Wednesday, Jun 19, 2019

उत्तराखंड में कम मतदान की समीक्षा में जुटा निर्वाचन आयोग

  • Updated on 4/14/2019

देहरादून/ब्यूरो। लोकसभा चुनाव (loksabha election) के पहले चरण में उत्तराखण्ड (uttarakhand) की पांचों सीटों के कुल मत प्रतिशत में आई कमी ने राजनीतिक दलों के साथ ही भारत निर्वाचन आयोग को चिंता में डाल दिया है। मतदान बढ़ाने को निर्वाचन आयोग की ओर से पिछले एक साल के दौरान देशभर में तमाम जागरूकता गतिविधियां चलाई गईं, फिर भी मतदान बढ़ने के बजाय घट गया।

निर्वाचन आयोग (Election Commission) अब इस बात की पड़ताल कर रहा है कि देश की सरकार को चुनने में मतदाताओं की दिलचस्पी कम क्यों हुई? देश में हुए पिछले तीन बार के आम लोकसभा चुनाव में उत्तराखण्ड में मतदान का प्रतिशत लगातार बढ़ता गया। पिछले ट्रैक को देखते हुए समझा जा रहा था, कि इस बार के लोकसभा चुनाव में भी उत्तराखण्ड  (uttarakhand) में कुल मत प्रतिशत पिछले के मुकाबले बढ़ेगा,लेकिन मत प्रतिशत पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले 0.67 फीसदी गिर गया।

बताते चलें कि भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission) के निर्देशानुसार स्वीप कार्यक्रम के तहत मतदाताओं को मतदान के लिए जागरूक करने के लिए देशभर में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। आयोग की तमाम कोशिशों और राज्य में सुहावना मौसम होने के बावजूद इस बार मतदान में कमी क्यों आई, इसके मायने टटोले जा रहे हैं।

पीठासीन अधिकारियों से जुटाई जानकारी

इस बार राज्य में मतदान में आई कमी का आंकड़ा प्राप्त होते ही निर्वाचन आयोग (Election Commission) हरकत में आ गया। आयोग ने ईवीएम (evm) जमा करते वक्त ऐसे पीठासीन अधिकारियों से मतदान के बारे में जानकारी जुटाई जिनके बूथ पर मतदान 70 फीसदी से अधिक या 50 फीसदी से कम हुआ।
 

2014 में हुई थी 7.64 फीसदी की वृद्धि

वर्ष 2000 में प्रथम राज्य गठन के बाद उत्तराखण्ड (uttarakhand) में 2004 में पहला आम लोकसभा चुनाव (loksabha election 2019) हुआ। जिसमें पूरे प्रदेश में कुल 48.07 प्रतिशत मतदान हुआ। इसके बाद 2009 में हुए आम लोकसभा चुनाव में यह मत प्रतिशत बढ़कर 53.43 हो गया। यानि राज्य में हुए कुल मतदान में पिछले के मुकाबले 5.36 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई। 2009 की तुलना में वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कुल मतदान में 7.64 फीसदी की रिकार्ड बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। पिछले चुनाव के आंकड़ों को देखते हुए उम्मीद थी कि इस बार भी कुल मत प्रतशित नया रिकार्ड बनाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बार उत्तराखण्ड में कुल मत प्रतिशत 61.50 रहा, जो वर्ष 2014 की मुकाबले 0.67 फीसदी कम है।   
 

 

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