Monday, Oct 25, 2021
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संवैधानिक मामलों व अपीलों से निपटने के लिए जरूरी है सुप्रीम कोर्ट का विभाजन: वेंकैया नायडू

  • Updated on 9/29/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने सुप्रीम कोर्ट के विभाजन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष कोर्ट का विभाजन होना चाहिए ताकि मामलों का तेजी से निपटारा हो सके। उन्होंने न्याय मिलने पर देरी पर चिंता जताते हुए संवैधानिक मामलों और अपीलों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट को विभाजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने मुकदमों के त्वरित निष्पादन के लिए सुप्रीम कोर्ट की चार क्षेत्रीय पीठ बनाने की भी अपील की।

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सुप्रीम कोर्ट में बदलाव के लिए संविधान संधोधन की जरूरत नहीं होगी
उप राष्ट्रपति नायडू शनिवार को दिल्ली में एक पुस्तक के विमोचन के दौरान मौजूद थे। उन्होंने अपने भाषण के दौरान ये बयान दिया। बाद में उनके सचिवालय द्वारा एक बयान जारी कर बताया गया कि नायडू ने अपने भाषण में आर्टिकल 130 का जिक्र किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बदलाव के लिए संविधान संधोधन की जरूरत नहीं होगी। 

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कानून और न्याय पर संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों का जिक्र किया
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में या ऐसे कई स्थानों पर बैठेगा जहां के लिए भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया समय-समय पर राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ नियुक्तियां कर सकते हैं। उन्होंने कानून और न्याय पर संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों का जिक्र किया, जिनमें सुप्रीम कोर्ट की क्षेत्रीय पीठों को परीक्षण के आधार पर बनाने की बात कही गई है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कई अवसरों पर कहा है कि दिल्ली के बाहर इसकी पीठ की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट अगस्त 2009 कमीशन के सुझाव को पहले ही खारिज कर चुकी है, जिसमें संविधान पीठ को दिल्ली, चेन्नई/हैदराबाद,कोलकाता और मुम्बई में विभाजित करने की बात कही थी। 

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सजा-ए-मौत और कर के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष पीठों का गठन किया
उच्चतम न्यायालय ने सजा-ए-मौत और कर के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष पीठों का शनिवार को गठन किया। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि मौत की सजा के मामलों के देखने के लिए तीन न्यायाधीशों की एक पीठ अगले महीने से काम शुरू करेगी। सूत्र ने बताया कि दो न्यायाधीशों वाली पीठ की दो अदालतें कर से जुड़े मामलों पर सुनवाई करेगी।

उच्चतम न्यायालय में चार नए न्यायाधीशों- न्यायमूॢत कृष्ण मुरारी, न्यायमूॢत एस. रविंद्र भट, न्यायमूॢत वी. रामसुब्रह्मण्यम और न्यायमूॢत ऋषिकेश रॉय ने 23 सितम्बर को पद की शपथ ली और इसी के साथ शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 हो गई। लंबित मामलों की संख्या बढऩे से रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय ने सात साल तक की सजा के प्रावधान वाले अपराधों से संबंधित मामलों में जमानत एवं अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए एकल न्यायाधीश वाली पीठ के गठन की 20 सितम्बर को घोषणा की थी। 

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