विपक्ष का AAP पर निशाना, कहा- शेल्टर होम की असलियत के बाद भी प्रचार पर करोड़ों फूंकते हैं CM

  • Updated on 1/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली में बेघरों की ठंड से मौत सामने आने पर दिल्ली सरकार ने संबंधित विभाग से रिपोर्ट 
तलब की है। विकास मंत्री गोपाल राय ने कहा कि विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं, शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने बेघरों की मौत के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार 265 रैन बसेरे चला रहे हैं। इसकी क्षमता 25 हजार बेघरों के रहने की है, लेकिन मौजूदा समय में 18 हजार बेघर ही रह रहे हैं।

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पिछले 45 दिनों में ठंड से 331 बेघरोंं की हो गई मौत
प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा है कि देश की राजधानी दिल्ली में जैसे ही सर्दी आती है वह बेघर लोगों के जीवन पर कहर बनके टूटती है। हर साल केवल दिसम्बर में ही 200 से ज्यादा लोग मौत का शिकार हो जाते हैं।

वीरवार को आयोजित एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि सेंटर फॉर हॉलिस्टिक संस्था की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 45 दिनों में 331 लोगों की जान जा चुकी है।

आंकड़ों के अनुसार जनवरी के इन 14 दिनों के भीतर ही 96 लोगों की जान जा चुकी है। नॉर्थ दिल्ली में 23 बेघरों की जान जा चुकी है, जो सबसे ज्यादा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में बेघर लोगों को आश्रय देने का कार्य दिल्ली सरकार के शेल्टर बोर्ड का है।

शेल्टर बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार हाल ही में बेघर लोगों को सर्दी से बचाने के लिए उन्होंने 200 से ज्यादा शेल्टर होम बनाए हैं, लेकिन उन शेल्टर होम की वास्तविक हालत के बारे में भी मीडिया में क्या दिखाया गया वो हम सबने देखा। इस सब के बावजूद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शेल्टर होम के नाम पर करोड़ों रुपए का प्रचार करने से नहीं चूके। 

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दिल्ली में रैनबसेरे कम, मौत का शिकार हो रहे बेघर: विजेन्द्र
विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने कहा है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल की चुनावी तैयारियों में व्यस्तता के चलते कंपकपाती ठंड के कारण इस माह के पहले 14 दिनों में 96 और पिछले 24 घंटे में 6 बेघर मौत की आगोश में समा गए। यह चिंता का विषय है कि सबसे ज्यादा मौतें उत्तरी दिल्ली के कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन जैसे क्षेत्रों में इलाकों में जहां सरकार सबसे ज्यादा और सबसे बड़े रैनबसेरे होने का दावा करती है।

उन्होंने सरकार का आह्वान किया कि तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, ऐसे में सरकार का दायित्व है कि वह सुनिश्चित करे कि बेघर लोगों की मौत का आंकड़ा न बढ़े। उसके द्वारा चलाए जा रहे 212 रैनबसेरे बेघरों को देखते हुए बहुत कम हैं। सरकार को इसके लिए समुचित प्रबंध करने होंगे। 

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सरकारी स्कूलों व भवनों तथा धर्मशालाओं में बेघरों को पनाह देकर ठंड से बचाने के तुरंत मजबूत इंतजाम करने की आवश्यकता है।  विजेन्द्र  ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री  ने आम चुनावों के लिए विभिन्न राज्यों मे चुनावी तैयारियां करने की बजाय इन बेघरों की हालत की ओर ध्यान दिया होता, तो इनकी अमूल्य जानें बच सकती थीं।

पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सतेन्द्र जैन के साथ सरकार के रैनबसेरों का निरीक्षण किया था। उन्होंने रैनबसेरों की हालत सुधारने पर बल दिया था परंतु सरकार ने कोई सुध नहीं ली बल्कि हालात पहले से भी अधिक बिगड़ गए।

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