Sunday, Aug 01, 2021
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वित्त मंत्री के ऐलान में क्या कुछ रहा खास, PM मोदी के महापैकेज के खर्च पर एक नजर...

  • Updated on 5/18/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना वायरस के कहर से पूरा देश परेशान है। आए दिन कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। वायरस के कारण देशभर में 31 मई लॉकडाउन लागू है। लॉकडाउन के कारण देश में अनेक प्रकार की आर्थिक गतिविधियां थम सी गई है। आर्थिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रूपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था। 

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20 लाख करोड़ के खर्च पर एक नजर
पीएम मोदी के राहत पैकेज के ऐलान के बाद वित्त मंत्री निर्मला सितारमण ने लगातार पांच दिन आकर  20 लाख करोड़ रूपये के विस्तृत खर्च की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, कुटिर उद्योग और गृह उद्योग से लेकर किसान व मजदूर तबके के लोगों की बात की। आइए वित्त मंत्री के घोषणा में मुख्य बातों को जानते हैं...

  • MSME फंड ऑफ फंड्स के जरिए 50 हजार करोड़ रुपये का इक्विटी इन्फ्यूजन बाजार में होगा। जो MSME बेहतर कर रहे हैं और वे अपने कोरोबार को विस्तार देना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सुविधा नहीं मिल पा रही है, उनके लिए MSME फंड ऑफ फंड्स का लाभ मिलेगा। 
  • सीतारमण ने बताया कि मधुमक्खी पालन के लिए 5,00 करोड़ की योजना भी सरकार लाई है। इससे मधुमक्खी पालन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। 
  • सरकार ने हर्बल खेती के विस्तार के लिए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। करीब 10 लाख हेक्टेयर में हर्बल उत्पादों की खेती की जाएगी। इससे 5,000 करोड़ की इनकम किसानों को सीधे होगी। 
  • इसके साथ ही सरकार ने 53 करोड़ पशुओं के टीकाकरण की योजना भी बनाई है। इसमें करीब 13,343 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 

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  • सरकार ने अब MSME के हित में इसकी परिभाषा बदल दी है। ये बदलाव मैन्युफैक्चिरिंग और सर्विस, दोनों इडंस्ट्रीज पर लागू होंगे। 1 करोड़ रुपये तक निवेश करके 5 करोड़ तक का कोरोबार करने वाली इंडस्ट्री सूक्ष्म कही जाएंगी। जबकि 10 करोड़ रुपये तक का निवेश और 50 करोड़ तक व्यापार करने वाली इंडस्ट्री लघु कहलाएंगी। वहीं 20 करोड़ तक का निवेश और 100 करोड़ रुपये तक का व्यापार करने वाली इंडस्ट्री मीडियम कहलाएगी।
  • 200 करोड़ रुपये तक की सरकारी खरीद में ग्लोबल टेंडर की इजाजत नहीं होगी। इस तरह घरेलू कंपनियों से टेंडर मंगवाए जाएंगे। इससे सरकार के मिशन 'लोकल के लिए वोकल' मंत्र को मजबूती मिलेगी। स्थानीय उत्पादों और सेवाओं का फायदा होगा। 

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  • गंगा नदी के किनारे 800 हेक्टेयर जमीन पर हर्बल प्रॉडक्ट्स के लिए कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। 
  • किसानों की फिक्सड आय, रिस्क फ्री फार्मिंग और क्वालिटी के स्टेंडर्ड करने के लिए एक कानून बनाया जाएगा। इससे किसानों का शोषण रोका जा सकेगा। 
  • इसके साथ ही वित्त मंत्री ने कहा कि सप्लाई चेन को दुरुस्त करने के लिए सरकार 500 करोड़ रुपये की मदद देगी।
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, कुटिर उद्योग और गृह उद्योग के लिए सरकार ने 3 लाख करोड़ रुपये का कोलैटरल फ्री ऑटोमैटिक लोन का प्रवाधान किया गया है। इसकी समय सीमा 4 वर्ष की होगी। 
  • MSMEs लोन के लिए पहले एक साल मूलधन वापस नहीं करना होगा। 31 अक्टूबर, 2020 से इस स्कीम का जारी रहेगी। इस योजना का लाभ लेकर 45 लाख यूनिट बिजनेस ऐक्टविटी दोबारा किया जा सकता है। 
  • संकट में फंसे कुटीर उद्योग के लिए के लिए 20 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं। इससे 2 लाख से अधिक यूनिट को फायदा मिलेगा। कुटीर उद्योग को बचाने के लिए ग्लोबल टेंडर पर रोक लगाई गई। 
  • सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन करने जा रही है। इसके साथ ही तिलहन, दलहन, आलू आदि जैसे उत्पादों को इसके जरिए डि-रेग्युलेट किया जा सकेगा। 

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  • केंद्र सरकार ने पीएम मत्स्य संपदा योजना भी शुरू की है। इसके लिए 20,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन को फायदा होगा। इसके लिए 9,000 करोड़ रुपये बुनियादी ढाचे के विकास में लगाए जाएंगे। 
  • माइक्रो फूड इंटरप्राइज के लिए 10,000 करोड़ की योजना भी लाई गई है। इससे बिहार में मखाना क्लस्टर, कश्मीर में केसर, केरल में रागी, आंध्र प्रदेश में मिर्च और उत्तर प्रदेश में आम से जुड़े क्लस्टर को तैयार किया जा सकेगा। 

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