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लॉकडाउन: ऑनलाइन राशन देने वालों का बुरा हाल, सब्जी और दूध फेंकने को हुए मजबूर

  • Updated on 3/27/2020

नई दिल्ली/प्रियंका। देश में फैले कोरोना वायरस के संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए पीएम मोदी ने देश में 21 दिनों तक लॉकडाउन करने की घोषणा करते ही लोगों ने अपने-अपने घरों में खाने पीने की वस्तुएं जमा करना शुरू कर दीं। हालात ऐसे हैं कि दुकानों पर अब सामान भी खत्म हो चुका है।

ऐसे में लोगों के पास अब केवल ऑनलाइन समान मंगाने का विकल्प बचा है। लेकिन लॉकडाउन के चलते पुलिस ऑनलाइन डिलीवरी करने वालों को रोक रही है। न सिर्फ रोक रही है बल्कि उनका सामान भी उठा कर फेंक रही है। ऐसे में ऑनलाइन सेवाएं देनी वाली ई-कॉमर्स कंपनियों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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कंपनियों ने लगाए आरोप
एक रिपोर्ट के मुताबिक ई-कॉमर्स कंपनियों का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान जब वे समान डिलीवर करने जाते हैं तो पुलिस उन्हें रोकती है और उन्हें मारती है। कई बार ऐसा होता है कि सामान फेंकना पड़ता है। इस तरह की लगातार घटनाएं होने के चलते उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। अपने नुकसान हो देखते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों ने इस मामले में सरकार से मदद की गुहार गुहार लगाते हुए हस्तक्षेप की मांग की है।

इस बारे में रिटेलर्स का कहना है कि पुलिस के रोके जाने और परेशान किए जाने से खाने-पीने की ताजा चीजों को हमें फेंकना पड़ा और कई चीजों की बर्बादी हुई है।

हमारा काम भी आवश्यक सेवाओं में...
बिग बास्केट, फ्रेस मैन्यू और पोरटी मेडिकल जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रमोटर के. गणेश का कहना है कि सरकार के लॉकडाउन का फैसला सही है। लेकिन इस बीच जो लोग जरुरी सेवाओं के लिए काम कर रहे हैं उनके लिए सरकार को सोचना होगा। सरकार ने वैसे भी आवश्यक सेवाओं में लगे हुए लोगों को छूट दी है। हमारा काम भी आवश्यक सेवाओं में आता है। हम लोगों को खाने पीने का सामान, दवाई जैसी जरुरी चीजों की डिलीवरी करते हैं। लेकिन शायद हमें लगता है सरकार का यह निर्देश पुलिस अधिकारियों या प्रशासन तक नहीं पहुंचा है।

गणेश ने हम यह भी कहा कि लॉकडाउन के दौरान पुलिस अगर अपना काम कर रही है तो हम भी अपना काम कर रहे हैं। फिर पुलिस हमारे साथ बहुत बुरा व्यवहार क्यों कर रही है। पुलिस कई बार डिलीवरी करने वालों को मारती भी है और पुलिस ने हमारे एक हेल्थ वर्कर को गिरफ्तार भी किया गया है।

गणेश का कहना है कि देश के हालात खराब हैं लेकिन फिर भी हमारे डिलीवरी बॉय अपनी जान जोखिम में डाल कर लोगों तक आवश्यक चीज़ें पहुंचा रहे हैं। ऐसे में पुलिस को उनकी पिटाई नहीं करनी चाहिये।

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हो रही है सब्जी, दूध की बर्बादी
इस बारे में ऑनलाइन ग्रॉसरी रिटेलर ग्रोफर्स और फ्रेश टू होम ई-कॉमर्स कंपनी ने कहा कि पुलिस हमारे साथ भी ऐसा कर रही है। उन्होने बताया कि पुलिस आम जनता और डिलीवरी करने वालों में फर्क नहीं समझ पा रही है। पुलिस के इस व्यवहार के चलते खाने-पीने के सामान की बर्बादी होती है।

इस बारे में मिल्क बास्केट ने बताया कि पुलिस द्वारा परेशान किए जाने से हमें मजबूरन 15,000 लीटर दूध फेंकना पड़ा है और हमारी 10,000 किलो की सब्जी भी बर्बाद हो गई। उन्होंने बताया कि ऐसे हालात हैं कि अब हम गुड़गांव, नोएडा, हैदराबाद में दूध की डिलीवरी नहीं कर सकते।

पुलिस करेगी कार्रवाई
वहीँ इस बारे में घटनाओं की बढ़ती रिपोर्टों के बीच, केंद्र सरकार ने कहा कि यह ऑनलाइन सेवाएं भी बुनियादी आवश्यकताओं में आती हैं जिन्हें अपना काम करने देना चाहिये। वहीं दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी एमएस रंधावा ने भी इस बारे में कहा कि वितरण अधिकारियों पर हमला करने के आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। साथ ही गुड़गांव और नोएडा पुलिस ने भी ट्वीट करते हुए स्थानीय पुलिसकर्मियों को डिलीवरी सेवाओं की अनुमति देने के लिए कहा है।

 

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