Monday, Sep 27, 2021
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डीजल-पेट्रोल पर लगेगा चुनावी दांव, टैक्स में कटौती के आसार

  • Updated on 9/14/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में केंद्र सरकार सबसे बड़ा दांव डीजल-पेट्रोल पर लगा सकती है। चर्चा है कि चुनाव से पहले सरकार महंगाई को नियंत्रित करने और किसानों को खुश करने के लिए डीजल-पेट्रोल की कीमतों में राहत दे सकती है। 

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कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान मची अफरा तफरी से बने माहौल को निष्प्रभावी करने में केंद्र और राज्य सरकारें काफी हद तक सफल दिख रही हैं, लेकिन महंगाई उनके सामने बड़ी चुनौती बन कर उभरी है। कोरोना काल में जब लोगों को नौकरियां छिन रही थीं और बेरोजगारी चरम पर जा रही थी, ऐसे वक्त में भी सरकार ने डीजल-पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास नहीं किया। रसोई गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी होती रही। ईंधन की कीमत बढऩे का सबसे ज्यादा असर माल ढुलाई पर पड़ा है, जिसके चलते खाद्यान्न के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमत भी तेजी से बढ़ी है। विभिन्न संस्थाओं और राजनीतिक दलों के अपने सर्वे में यह साफ हो चुकी है कि इसका असर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव में पड़ेगा। महंगाई, रसोई गैस, डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतें सबसे अहम चुनावी मुद्दा बनेंगे। 

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सूत्र बता रहे हैं कि यूपी, उत्तराखंड, गोवा की सत्ता बचाने को मोदी सरकार महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। दो दिन पहले जारी हुए एनएसओ के आंकड़े भी इसकी तस्दीक करते दिखते हैं। खुदरा महंगाई दर जो अगस्त में 6.69 तक पहुंच गया था, घट कर 5.30 फीसद पर आ गया है, जो इस साल में बीते तीन महीने के सबसे निचले स्तर पर है। एनएसओ के ताजा डेटा के मुताबिक सब्जियों के काम में 11.7 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों को भी नियंत्रित करने की कोशिशों के चलते कमी आई है। हालांकि इसी अवधि में खाद्य तेल की कीमतों में 33 फीसद की तेजी आई है। ईंधन और बिजली की महंगाई दर में भी 12.95 फीसद तक पहुंच गया है। यही केंद्र सरकार के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं।

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बता दें कि पेट्रोल पर अभी करीब 33 रूपया और डीजल पर लगभग 32 रुपया केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगता है। राज्य सरकारें 20 से 22 रुपये तक पेट्रोल पर और करीब 13 से 14 रुपये तक राज्य कर (वैट) वसूली करती हैं।

 

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