Saturday, Dec 07, 2019
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DMRC की ’मनमानी’ पर भड़की दिल्ली सरकार, MD को पत्र लिख की ये मांग

  • Updated on 11/12/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली सरकार (Delhi Government) की ओर से डीएमआरसी (DMRC) बोर्ड में 4 नए प्रतिनिधियों को नामित करने और केंद्र द्वारा इसे स्वीकार नहीं करने के बाद अब इसमें नया मोड़ आ गया है। दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच इसे लेकर टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। 

परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत (Kailash Gahlot) ने सोमवार को कहा कि डीएमआरसी बोर्ड में दिल्ली सरकार के नामित प्रतिनिधियों को शामिल किए बगैर बोर्ड की बैठक बुलाना और किसी भी तरह का निर्णय लेना गैर-कानूनी है। परिवहन मंत्री ने इस बाबत डीएमआरसी के एमडी मंगू सिंह को कड़ा पत्र भी लिखा है। 

उन्होंने कहा है कि दिल्ली मेट्रो में दिल्ली सरकार की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है और ऐसे में राज्य सरकार द्वारा नामित निदेशकों के बगैर बैठक करना पूरी तरह गैर-कानूनी है। बता दें कि गैर-नौकरशाहों को डीएमआरसी बोर्ड में नामित करने के दिल्ली सरकार के फैसले पर केंद्र सरकार फिलहाल कानूनी राय ले रही है और अभी इसे मंजूरी नहीं दी है।

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डीएमआरसी के एमडी को लिखा पत्र
परिवहन मंत्री ने डीएमआरसी के एमडी को पत्र लिखकर कहा है कि निदेशक मंडल में दिल्ली सरकार के सभी प्रतिनिधियों को शामिल करने पर तत्काल निर्णय लें और गैर-कानूनी तरीके से बोर्ड बैठक में निर्णय लेने से परहेज करें। बता दें कि करीब 4 महीने पहले गैर-नौकरशाहों को राज्य सरकार ने डीएमआरसी बोर्ड के लिए नामित किया था, लेकिन केंद्र सरकार को यह रास नहीं आ रहा है। इसके चलते बोर्ड में इन्हें अब तक शामिल नहीं किया गया है। 

'गैर-कानूनी तरीके से बोर्ड बैठक में निर्णय लेने से बचें'
गहलोत ने कहा कि उन्होंने डीएमआरसी के एमडी से कहा है कि वह दिल्ली सरकार की ओर से नामित निदेशक मंडल पर निर्णय लेने में तेजी दिखाए। साथ ही, दिल्ली सरकार के प्रतिनिधि के बगैर महत्वपूर्ण मुद्दों पर गैर-कानूनी तरीके से बोर्ड बैठक में निर्णय लेने से बचें। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने गत 13 जुलाई को डीएमआरसी के स्वतंत्र निदेशक बोर्ड में चार लोगों को नामित किया, लेकिन इतने महीने बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। 

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'बैठक में लिए गए निर्णय अवैध और अव्यवहारिक'
उन्होंने कहा कि हमें 26 सितम्बर को आयोजित निर्देशक बोर्ड के मिनट्स से पता चला कि यह एजेंडा का हिस्सा था, लेकिन निर्णय नहीं लिया गया। लेकिन इसके अलावा बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण फैसले पर निर्णय लिए और दिल्ली सरकार के किसी प्रतिनिधि के बिना ही इसे पारित किया। उन्होंने कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय अवैध और अव्यवहारिक हैं। उन्होंने कहा कि डीएमआरसी में दिल्ली सरकार का 50 प्रतिशत शेयर है। वह निदेशकों की संख्या में बराबर की हिस्सेदारी रखती है। इसलिए डीएमआरसी को दिल्ली सरकार के प्रतिनिधित्व के बिना निर्णय लेना बंद कर देना चाहिए। गहलोत ने कहा कि बोर्ड की बैठक में फैसला किए बिना दिल्ली सरकार की सिफारिशों पर कानूनी राय लेना गैर-कानूनी है।

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'दिल्ली सरकार के प्रतिनिधियों को DMRC बोर्ड में तुरंत किया जाए शामिल'
दिल्ली सरकार ने कुछ महीने पहले डीएमआरसी बोर्ड में चार नए प्रतिनिधियों को नामित किया था। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के निदेशक मंडल में नामित होने वालों में राघव चड्ढा, आतिशी, दिल्ली डायलॉग एवं डेवलपमेंट कमीशन (डीडीसी) के उपाध्यक्ष जस्मिन शाह और नवीन गुप्ता शामिल हैं। यह पहली बार है कि गैर-नौकरशाहों को दिल्ली सरकार ने डीएमआरसी बोर्ड के लिए नामित किया था। लेकिन केंद्र ने इसे अब तक मंजूरी नहीं दी है।  

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