Thursday, Feb 02, 2023
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फेस्टिव सीजन में भा रहे हैं सूखे मेवे, खारी बावली के ड्राईफ्रूट्स मार्केट में लौटी रौनक

  • Updated on 10/16/2022

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। त्योहारों का शुभारंभ शारदीय नवरात्रि से हो चुका है। ऐसे में दीवाली पर गिफ्ट लेने और देने का प्रचलन भी दशहरा बीतने के बाद शुरू हो चुका है। ऐसे में फेस्टिव सीजन में जो सबसे अधिक गिफ्ट देना या लेना लोगों को पसंद है, उसमें ड्राईफ्रूट्स यानि सूखे मेवे सबसे टॉप पर रहते हैं। वॉल सिटी में बने मुगलिया बाजार चांदनी चौक के खारी बावली को सूखे मेवों का सबसे बड़ा थोक बाजार कहा जाता है। जिसकी रौनक फेस्टिव सीजन में बढ़ गई है। जिसे देखकर साफ लगता है कि इस फेस्टिव सीजन में सूखे मेवों की डिमांड अच्छी रहने वाली है। वैसे अभी जो बादाम खारी बावली में मिल रहा है वो साल 2021 की फसल का है। अमेरिका से बादाम आने में अभी 45 से 60 दिन का वक्त लगेगा। तो आइए जानते हैं कि क्या है सूखे मेवे के दाम और खारी बावली का व्यापार।

कैलिफोर्निया बादाम की रहती है सबसे ज्यादा डिमांड
बता दें कि अभी पुराने बादाम का भाव थोक में 630 से 650 रुपए किलो है। नया बादाम आने पर रेट 15 से 20 रुपए किलो कम हो सकता है। जबकि उम्मीद 40 से 50 रुपए किलो कम होने की थी। डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य गिरने से व्यापारियों को इंपोर्ट महंगा पड़ रहा है। इसका असर बाजार में महसूस होगा। बादाम सबसे ज्यादा कैलिफोर्निया से आता है। बीते 15 दिन पहले अचानक बादाम 1000 रुपए प्रतिकिलो पहुंच गया था जो अब दोबारा सामान्य हो गया है
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अफ्रीकन काजू की प्रोसेसिंग भी होती है इंडिया में
काजू अफ्रीका व भारत दो जगहों के खारी बावली में बेचे जाते हैं। लेकिन रॉ काजू की प्रोसेसिंग सिर्फ इंडिया में मैंग्लोर व उडीसा में होती है क्योंकि अफ्रीका अभी उस तरह से रॉ काजू की प्रोसेसिंग करने में सक्षम नहीं है जैसी इंडिया में की जाती है। इसीलिए काजू इंडिया का हो या अफ्रीका का उसे बोलते मैंग्लोर काजू ही हैं। इन काजूओं की कीमत थोक में 800-1500 रुपए प्रतिकिलो बाजार में उपलब्ध हैं। हालांकि 4 टुकड़ा काजू 575-650 व काजू 320 670-740 रुपए प्रतिकिलो बेचा जा रहा है।

ईरान व कैलिफोर्निया से आता है पिस्ता
खारी बावली में सबसे अधिक पिस्ता दो देशों से आता है इनमें ईरान व कैलिफोर्निया हैं। हालांकि लोगों के मन को भाने की बात करें तो वो ईरान का पिस्ता भाता है। यही वजह है कि ईरान से आने वाला पिस्ता कैलिफोर्निया के मुकाबले ऊंचे दामों पर बिकता है। जहां ईरान से आने वाला पिस्ता 1100 रुपए प्रतिकिलो थोक भाव में बिक रहा है। वहीं कैलिफोर्निया के पिस्ते का दाम 1 हजार रुपए प्रतिकिलो है।

नासिक की किशमिश ने सबको पछाड़ा
खारी बावली में सबसे ज्यादा किशमिश में डिमांड नासिक की किशमिश की हमेशा से ही रही है। इसकी वजह इसका थोड़ा गुद्देदार होना व साइज में बढ़ा होना भी होता है। किशमिश को कई केटेगरी में बांटा जाता है। इसमें जो सबसे सस्ती किशमिश है वो खारी बावली में थोक से 250 रुपए प्रतिकिलो बिक रही है जबकि सबसे महंगी किशमिश 750 रुपए प्रतिकिलो बेची जा रही है। गिफ्ट्स पैक में भी सस्ती होने की वजह से लोग किशमिश लेना ज्यादा पसंद करते हैं।

अखरोट को संभालना होता है मुश्किल, व्यापारी होते हैं परेशान
बात यदि गिफ्ट्स पैक की करें तो किशमिश व बादाम और काजू के बाद लोग अखरोट को सबसे अधिक पसंद करते हैं। खारी बावली में कैलिफोर्निया व साउथ अमेरिका के अखरोट काफी बिकते हैं। इसकी वजह इनके साइज का बड़ा होने के साथ ही लंबी देर तक संरक्षित होना होता है। जबकि भारतीय अखरोट मात्र 15 दिनों में खराब हो जाते हैं। विदेशी अखरोट थोक में 500 रूपए प्रतिकिलो मिल रहे हैं, वहीं भारत के अखरोट 350 रूपए में बिक रहे हैं। 
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अफगानी ड्राईफूट्स की डिमांड ज्यादा, मिल रहे हैं अच्छे दाम
अफगानिस्तान से आने वाले ड्राईफ्रूटस की लोगों के बीच डिमांड काफी ज्यादा है, खासकर जबसे अंजीर को हेल्थ के साथ जोड़ दिया गया है तबसे उसकी डिमांड बढ़ गई है। लेकिन डिमांड के अनुसार सप्लाई नहीं हो पा रही है क्योंकि फसल में परेशानी देखने को इस साल मिली है। जिससे अफगानी ड्राईफ्रूट्स के व्यापारियों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। इसमें अंजीर के साथ ही खूबानी और मुनक्का भी शामिल हैं। अंजीर के दाम 2500-3000 रुपए प्रतिकिलो हैं।

दो सेगमेंट में बंट गया है ड्राईफ्रूट्स का बिजनेस
इधर कुछ सालों से देखने को मिल रहा है कि ड्राईफ्रूट्स का बिजनेस दो सेगमेंट मॉडर्न रिटेल और जनरल ट्रेंड में बंट गया है। जहां मॉडर्न रिटेल में बड़े मॉल्स, ब्रैंडिड रिटेल शॉप और ई-कॉमर्स जैसे माध्यमों में व्यापार होता है, जबकि जनरल ट्रेड में किराने की दुकान पर जाकर खरीदारी करना होता है। ऐसे में मॉर्डन रिटेल सेक्टर में ड्राईफ्रूट्स का काम अच्छा देखने को मिल रहा है। इसमें भी कॉरपोरेट गिफ्टिंग से मामला ओर फायदे वाला हो जाएगा। कंपनियां अपने कर्मचारियों को ड्राईफ्रूटस गिफ्ट में देंगी, जिससे काम ओर बढ़ेगा।

 

ऑनलाइन से हो रहा है खारी बावली के व्यापारियों को नुकसान : आयुष
खारी बावली में जिक्रा ड्राईफ्रूट्स के थोक व्यापारी आयुष मोदी ने बताया कि इस साल मार्केट को कोविड से पहले होने वाले फायदे का 70 फीसदी ही मिल पा रहा है यानि अभी भी 30 फीसदी का नुकसान है। व्यवसाय में दो साल बाद तेजी आई है और हो सकता है दीवाली आने पर बाजार स्थिर हो जाए। इस साल लोग ऑनलाइन मार्केटिंग एप के जरिए जमकर ड्राईफ्रूट्स खरीद रहे हैं। खारी बावली के कई व्यापारी उसमें लिस्टिंग करवाने के प्रयास में भी लगे हैं लेकिन अभी तक मुश्किल से कुछ लोगों को ही जोड़ा गया है क्योंकि उनके मानक काफी हाई रखे गए हैं। साथ ही ऑनलाइन कंपनियां अपना खुद का प्रोडक्ट्स लाती हैं तो दूसरे के नाम व लोगो को शामिल किए जाने पर काफी कठोर नियम लागू करती हैं। जिसका नुकसान खारी बावली के व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। 


40-45 फीसदी रह गया है काम
रवींद्र मेहता ने बताया कि 3-4 साल पहले तक बादाम सहित अन्य ड्राईफ्रूटस की खपत 80-85 फीसदी दिल्ली और मुंबई के बाजारों पर निर्धारित होता था लेकिन अब ये घटकर 40-45 फीसदी पहुंच गया है। देश में जीएसटी आने से सभी जगह टैक्स का एक रेट लगता है। छोटे-छोटे कस्बों में काम होने लगा है। हर शहर में इंपोर्टर हो गए हैं। अब काजू, बादाम, किशमिश, अखरोट का व्यापारी भी उत्पादक केंद्रों से डायरेक्ट डिलिवरी ले रहा है। ड्राइफ्रूट्स का काम दिल्ली और मुंबई की मंडियों में घूमकर नहीं हो रहा है। अब सोनीपत और गाजियाबाद जैसे शहरों के व्यापारी भी डायरेक्ट मैंग्लोर से काजू मंगा रहे हैं। उन्हें दिल्ली की मंडी आने की जरूरत नहीं है। 

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