Thursday, Mar 21, 2019

गोरे रंग की चाहत में न करें अपने चेहरे को बेकार, कोई क्रीम नहीं कर सकती चमत्कार

  • Updated on 2/22/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सांवले सलोने चेहरे को अगर किसी फेयरनेस क्रीम से गोरा बनाने की पहल में जुटे हैं तो इस खबर को गंभीरता से लेने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने दावा किया है कि संसार में अबतक कोई ऐसी क्रीम नहीं बनी है, जिससे सांवली या काली त्वचा को गोरा बनाया जा सके लेकिन फेयरनेस क्रीम के जरिए गोरा बनाने का कारोबार जरूर अपने पूरे शबाब पर है। आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि बजार में इस समय करीब 500 तरह की दवाएं और क्रीम बेची जा रही हैं, जिनका कारोबार अरबों रुपए में किया जा रहा है। 

स्टेरॉयड से हो रही है लोगों की त्वचा पतली : गोरा होने की चाहत लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़  रही है। लोग बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवा विक्रेताओं से क्रीम या दवा ले रहे हैं और दिन में कई बार इसका बेहिचक इस्तेमाल भी कर रहे हैं। हैरानी और सावधानी की बात यह है कि इन फेयरनेस क्रीमों में स्टेरॉयड जैसे घातक रसायनयुक्त तत्वों की मौजूदगी होती है। जिससे न केवल त्वचा पतली हो रही है बल्कि लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। आईएडीवीएल के संयुक्त सचिव डॉ. दिनेश देवराज के मुताबिक 63 दिन में देश भर के 50 से ज्यादा शहरों में करीब 12 हजार किलोमीटर की स्वस्थ्य त्वचा स्वस्थ्य भारत यात्रा कर तीन लाख लोगों से सीधे तौर पर मुलाकात करने के बाद दिल्ली पहुंचे त्वचा विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं और संबंधित जानकारी को सार्वजनिक कर लोगों को जागरूक करने की पहल में लगातार जुटे हैं। 

कुष्ठ रोगियों का भी पता लगाया : विशेषज्ञों की इस यात्रा के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि ज्यादातर कुष्ठï रोगी उड़ीसा, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में हैं। वहीं, राजस्थान के मुरैना में एक भी त्वचा रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं है। जिसका सीधे तौर पर झोलाछाप डॉक्टरों को लाभ मिल रहा है। 

अनुमानित तादाद से अधिक हैं विटिलिगो से प्रभावित मरीज : सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. रोहित बत्रा के मुताबिक अभी तक आंकड़ों के हवाले से यह बताया जाता रहा है कि विटिलिगो का प्रचलन सामान्य आबादी का 1 से 2 प्रतिशत ही है लेकिन इस यात्रा के दौरान पाया गया कि इस बीमारी से पीड़ित लोगों की तादाद 5 से अधिक है। 

तीन गुनी हुई त्वचा रोगियों की तादाद :आईएडीवीएल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मुकेश गिरधर ने बताया कि एम्स सहित तमाम बड़े अस्पतालों में त्वचा रोगियों की तादाद दो से तीन गुनी हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर मरीज फंगल संक्रमण से पीड़ित पाए जा रहे हैं। फंगल संक्रमण से निजात पाने के लिए ज्यादात्तर लोग दवा विक्रेताओं से क्रीम खरीदकर इसका बेझिझक इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि, वास्तविकता यह है कि ऐसा करने से उन्हें फायदे के बदले ज्यादा नुकासान हो रहा है। डॉ. ऋ षि पाराशर ने बताया कि इस समय देश में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जिसमें लोग फंगल संक्रमण की समस्या से बचे हुए हों। डॉ. पाराशर के मुताबिक टीवी पर सिनेमा हस्तियों द्वारा प्रचारित क्रीमों के प्रति आकर्षण खतरनाक साबित हो रहा है। 

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