Thursday, Feb 25, 2021
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Driverless Delhi Metro में होंगे ये बदलाव, कमांड रूम से रखी जाएगी नजर

  • Updated on 12/30/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राजधानी दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली मेट्रो 28 दिसंबर से ड्राइवरलेस (Driverless Delhi Metro) हो गई है। इसकी शुरुआत मेजेंटा लाइन से की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 28 दिसंबर सुबह 11 बजे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) की मजेंटा लाइन पर देश की पहली चालक रहित मेट्रो को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

ड्राइवरलेस मेट्रो के लिए डीएमआरसी कई सारे बदलाव मेट्रो में करने जा रहा है। DMRC के प्रवक्ता का कहना है कि दिल्ली मेट्रो अंततः अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक (यूटीओ) का उपयोग करेगी, जो अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक का उपयोग करेगी जिसे संचार-आधारित ट्रेन नियंत्रण (सीबीटीसी) कहा जाता है।

Delhi Metro: देश की पहली चालक रहित मेट्रो ट्रेन को PM मोदी ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

ट्रेन सहायक करेंगे निगरानी
जनकपुरी पश्चिम से बॉटनिकल गार्डन तक चलने वाली 37 किलोमीटर लंबी मैजेंटा लाइन पर कुल 25 से 30 ट्रेनें चल रही है और सभी ट्रेन ड्राइवरलेस की जाएंगी। दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों के अनुसार ट्रेन में ट्रेन सहायक रहेंगे जो की पूरी तरह से निगरानी रखेंगे। इस लाइन के अलावा तीसरे चरण की बाकी सभी लाइनें भी तकनीकी तौर पर सक्षम है और उन पर भी भविष्य में ड्राइवरलेस मेट्रो चलाई जा सकती हैं।

डीएमआरसी की तैयारी है कि वो मेट्रो में हर एंगल से कैमरे लगाकर पूरी तरह से मेट्रो को मॉनिटर करे। इसके साथ ही कमांड रूम से मेट्रो पर नजर रखी जाएगी। जैसे ही .ये सिस्टम पूरी तरह से काम करने लगेगा तो ड्राइवर के केबिन को मेट्रो से हटा दिया जाएगा।  ड्राइवरलेस मेट्रो में किसी भी इमरजेंसी के दौरान कमांड रूम से अन्य स्टेशनों को सूचित किया जाएगा और स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिश की जाएगी। 

चरणबद्ध तरीके से यूटीओ मोड में संचालित करने की योजना
दिल्ली मेट्रो पिंक लाइन और दिल्ली मेट्रो मजेंटा लाइनों को चरणबद्ध तरीके से यूटीओ मोड में संचालित करने की योजना है। DMRC इसे ऑटोमेशन ग्रेड 2 या GoA2 से GoA3, और अंत में GoA4, जो पूरी तरह से अनअटेंडेड ट्रेन ऑपरेशन हैं, के चरणों में संचालित किया जाएगा।

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बेहतर होगी मेट्रो
दिल्ली मेट्रो में पहले इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक की तुलना में यह उन्नत तकनीक है, ट्रेन संचालन में अधिक दक्षता और सुरक्षा की अनुमति देती है। सीबीटीसी दो ट्रेनों के बीच न्यूनतम दूरी को भी कम करता है, जिससे नियमित मेट्रो सेवाओं के दौरान ट्रेन संचालन की आवृत्ति में वृद्धि होती है।

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