Thursday, May 13, 2021
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एल्गार मामला: अदालत ने रोना विल्सन, शोमा सेन की याचिकाओं पर जवाब मांगा 

  • Updated on 5/4/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बम्बई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सामाजिक कार्यकर्ताओं रोना विल्सन और शोमा सेन की उन याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करे जिसमें उन्होंने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में अपने खिलाफ आरोप रद्द करने का अनुरोध किया है। जस्टिस एस एस शिंदे और जस्टिस मनीष पितले की पीठ ने मामले की जांच कर रही एनआईए को भी निर्देश दिया कि वह सेन की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करे। 

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विल्सन और सेन ने इस साल की शुरुआत में उच्च न्यायालय में अपनी याचिका दायर की थी। इसमे अमेरिकी कंपनी आर्सेनल कंसङ्क्षल्टग की उस रिपोर्ट का हवाला दिया गया था जिसमें दावा किया गया था कि विल्सन के कंप्यूटर में इलेक्ट्रानिक साक्ष्य डाले गए थे। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि इस तरह के सबूतों से छेड़छाड़ विल्सन और उनके सह-आरोपी को मामले में फंसाने के लिए की गई थी। 

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पिछले हफ्ते, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने विल्सन की याचिका पर अपना जवाब दायर किया था और अमेरिकी कंपनी की रिपोर्ट से असहमति जतायी थी।      जांच एजेंसी ने कहा कि वह रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों और दावों का खंडन कर रही है। एजेंसी ने अदालत से विल्सन की याचिका खारिज करने का आग्रह किया था। मंगलवार को एनआईए के लिए पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने सेन की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। 

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याचिकाकर्ताओं की वकील एवं वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने अदालत को बताया कि उन्होंने याचिका में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत याचिकाकर्ताओं पर मामला चलाने के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2018 में दी गई मंजूरी को भी चुनौती दी है।     उन्होंने दावा किया कि मंजूरी उचित विचार किये बिना दी गई थी। उन्होंने कहा कि चूंकि सरकार मंजूरी प्राधिकारी थी, इसलिए उसे दोनों याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करना चाहिए। 

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जयसिंह ने दावा किया कि इस मामले में तत्कालीन जांच अधिकारी (आईओ) शिवाजी पवार मंजूरी प्राधिकार को सभी कागजात मुहैया कराने में विफल रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच अधिकारी ने जानकारी दबा दी थी, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से छेड़छाड़ के सवाल पर। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी, जो इस मामले में एक पक्षकार थे और उन्हें याचिकाओं पर अलग से जवाब दाखिल करने के लिए निर्देश दिया जाना चाहिए। महाराष्ट्र सरकार के वकील दीपक ठाकरे ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। 

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ठाकरे ने यह भी कहा कि वह इस बारे में निर्देश लेंगे कि क्या जांच अधिकारी इस मामले में एक पक्षकार के रूप में जवाब दे सकते हैं। अदालत याचिकाओं पर 16 जून को आगे की सुनवाई करेगी। यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके बारे में पुलिस ने दावा किया कि इससे शहर के बाहरी इलाके में स्थित कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास अगले दिन ङ्क्षहसा भड़की।     

 

 

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