कम सुनाई देने पर ना करें नजरअंदाज, ये रिपोर्ट बताएगी इसके नुकसान

  • Updated on 2/2/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। वैसे को कान संबंधी छोटी-छोटी दिक्कतों को लोग हल्के में लेते हैं लेकिन इस रिपोर्ट में दी गई जानकारियां सुनने के बाद कान के दर्द या किसी और तकलीफ को हल्के में नहीं लेंगे। रिपोर्ट की माने तो सुनने की क्षमता में कमी आने में ये आपकी यादाश्त को कमजोर कर देता है। ये खासतौर से उम्रदराज लोगों को ज्यादा परेशान करता है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में करीब 36 करोड़ लोग सुनने की बीमारी से जूझ रहे हैं। जिसमें 10 प्रतिशत बच्चे भी हैं। 

अमेरिका के ब्रिघैम एंड वूमेन अस्पताल में इस संबंध में एक रिसर्च की गई। इस रिसर्च में 10,107 पुरुषों को शामिल किया गया, जिनकी उम्र 62 वर्ष थी। 

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सुनने की क्षमता जिनकी हल्की है उन्हें भी 42 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों की माने तो बुजुर्गों में सुनने की समस्या होने से उन्हें डिमेंशिया होने का खतरा रहता है। हमारे देश में कम सुनाई देने जैसी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता जिसके वजह से मरीज को आगे चलकर और दिक्कतें हो जाती हैं। 

 डॉक्टरों का कहना है कि जन्मजात बहरापन में बहुत समय बाद बीमारी का पता चलता, लेकिन नवजात बच्चें को अगर लंबे समय तक पीलिया, मेनिंजाइटिस रहता है तो उसे नजरअंदाज न करें। इससे नवजात शिशु की सुनने की क्षमता में मध्यम व गंभीर स्तर की कमी आ सकती है।
 

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