Wednesday, Dec 08, 2021
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economist arun kumar estimates economy may fall by 25% in current financial year prshnt

अर्थशास्त्री अरुण कुमार ने अर्थव्यवस्था पर लगया अनुमान, चालू वित्त वर्ष में आ सकती है 25% की गिरावट

  • Updated on 1/18/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अरुण कुमार (Arun Kumar) का मानना है कि सरकार के दावे के विपरीत अर्थव्यवस्था में अधिक तेजी से सुधार नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में 25 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। चालू वित्त वर्ष के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में बड़ी गिरावट से बजट अनुमान पूरी तरह दायरे से बाहर निकल गया है और बजट को दुरुस्त करने की जरूरत है।

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कृषि क्षेत्र में भी वृद्धि नहीं
कुमार ने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि में उतनी तेजी से सुधार नहीं आ रहा है, जैसा सरकार दिखा रही है। असंगठित क्षेत्र की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है और सेवा क्षेत्र के कुछ महत्वपूर्ण हिस्से भी उबर नहीं पाए हैं। मेरे विश्लेषण के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 25 प्रतिशत की गिरावट आएगी।

अप्रैल-मई में लॉकडाऊन के दौरान सिर्फ आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन हुआ। यहां तक कि कृषि क्षेत्र में भी वृद्धि नहीं हुई। भारतीय रिजर्व बैंक का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी। वहीं राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एन.एस.ओ.) ने अर्थव्यवस्था में 7.7 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया है।

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3.2 प्रतिशत बढ़कर 107.05 लाख करोड़ हुआ बैंक ऋण
बैंकों का ऋ ण चालू वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 9 माह (अप्रैल-दिसम्बर) के दौरान 3.2 प्रतिशत बढ़कर 107.05 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में बैंकों का ऋण 2.7 प्रतिशत बढ़ा था। वहीं 27 मार्च, 2020 को समाप्त पखवाड़े में बैंकों का अग्रिम 103.72 लाख करोड़ रुपए रहा था।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले 9 माह में बैंकों की जमा 8.5 प्रतिशत बढ़कर 147.27 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में बैंकों की जमा में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। बैंकों को निवेश का सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इस वजह से बैंकों की जमा में बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, एक जनवरी, 2021 को समाप्त पखवाड़े में सालाना आधार पर बैंकों का ऋण 6.7 प्रतिशत और जमा 11.5 प्रतिशत बढ़ी है।

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राजकोषीय घाटा पिछले साल से अधिक रहेगा
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के पूर्व प्रोफेसर कुमार ने कहा कि सरकार ने अप्रैल-जून और जुलाई-सितम्बर की तिमाहियों के लिए जो जी.डी.पी. दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं, उनमें भी कहा गया है कि इन आंकड़ों में बाद में संशोधन होगा। उन्होंने कहा कि भारत का राजकोषीय घाटा पिछले साल से अधिक रहेगा। राज्यों का राजकोषीय घाटा भी ऊंचे स्तर पर रहेगा। उन्होंने कहा कि विनिवेश राजस्व भी कम रहेगा, कर और गैर-कर राजस्व में भी कमी आएगी।

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आर्थिक पुनरुद्धार कई कारकों पर निर्भर
कुमार ने कहा कि भारत का आर्थिक पुनरुद्धार कई कारकों पर निर्भर करेगा। कितनी तेजी से टीकाकरण होता है और कितनी तेजी से लोग अपने काम पर लौट पाते हैं। हम 2021 में 2019 के उत्पादन स्तर पर नहीं पहुंच पाएंगे। संभवत: टीकाकरण के बाद 2022 में हम 2019 के उत्पादन का स्तर हासिल कर पाएं। आगामी वर्षों में वृद्धि दर निचले आधार प्रभाव की वजह से अच्छी रहेगी, लेकिन उत्पादन 2019 की तुलना में कम रहेगा।

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