Wednesday, Aug 10, 2022
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चार दशक में धरती से खत्म हो गए आधे जानवर: WWF

  • Updated on 10/30/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मानवीय करतूतों का प्रकृति और जीव-जंतुओं पर क्या असर हो रहा है, यह ताजा रिपोर्ट इस बात का खुलासा करती है। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड(WWF) ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार दुनिया में वन्य जीवों की आबादी में भारी कमी देखी गई है।

WWF की लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट के अनुसार पिछले 40 सालों में अफ्रीकी हाथियों, सुमात्रा के बाघों और ऑस्ट्रेलिया के वन्य जीवों की आबादी में औसतन 60 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन और इंटरनेशनल यूनियन फॉर द कंजर्वेशन ऑफ नेचर के साथ मिलकर किए गए अध्ययन में दुनिया की 4000 वन्य प्रजातियों को रेड लिस्ट में शामिल किया गया है।

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रिपोर्ट के अनुसार 1970 से लेकर 2012 तक वन्य जीवों की आबादी में 58 फीसदी की कमी आई है, जो 2020 तक बढ़कर 67 फीसदी हो जाएगी। इस रिपोर्ट में सीधे-सीधे मानव को निशाने पर लिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि धरती पर इंसान सबसे ताकतवर हो गया है और वही सबके लिये फैसले ले रहा है।

शहर बसाने, खेती करने की वजह से तेजी से जंगलों और चारागाहों की जमीन साफ हो रही है। रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट, अमेजन, कॉन्गो बेसिन, सुमात्रा और न्यू गीनिया को इस मामले में हॉटस्पॉट कहा गया है।  रिपोर्ट कहती है कि दक्षिण अमेरिका के वर्षावनों में हजारों वर्ग मील क्षेत्रफल की कमी से फसलों के उत्पादन को भी खतरे में डाल दिया है।

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रिपोर्ट के मुताबिक कुल 70000 पौधों की प्रजातियों का व्यवसायिक और दवा बनाने में इस्तेमाल का भी बुरा असर पड़ा है। अध्ययन में दुनियाभर से 3700 प्रजातियों के कुल 14,200 जानवरों को शामिल किया गया। इससे पता चला कि इंसान की बढ़ती हुई आबादी वन्य जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इंसान द्वारा की गई प्रदूषण में बढ़ोत्तरी, शिकार, जलवायु परिवर्तन भी इसके अन्य प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

अंत में रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि अभी स्थिति अनियंत्रित नहीं हुई है और इसे पलटा जा सकता है। क्योंकि इन प्रजातियों की आबादी अभी पूरी तरह से नष्ट नहीं हुई है।

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