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ई-सिगरेट पर रोक का अध्यादेश स्वागत योग्य, लेकिन पूरा प्रतिबंध ही समस्या का समाधान

  • Updated on 9/2/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए मसौदा अध्यादेश पर सरकार के विचार-विमर्श के बीच विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने इस कदम का स्वागत किया है। हालांकि उन्होंने कहा है कि इस तरह के उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध ही समस्या का समाधान है।

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अमेरिका में 2 लोगों की मौत ने  चिंता बढ़ाई
ई-सिगरेट के चलते अमेरिका में दो लोगों की मौत ने दुनियाभर में इस तरह की चीजों के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक व्यक्ति की मौत जून में और दूसरे की मौत अगस्त में हुई थी। सरकार पिछले महीने एक मसौदा अध्यादेश लेकर आई जिसमें ई-सिगरेट के उत्पादन, आयात, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध तथा नियम का उल्लंघन करने वालों को एक साल की जेल का प्रस्ताव शामिल है।     

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ई-सिगरेट निषेध अध्यादेश, 2019 प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद एक मंत्री समूह को भेजा गया है। विशेषज्ञ लंबे समय से कहते रहे हैं कि ई-सिगरेट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। हालांकि कुछ तबकों में यह गलत धारणा है कि इलेक्टॉनिक सिगरेट, निकोटिन सिगरेट का स्वस्थ विकल्प है।     

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विशेषज्ञों का मानना है कि अध्यादेश इस तरह की चीजों को रोकने में मददगार होगा, लेकिन संपूर्ण प्रतिबंध लगाने तक अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। राष्ट्रीय तंबाकू उन्मूलन संगठन के महासचिव डॉ. शेखर साल्कर ने  कहा अध्यादेश एक बड़ा कदम है। लेकिन भारत में ई-सिगरेट पर पूर्ण रोक का प्रावधान होने तक यह ज्यादा मददगार नहीं होगा क्योंकि ई-सिगरेट कंपनियां अवैध रूप से चलती रहेंगी।दिल्ली स्थित  एनजीओ ‘कंज्यूमर वॉयस’ के अनुसार भारत में 36 से अधिक ई-सिगरेट कंपनियां काम कर रही हैं, जबकि इनके पास कोई आधिकारिक अनुमति नहीं है।

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