Saturday, Jul 20, 2019

कहीं कलंकित न हो जाए ‘देवभूमि’ हिमाचल प्रदेश

  • Updated on 6/12/2019

हर तरफ चिट्टे का शोर है और उसकी गिरफ्त में कैद हो रही देश की जवानी आज भारत के लिए सबसे बड़े चिंतन का विषय बन गई है। पड़ोसी राज्य पंजाब में चिट्टे ने इस कदर पांव पसारे हैं कि अब इससे पीछा छुड़ाना पंजाब की जवानी के लिए मुश्किल हो गया है। ठीक यही रफ्तार चिट्टे ने अब हिमाचल प्रदेश में पकड़ ली है। पढ़ाई और नौकरी के तनाव से गुजर रही पहाड़ की जवानी को भी चिट्टे का जंग तेजी से लग रहा है। आज प्रदेश की शहरी आबादी से लेकर छोटे-छोटे कस्बों में भी चिट्टे की बड़ी मार्कीट बनती जा रही है।

युवक और युवतियां जहां इसकी चपेट में हैं वहीं इसकी पूॢत के लिए अब ड्रग माफिया इसकी तस्करी के लिए पहाड़ की जवानी का भी प्रयोग करने लग पड़ा है। इससे भी गंभीर मसला हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर ऊंचे पर्वतों की ओट में हो रही नशे की खेती का है। सरकारी एजैंसियां हर साल नाममात्र फसल को नष्ट कर वाहवाही तो लूट लेती हैं लेकिन पूरी तरह से कानून का खौफ अभी तक भी अफीम और भांग की खेती करने वाले माफिया के दिलों में नहीं उतरा है क्योंकि जो भी फसल नष्ट की जाती है वह वन भूमि पर खड़ी बताई जाती है। यही बड़ी वजह है कि कानूनी कार्रवाई से हर बार नशे की खेती करने वाला माफिया बच निकलता है। 

अफीम और भांग की खेती
चिट्टा अफीम से बनता है और हिमाचल प्रदेश में पिछले कई सालों से भांग के अलावा बड़े पैमाने पर अफीम की खेती सड़कों से मीलों दूर ऊंचे पहाड़ों पर हो रही है। इस बार लोकसभा चुनावों में पुलिस की व्यस्तता का पूरा लाभ ड्रग माफिया ने उठाया है। कुल्लू और मंडी के ऊंचे पहाड़ों में इस बार लगभग 20 हजार बीघा भूमि पर अफीम की खेती होने की सूचना है जिसमें से आधी फसल काटी जा चुकी है और आधी अभी भी ऊंचे पहाड़ों के बगीचों और वन भूमि पर खड़ी है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है लेकिन इससे पहले भी 2003 में अकेले मंडी जिला की दुर्गम चौहार घाटी में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और पुलिस ने संयुक्त आप्रेशन कर 5 हजार बीघा भूमि पर खड़ी अफीम की फसल नष्ट की थी। तब कई ऊंचे पहाड़ों पर यह टीम पहुंच भी नहीं सकी थी। उस वक्त भी चौहार घाटी में लगभग 10 हजार बीघा भूमि पर अफीम की खेती होने की सैटेलाइट इमेज से पुष्टि हुई थी। 

उसके बाद अफीम की खेती को ड्रग माफिया ने मंडी और कुल्लू की सीमा से सटे ऊंचे क्षेत्रों में शिफ्ट कर दिया है। हालांकि चौहार घाटी के अलावा चम्बा, शिमला और सिरमौर के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में भी अफीम और भांग की खेती कहीं-कहीं होने की सूचनाएं संबंधित एजैंसियों के पास पहुंचती रहती हैं। यही नहीं, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों पर राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर भांग और अफीम की खेती नष्ट करने का बड़ा अभियान भी चलाया था। हर साल अफीम और भांग के लाखों पौधे संबंधित एजैंसियां नष्ट करती आ रही हैं। बावजूद इसके अब फिर से नशे की बड़ी फसल प्रदेश में खड़ी है। एक अनुमान के अनुसार 20 हजार बीघा भूमि पर खड़ी इस फसल से तकरीबन 40 मीट्रिक टन अफीम तैयार होगी और  उससे 4 से 5 हजार किलोग्राम चिट्टा तैयार होगा जो हिमाचल प्रदेश ही नहीं, देश के दूसरे राज्यों में भी तस्करी कर पहुंचाया जा सकता है। 

यह सरकार के लिए बड़ी ङ्क्षचता का विषय है। अगर समय रहते अफीम और भांग की खेती को बंद नहीं करवाया गया तो दूसरे राज्य देवभूमि हिमाचल पर इल्जाम लगाकर इसे कलंकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पहले भी पंजाब के तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पंजाब में नशे की पूर्ति के लिए हिमाचल प्रदेश के सिर पर इल्जाम लगा चुके हैं। 

मुख्यमंत्री गंभीर लेकिन अफसरशाही सुस्त
हिमाचल प्रदेश की युवा पीढ़ी के चिट्टे सहित अन्य नशों की गिरफ्त में फंसने को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहित विपक्ष ने भी गंभीरता दिखाते हुए विधानसभा में इस पर गहन चर्चा की है। इन अवैध नशों से मुक्त हिमाचल बनाने के लिए जयराम ठाकुर ने युवा नव-निर्माण बोर्ड के गठन की घोषणा वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में की थी लेकिन पिछले कई महीनों से यह फाइल कभी गृह विभाग तो कभी आबकारी एवं कराधान विभाग के बीच फुटबाल बनी हुई है, जबकि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले इस उच्च स्तरीय बोर्ड का उद्देश्य प्रदेश में नशे की आदी हो रही युवा पीढ़ी को इसकी गिरफ्त से बाहर निकालना, ड्रग माफिया की सारी गतिविधियां खत्म करना, प्रदेश में हो रही नशे की खेती को खत्म कर लोगों को विकल्प उपलब्ध करवाना है।

इस बोर्ड का गठन सभी विभागीय सचिवों, पुलिस महानिदेशक और विशेषज्ञों की भागीदारी से किया जाना प्रस्तावित है परन्तु अब इसे केवल आबकारी एवं कराधान विभाग के अधीन करके गठित करने की कोशिश की जा रही है जिससे यह बोर्ड न तो उच्च स्तरीय(हाई पावर्ड) होगा और न ही प्रदेश में तेजी से फैल रही नशे की इस गंभीर बीमारी को खत्म कर पाएगा। मौजूदा हालातों को देखते हुए इस बोर्ड को शक्तिशाली रूप देने की जरूरत है क्योंकि बरसों पहले भी जब चौहार घाटी सहित कुल्लू में नशे की खेती की गंभीर समस्या सामने आई थी तो नारकोटिक्स कंट्रोल  ब्यूरो के सुझाव पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समन्वयक कमेटी का गठन भी किया था लेकिन यह कमेटी महज रस्मी ही साबित हुई। हालांकि राज्य पुलिस उपलब्ध संसाधनों के साथ नशे के अवैध कारोबार और खेती को खत्म करने के लिए अपनी भागीदारी निभा तो रही है लेकिन जिस पैमाने पर राज्य में नशे की खेती हो रही है वह उसका मात्र कुछ प्रतिशत ही नष्ट कर पा रही है।             -डा.राजीव पत्थरिया


 

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