Tuesday, Oct 19, 2021
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dr o p mishra said will be financially hurt behind bars  pragnt

आर्थिक चोट पहुंचाने वाले होंगे सलाखों के पीछे: ज्वाइंट सीपी, डॉ. ओ.पी. मिश्रा

  • Updated on 3/1/2021

नई दिल्ली/ संजीव यादव। बड़े नामी गिरामी लोग जब मेहनत की कमाई जो बैंक, प्रॉपर्टी या अन्य किसी भी रूप में होती है, उसे जालसाज और ठगी कर गबन या हड़प लेते हैं तो व्यक्ति टूट जाता है। जहां ऐसे केसों में आम व्यक्ति की मुश्किलें बढ़ती हैं, वहीं आरोपी की पकड़ आसान नहीं होती, कानूनी दांव पेंचों में जहां पीड़ित ठोकरे खाता है, वहीं आरोपी उसी कानून का सहारा लेकर खुलेआम घूमता है, लेकिन राजधानी दिल्ली (Delhi) में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गत वर्ष में एक नई पहल करते हुए ऐसे अपराधियों को सलाखों को पीछे पहुंचाया है।

इसमें सबसे ज्यादा श्रेय जहां पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव को जाता है, वहीं बड़े अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने का काम ज्वाइंट सीपी ओपी मिश्रा और उनकी विंग ने किया है। क्या आप जानते हैं कि राजधानी में ईओडब्ल्यू विंग ने गत एक वर्ष में देश में सबसे ज्यादा आर्थिक अपराध के मामलों को निपटाया है और केसों का पर्दाफाश किया। आखिर कैसे! इसी पर नवोदय टाइम्स के लिए संजीव यादव ने ज्वाइंट सीपी ओपी मिश्रा से विशेष बातचीत की।

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ऐसा कहा जाता है कि नामी गिरामी लोग, बड़ी कंपनियां बड़ी आसानी से लोगों को धोखा देकर करोड़ों की चपत लगा देते हैं और खुलेआम घूमते हैं,आखिर ऐसा कैसे हो जाता है।
अपराध दो प्रकार के होते हैं,पहला वो क्राइम जो खुलेआम सीधे तौर पर सड़क घर या कहीं भी किया जाता है,लेकिन दूसरे अपराध की श्रेणी में साइबर या ऐसे अपराध आते हैं,जो कागजों के जरिए किए जाते हैं। पहली श्रेणी के अपराधों में तो आरोपी को पकडऩा आसान होता है, लेकिन दूसरी श्रेणी में कई कानूनी अड़चनें होती हैं,जिसके कारण अपराधी ऐसे अपराध करता है। लेकिन मौजूदा ईओडब्ल्यू ने इस मिथक को तोड़ा है, बड़े कॉरपोरेट हों,या व्यापारी,या फिर बिल्डर या नामी गिरामी हस्तियां, आप रिकॉर्ड देखें तो आपको पता चलेगा कि जिसने भी पैसों के लेन देन में अपराध किया, उसे हमने छोड़ा नहीं।

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ये बात सही है, मौजूदा समय में आपकी यूनिट बेहतरीन कार्यों को कर रही है,ऐसे में जब आप किसी बड़े कॉलर पर हाथ डालते हैं तो दबाव भी दिखता है, इसे किस रूप में लेते हैं।
ऐसा नहीं है, कॉलर वाइट हो या ब्लैक, दिल्ली पुलिस के लिए ये मायने नहीं रखता। भारत सरकार और मौजूदा दिल्ली पुलिस काम में विश्वास रखती है, गत वर्ष के आंकड़े ही साबित करते हैं कि जिसने भी आर्थिक अपराध के तहत धाोखाधड़ी की, उसे हमने नहीं छोड़ा,बल्कि ऐसे सबूत खोजे और चार्जशीट पेश की, जिससे आरोपी जेल से बाहर भी नहीं निकल पाए। रही बात दबाव की तो मैं हूं या पुलिस आयुक्त सवाल ही नहीं। जब देश के मौजूदा प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार को मिटा रहें तो ऐसे में दबाव आता ही नहीं है।

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पहले व्यक्ति बड़े अर्थिक अपराध करने से नहीं डरता था, आखिर क्यों और इसके बड़े कारण क्या थे।
देखिए आर्थिक अपराध को अगर आप देखें तो एक जो व्यक्ति इसे करता है तो वह एक व्यक्ति से नहीं बल्कि सैकड़ों या ये संख्या हजारों में होती है। अब जब अलग-अलग एफआईआर होती थी और अलग जांचें होती थी तो कई मुश्किलें आती थी। किसी जांच में अगर किसी भी आरोपी को बेल मिल जाती थी, उसके अन्य केस कमजोर पड़ जाते थे। इसके अलावा थानों में उतने प्रोफेशनल पुलिसकर्मी नहीं होते थे,इसलिए देश में हर जगह ऐसी विंग बनाई गई जो प्रोफेशनल तरीके से ऐसे केसों में देखे। इसलिए समय बदला है और अब राजधानी में तो कम से कम कोई भी व्यक्ति जब किसी के साथ आर्थिक मामलों से जुड़ी धोखाधड़ी करता है तो उसे सलाखों के पीछे भेजा जाता है। राजधानी में तो अब लोग ऐसे श्रेणी के अपराधों को करने में डरने लगे हैं। 

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गत एक वर्ष में कुछ ऐसे केसों में बारें में बताइए जो आम व्यक्ति के सपने से जुड़े हों और उसमें बड़ी ठगी हुई हो। 
ऐसे कई केस हैं। हाल में सबसे पहले केस को देखें तो डीडीए की लैंड पुलिंग योजना के नाम पर 290 लोगों से करोड़ों की ठगी। अभी योजना आई नहीं पूरी तरह से लेकिन ठगों और जालसाजों ने मिलकर फर्जी सोसायटी बनाई, बोर्ड सड़कों पर लगा दिए और लोगों के घरों को सपना दिखाते हुए करोड़ों की ठगी की। इस मामले में हमने सोसायटी के तीनों आरोपी को गिरफ्तार किया है, इसके अलावा जांच जारी है।

आम्रपाली प्रकरण से जुड़े मामले जिसमें बिल्डर ने लोगों को ख्वाब दिखाया और उनके निदेशकों ने सोचा कि बड़े लोग गिरफ्तारी नहीं होगी, लेकिन हमने आम लोगों को परेशानियों को देखा और सबूत एकत्र किए। इसमें समय काफी लगा, पहले राजधानी के सभी थानों से इस ग्रुप से जुड़ी एफआईआर को एक किया, एक विशेष टीम बनाई और फिर ऐसे सबूत पेश किए, जिसके बाद वे जेल की सलाखों के पीछे गए। इस तरह के कई बड़े नाम और कॉलर हैं, जिन्हें हमने सलाखों के पीछे भेजा।

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गत एक वर्षों में ईओडब्ल्यू की कार्यशैली काफी बदली है, ट्रैक रिकॉर्ड भी सुधरा है, इसके पीछे की बड़ी वजह क्या है। 
हमारे सीनियर अधिकारी और सबसे बड़ी बात काम की लगन। मैं अनेक पदों पर रह चुका हूं, हर काम को चैलेंज के रूप में लेता हूं। पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव भी खुद चाहते हैं कि आर्थिक अपराध एक आम व्यक्ति पर पड़ने वाली बड़ी चोट होती है,जिससे जहां केवल एक व्यक्ति के सपने ही नहीं बिखरते, बल्कि उससे जुड़े परिवार के लोग भी टूट जाते हैं। ऐसे में ठाना गया कि ऐसी चोट पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त से निपटा जाए, जिसके बाद से हमने राजधानी में सबसे पहले अर्थिक अपराध से जुड़े केसों की श्रेणी को बनाया, उनकी छटनी की और फिर एक विंग में उन्हें एकत्र किया। जिस केस में भी प्रारंभिक एविडेंस मिले, उनकी जांच करते ही एफआईआर तत्काल दर्ज की गई और फिर पेशवेर जांच अधिकारी इस टीम में लगाए गए, इसी का नतीजा है जो बदलाव दिखा है। दिल्ली पुलिस और ईओडब्ल्यू विंग से हमेशा जालसाजों को डर रहा है, क्योंकि देश में राजधानी की ईओडब्ल्यू विंग का ट्रैक रिकॉर्ड सबसे बेहतर है।

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