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Exclusive interview : शादी को लेकर कुंवारे व्यक्ति की इच्छाओं को दिखाएगी फिल्म ‘छड़ा’- दिलजीत दोसांझ

  • Updated on 6/21/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पंजाबी फिल्म ‘छड़ा’ 21 जून को सिनेमा घरों का शृंगार बनने जा रही है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ, नीरू बाजवा, जगजीत संधू, हरदीप गिल, अनीता देवगन, गुरप्रीत भंगू, प्रिंस कंवलजीत, अनीता मीत, रविन्द्र मंड, मनवीर राय, रुपिन्द्र रूपी, सीमा कौशल तथा बनिन्द्र बनी मुख्य भूमिका में नजर आए। फिल्म को अतुल भल्ला, अमित भल्ला, अनुराग सिंह, अमन गिल, पवन गिल द्वारा प्रोड्यूस किया गया जबकि इसके सह-निर्माता आदित्य शास्त्री हैं। फिल्म की प्रोमोशन जोर-शोर से चल रही है। इसी तहत फिल्म के मुख्य अदाकार दिलजीत दोसांझ तथा निर्देशक जगदीप सिद्धू ने ‘पंजाब केसरी/जग बाणी,नवोदय टाइम्स’ के साथ विशेष बात की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:-

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प्रश्न: फिल्म की कहानी पर थोड़ा प्रकाश डालें?
जगदीप: फिल्म एक कुंवारे व्यक्ति के जीवन के बारे में है। शादी को लेकर उसके मन में क्या इच्छाएं होती हैं यह सब इस फिल्म में दिखाया गया है। कुंवारे व्यक्ति के जितने  रंग हैं वे इस फिल्म में दिखाए गए हैं।

प्रश्न: जैसा कि ट्रेलर में दिखाया गया है, क्या तुम भी जापानी सोच रखते हो?
दिलजीत: जी बिल्कुल। जैसे अभी से सभी लोग कह रहे हैं कि तुम जापानी सोच रखते हो। जापानी सोच एक उत्कृष्ट सोच है। मुझे भी यही लगता है कि कुंवारे शादीशुदा के साथ ताल्लुक रखते हैं। मुश्किल तो शादी की ही होती है। इसी को लेकर फिल्म में हर दूसरा सीन शादी पर केंद्रित है। फिल्म में मैं वैडिंग फोटोग्राफर की भूमिका निभा रहा हूं। नीरू बाजवा वैडिंग प्लानर का रोल निभा रही है।

प्रश्न: कुंवारों पर फिल्म बनाने का आपको आइडिया कहां से आया?
दिलजीत: ‘छड़ा’ एक ऐसा कांसैप्ट है जो हमारी आंखों के सामने दिखता है मगर आज तक इसको कोई देख नहीं सका। मैं एक दिन सुबह उठा तो मैंने सोचा कि इस सब्जैक्ट पर फिल्म बनानी चाहिए। उसी दिन मैंने फिल्म का टाइटल ‘छड़ा’ रजिस्टर्ड करवा दिया। यह टाइटल इससे पहले किसी ने रजिस्टर्ड नहीं करवाया था। इसके उपरांत मैंने जगदीप सिद्धू को बताया और उन्होंने 10-15 दिनों के भीतर ही फिल्म की कहानी तैयार कर दी। 

प्रश्न: कहानी लिखते समय कौन-सी चीजें दिमाग में रखी गईं?
जगदीप: पहली बात दिमाग में यह चल रही थी कि इसको एक गांव वाले लड़के के किरदार पर बनाया जाए। फिर मैंने कुंवारे व्यक्ति को शादी के माहौल में डालने की सोची और दिलजीत के लिए वैङ्क्षडग फोटोग्राफर का चरित्र सिलैक्ट किया जो है तो कुंवारा मगर रहता शादी में ही है। इस तरह कहानी तैयार हुई।

प्रश्न: चढ़ता और वंजली का किरदार बनाने में कितनी मुश्किलें आईं?
जगदीप: दिलजीत के लिए चढ़़ता का किरदार आसानी से बन गया क्योंकि जब मैंने कहानी के बारे में सोचा तो तभी मेरे मन में आ गया। वहीं वंजली के किरदार के बारे में अधिक सोचना पड़ा क्योंकि चढ़ता कुंवारा है तो वंजली कुंवारी। दोनों के विचार को अलग-अलग ढंग से पेश करने में दिक्कत आई।

प्रश्न: जब फिल्म पूरी हुई तो उसके बाद आपकी क्या प्रतिक्रिया थी?
दिलजीत: जितना मैंने सोचा था उससे कहीं ज्यादा फिल्म की कहानी बनी। मैंने तो सोचा था कि फिल्म कॉमेडी आधारित होगी, लोग इसको एंज्वाय करेंगे। वहीं फिल्म बढिय़ा संदेश लेकर भी आई है। फिल्म शुरू से लेकर समाप्ति तक एक लय में चलती है। 

प्रश्न: फिल्म साइन करने के समय कांसैप्ट ज्यादा मायने रखता है या फिर उसकी टीम?
दिलजीत: मेरे लिए दोनों चीजें ही मायने रखती है। कांसैप्ट भी महत्वपूर्ण है वहीं टीम भी। यदि फिल्म की टीम बढिय़ा न हो तो कांसैप्ट कमजोर हो जाता है इसलिए दोनों चीजें जरूरी हैं जो आपस में जुड़ी हैं।

प्रश्न: अनुराग सिंह संग काम करने का आपका सपना पूरा हुआ, इस बारे आपको क्या कहना है?
जगदीप: अनुराग संग काम करने से बड़ा कार्य कोई हो ही नहीं सकता। पंजाबी सिनेमा को प्यार करने वाला प्रत्येक व्यक्ति उनको फॉलो करता है और मैं भी उनमें से एक हूं। ‘सुपर सिंह’ फिल्म के लिए मैंने अनुराग के लिए डायलॉग्स लिखे और आज मैंने उनके द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म की कहानी लिखी। उसी फिल्म को निर्देशित किया, इससे बड़ी बात क्या होगी।

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