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EVM मजबूत, नहीं की जा सकती छेड़छाड़, तीन स्तरीय होती है सुरक्षा

  • Updated on 5/22/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भले ही देश के 22 से अधिक राजनीतिक दलों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हो लेकिन विशेषज्ञों की माने तो ईवीएम पूरी तरह मजबूत व सुरक्षित है। उससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। किसी भी तरीके से मशीन से छेड़छाड़, हेरफेर या हैक नहीं किया जा सकता। क्योंकि इसका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं है। इसमें इंटरनेट, वाई-फाई या ब्लूटूथ संपर्क नहीं है। इसका मतलब है कि आप मशीन में सेंध नहीं लगा सकते। इसमें एक बार काम में आने वाली प्रोग्रामेबल चिप है। यह जानकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी डा. रणबीर सिंह ने दी। 

ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर विपक्ष के आरोपों के बीच दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रणबीर सिंह ने कहा कि मशीनें पूरी तरह से सुरक्षित है और सभी पारर्दिशता तथा प्रशासनिक प्रोटोकॉल्स को पूरा करती है। ईवीएम से किसी भी तरीके से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। 

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बता दें, आम आदमी पार्टी ने सोमवार को निर्वाचन आयोग से दक्षिण दिल्ली में मतगणना केंद्र पर अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराने की सोमवार को अपील करते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों ने 23 मई को चुनाव नतीजों की घोषणा के मद्देनजर ईवीएम से छेड़छाड़ करने की योजना बनाई है। आप के दक्षिण दिल्ली के उम्मीदवार और पार्टी प्रवक्ता राघव चड्ढा ने पत्र लिखकर कहा कि उनके पास यह मानने की मजबूत वजह है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी स्ट्रांग रूम को खोलने और मशीनों में हेरफेर या उन्हें बदलने का प्रयास करेंगे। पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। 

इस बाबत उन्होंने बताया, ये मशीनें इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने उच्च सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बनाई है। अगर कोई प्रोग्राम को बदलने की कोशिश करता है तो मशीन काफी ज्यादा वाइब्रेट करती है और बंद हो जाती है। मशीन के बनने से उसके किसी राज्य में पहुंचने तक इसकी पूरी सुरक्षा की जाती है। राज्य के सुरक्षाकर्मी इसकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। 

डा सिंह ने कहा,ईवीएम को गोदाम में रखने से लेकर उनके मतदान केंद्रों तक पहुंचने तक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। कहा, जब उन्हें गोदाम में रखा जाता है तो यह उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया जाता है। उन्हें सुरक्षित, सीलबंद रखा जाता है और सील पर प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर लिए जाते हैं। 

कौन मशीन कहां, नहीं पता रहता

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डा. रणबीर सिंह ने कहा कि आखिरी क्षण तक वे भी नहीं जानते कि कौन-सी मशीन किस मतदान केंद्र में जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले औचक तरीके से मशीन किसी मतदान केंद्र में भेजी जाती है। दूसरे औचक तरीके से चुनाव पर्यवेक्षक और राजनीतिक दल मौजूद रहते हैं और अगर वे शक जताते हैं तो औचक प्रक्रिया 100 बार तक हो सकती है। ईवीएम में तकनीकी खामी आने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आखिरकार वे मशीनें ही हैं।  

तीन स्तरीय होती है सुरक्षा

दिल्ली की सातों सीटों की मतगणना 23 मई को होने वाली है। कहीं कोई गड़बड़ी न हो और आरोप-प्रत्यारोपों से बचने के लिए सात लोकसभा क्षेत्रों में मतगणना केंद्रों और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। 
निर्वाचन विभाग के अधिकारिक सूत्र ने बताया, 23 मई को मतगणना वाले दिन के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुरूप की गई है। उन्होंने बताया, ईवीएम स्ट्रांगरूम की सुरक्षा तीन स्तरीय होती है। बाहरी, मध्य और भीतरी। भीतरी घेरा सीआरपीएफ, मध्य घेरे में दिल्ली के सशस्त्र बल कर्मी और बाहरी घेरे में जिला पुलिस कर्मी होते हैं। दिल्ली में सात मतगणना स्थल हैं। चांदनी चौक के लिए एसकेवी, भरत नगर, दक्षिण दिल्ली के लिए जीजाबाई महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, अगस्त क्रांति मार्ग, सिरीफोर्ट, पश्चिमी दिल्ली के लिए एकीकृत प्रौद्योगिकी संस्थान, उत्तर पश्चिम के लिए डीटीयू, शाहबाद दौलतपुर, उत्तरपश्चिम दिल्ली के लिए आईटीआई नंद नगरी, नयी दिल्ली के लिए एन पी बंगाली बालिका एसएससी, गोल मार्केट और पूर्वी दिल्ली के लिए राष्ट्रमंडल खेल गांव का बैडमिंटन कोर्ट है। 
उन्होंने बताया, प्रत्येक मतगणना स्थल पर दिल्ली पुलिस के 1000 जवानों व अधिकारियों की तैनाती होगी। एक कंपनी सीआरपीएफ और एक कंपनी दिल्ली की सशस्त्र पुलिस होगी।  

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