Electronic gadgets are dangerous for children''s health

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बच्चों के लिए हैं बेहद खतरनाक, शरीर को ऐसे पहुंचा रहे नुकसान

  • Updated on 7/12/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। डॉक्टर्स (Doctors) का कहना है कि जो युवा गैजेट्स का इस्तेमाल अधिक करते हैं उनमें रीढ़ की हड्डी की समस्या सबसे अधिक होती है। दरअसल, जो युवा अपना ज्यादतर समय इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स(Electronic Gadgets) के साथ बिताते हैं वह काफी समय तक एक ही पोजीशन में बैठे रहते हैं, जिससे उनमें 'रिपिटिटिव इन्जरी' होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में जीवनशैली में सुधार करके, अच्छे पोषण और भरपूर व्यायाम से रिपिटिटिव इंजरी से बचा जा सकता है।

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स्पाइन सेवाओं के स्पेशलिस्ट कहते हैं कि 20 से 40 साल के प्रोफेशनल्स में स्पाइनल संबंधी ज्यादा समस्याएं देखी जाती हैं, क्योंकि उन्हें काफी समय तक एक ही पोजिशन में बैठकर काम करना पड़ता है।

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एक ही प्रकार की गतिशीलता और ओवर यूज की वजह से मांसपेशियों, टेंडंस और नव्र्स में दर्द उभरने लगता है, जिसे ओवरयूज सिंड्रोम, वर्क रिलेडेट अपर लिंब डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है।

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स्पाइन स्पेशलिस्ट कहते हैं कि अधिकतर लोग वर्किंग प्रोफेशनल होने की वजह से ऑफिस पहुंचने के लिए लंबी दूरी तक यात्रा करते हैं। इनमें से अधिकतर लोग ड्राइव करके पहुंचते हैं और इसके बाद फिर 8 से 9 घंटे एक जगह बैठकर काम करने में गुजार देते हैं।

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वे कम्प्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं, लंबी मीटिंग के लिए बैठते हैं और अपने मोबाइल पर उपलब्ध हो चुके सोशल मीडिया पर व्यस्त रहते हैं। वहीं घर पहुंचने के बाद लोग गैजेट का इस्तेमाल करते हैं और सो जाते हैं।

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मोबाइल(Mobile), लैपटोप और कंप्यूटर में ज्यादा समय बिताने से अनावश्यक एक्सपोजर स्पाइन पर बेवजह का तनाव डालता है और इससे लिगामेंट में स्प्रेन का खतरा बढ़ जाता है जो वर्टिब्रा को बांधकर रखता है। ऐसे में मांसपेशियों में कड़ापन आने लगता है और डिस्क में समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।
 

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