Sunday, Dec 04, 2022
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drharshvardhan met doctors on strike against nationalmedicalcommissionbill

NMC बिल के खिलाफ हड़ताल कर रहे डॉक्टरों से मिले हर्षवर्धन, कही ये बात...

  • Updated on 8/2/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री (Union Health Minister) डॉक्टर हर्षवर्धन (Dr Harshvardhan) ने हड़ताल (Strike) कर रहे डॉक्टरों से मुलाकात की। हर्षवर्धन ने डॉक्टरों से काम पर लौटने की भी अपील की। दिल्ली (New Delhi) सहित देश भर के डॉक्टर नेशनल मेडिकल कमीशन (National Medical Commission Bill) बिल  के खिलाफ हड़ताल पर हैं। 

हर्षवर्धन ने मीडिया को बताया कि मैने डॉक्टरों से मुलाकात कर नेशनल मेडिकल कमीशन के प्रावधानों को लेकर हो रही गलतफेहमी के विषय में बात की। साथ ही उनको ये भी बताया कि ये विधेयक देश, डॉक्टरों और मरीजों की भलाई के लिए ही है। मैंने उनसे अपील की है कि इस विरोध प्रदर्शन को बंद कर काम पर लौंटे। 

दिल्ली के बड़े अस्पताल एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, लोकनायक अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हैं। बिन इलाज के मरीज परेशान हैं। डॉक्टरों की इस हड़ताल के चलते दिल्ली समेत पूरे देश में लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। 

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नीम-हकीमी को वैध करने का प्रवधान

इस विधेयक की धारा 32 के तहत नीम-हकीमी को वैध करने का प्रवधान किया जा रहा है। जिसके कारण इंडियन मेडिकल एसोसिएशन इसका विरोध कर रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का मानना है कि इस विधेयक के द्वारा लोगों की सुरक्षा के साथ समझौता किया जा रहा है। साथ ही आईएमए ने इसे लोकतंत्र पर प्रहार भी बताया है। डॉक्टर्स का कहना है कि इस विधेयक के तहत समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन किया जा रहा है। बता दें कि लोकसभा में पास होने के बाद इस बिल को अब राज्यसभा में भी पास कर दिया गया है। 

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पहले ही किया था विरोध प्रदर्शन का आह्वान
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पहले से ही इस विधेयक के विरोध में प्रदर्शन के लिए डॉक्टरों का आह्वान किया था। सोमवार 29 जुलाई के दिन जंतर-मंतर पर 'दिल्ली आंदोलन' प्रायोजित करने की घोषणा की गई थी।

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निरस्त हो जाएगा चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956
जानकारी के लिए आपको बता दें कि 17 जुलाई के दिन इस विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई थी। मुख्यत: इस विधेयक को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के स्थान पर चिकित्सा आयोग की स्थापना के लिए लाया गया है। निजी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50 फीसदी सीटों के लिए सभी शुल्कों का नियमन चिकित्सा आयोग करेगा। इस विधेयक के आने के बाद चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 निरस्त हो जाएगा।

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