंधित राज्य पदाधिकारियों की कड़ी मेहनत और योजना को दर्शाती है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य प्रशासन के एक वर्ग के कुछ अधिकारियों की निष्क्रियता या विफलता राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा पूर्व नियोजित आपराधिक साजिश का अनुमान लगाने या इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ राज्य द्वारा प्रायोजित अपराध (हिंसा) के रूप में घोषित करने का आधार नहीं हो सकता है। 

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पीठ ने राज्य में 2002 के दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और 63 अन्य को एसआईटी की क्लीन चिट को बरकरार रखा और मारे गए कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया था। पीठ ने मामले को दोबारा शुरू करने के सभी रास्ते बंद करते हुए कहा कि जांच के दौरान एकत्रित की गई सामग्री से मुसलमानों के खिलाफ सामूहिक हिंसा भड़काने के लिए ‘सर्वोच्च स्तर पर आपराधिक षड्यंत्र रचने संबंधी कोई संदेह उत्पन्न नहीं होता है।’ 

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