ड्राई एरिया के बावजूद हरकी पैड़ी तक बिकती है शराब

  • Updated on 2/8/2019

हरिद्वार/नवीन पांडेय। जनपद के झबरेड़ा थाना अंतर्गत कच्ची शराब पीने से अब तक 17 लोगों की मौत और कई जिंदगियों की अस्पताल में चल रही जंग ने सिस्टम को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। शासन ने तुरंत तेरह आबकारी और हरिद्वार पुलिस ने चार पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया।

शासन ने मजिस्ट्रेटी जांच भी बैठा दी है, पर सवाल उठता है कि आखिर मौत का जिम्मेदार कौन है। सिस्टम यदि शराब माफिया पर मजबूती से ‘दांत गड़ाता’, तो शायद आज ये लोग जिंदा रहते। जनपद के भगवानपुर, झबरेड़ा, नारसन, कलियर, पथरी, लक्सर सहित कई गांव हैं, जहां जंगल और गांवों में कच्ची शराब बनाई जाती है।

हैरत की बात यह है कि विश्व प्रसिद्ध हरिद्वार के हरकी पैड़ी तक शराब पहुंच जाती है। प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करके पीठ थपथपा लेता है, पर 'जड़ पर वार' करने में अपने हाथ जाने क्यों 'थाम' लेता है। नतीजा झबरेड़ा जैसी घटना सामने आती है।

अवैध शराब से हुई मौत, मुआवजे पर होगा विचार

अब सरकार, शासन, प्रशासन और पुलिस भी कार्रवाइयों का सिलसिला शुरू करेगी। जांच के दायरे में आए जिम्मेदारों पर शिकंजा कसा है और कसेगा, पर जनपद के कई गांवों और गांव से लगते जंगलों में कच्ची शराब बनाई जाती है। ये बात खुद पुलिस और आबकारी विभाग की टीम की छापेमारी में कई बार सामने आ चुकी है।

पर कभी न तो आबकारी विभाग और न ही पुलिस ने इस बीमारी को जड़ से खत्म करने की कोशिश की। लिहाजा, कुछ समय के लिए ये ‘काला कारोबार’ थम जाता है, पर फिर कहीं न कहीं आपसी गठजोड़ करके लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने का सिलसिला शुरू कर दिया जाता है।

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