Exclusive interview: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा- 2019 में राहुल होंगे PM प्रत्याशी

  • Updated on 8/11/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल।  कांग्रेस की ओर से 2019 में प्रधानमंत्री चेहरा राहुल गांधी होंगे। यह बात  गुरुवार को कांग्रेस के तेज-तर्रार नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नवोदय टाइम्स के साथ विशेष बातचीत में कही। सिंधिया ने देश के सियासी हालात और विदेश नीति पर बोलते हुए चीन और भारत के कड़वे रिश्तों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि इस सरकार की नीति और नीयत दोनों में कोई मेल नहीं है।

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देश के राजनीतिक हालात को आप किस तरह से देखते हैं..?
हम अपने अतीत में जाएं तो इस देश की नींव सांप्रदायिक सद्भाव, उदार विचारधारा, धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों पर बनी है। यह ऐसा देश है, जहां कई तरह की विचारधाराएं, चर्चाएं हमेशा रही हैं। पिछले तीन वर्षों में जो एक वातावरण निर्मित हुआ है, जिसमें बताया जाएगा कि आप क्या करोगे, कैसे सोचोगे, क्या खाओगे, कहां जाओगे तो यह एक तरीके से ऐसा माहौल है जहां व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ही अंकुश लगाया जा रहा है।

आप देख रहे हो, पूरे देश में ऐसा हो रहा है। चाहे मीडिया हो, यूनिवर्सिटी हो या फिर संसद के भीतर, बोलने नहीं दिया जाता है। संसद के बाहर जहां कटुता के आधार पर सत्ता हासिल करने को एक दल पूरा जोर लगा रहा है। यह सब चिंता का विषय है। जो देश की नींव है, उसे कलंकित, अपमानित किया जा रहा है। आप देखिए हरियाणा में वर्णिका कुंडू की घटना हो, चाहे गुजरात में राहुल गांधी के साथ घटी घटना हो, खेद तक नहीं व्यक्त किया गया। यही चर्चा की जाती है कि बुलेट प्रूफ वाहन में क्यों नहीं बैठे। मतलब यह है कि जो पत्थर फेंक रहा है, वह ठीक है। यह निहायत चिंताजनक है। 

अहमद पटेल के जैसी मेहनत लोकसभा चुनाव में क्यों नहीं..?
मैं सहमत नहीं हूं कि मेहनत नहीं हुई। मेहनत जरूर हुई। चाहे 2014 के लोकसभा चुनाव की बात करें। चाहे दिल्ली हो या यूपी चुनाव। चाहे अनेक प्रदेश-राज्यों में जहां चुनाव हुए। यह भी सत्य है कि कुछ जगहों पर हमें असफलता मिली। कोई भी कार्यकर्ता जो इस सत्य से भटके, मैं मानता हूं कि वह एक अच्छी बात नहीं।

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कांग्रेस को वापस ड्राइंग बोर्ड पर जाना होगा। यह मैंने कई व्यक्तियों से बात की। जहां तक गुजरात राज्यसभा चुनाव का मामला है तो यह इतना हाईप्रोफाइल इसलिए हो गया, क्योंकि एक था नारा करो या मरो। राजनीतिक आजादी दिलाने के लिए महात्मा गांधी ने यह नारा दिया था। भाजपा का करो या मरो का नारा एक सीट जीतने का है। चाहे इसके नतीजे कुछ भी हों।

एक-एक कर कांग्रेस के हाथ से राज्य छिटकते जा रहे हैं..?
पहले जमाना  होता था जहां राष्ट्रीय संगठन मजबूत राज्य बनाता था। आज जमाना उसके ठीक विपरीत है कि  राज्य संगठन राष्ट्रीय संगठन को मजबूत बनाता है। हम लोगों को वापस एक-एक राज्य मतलब जमीन से हमारे संगठन को और नेतृत्व को खड़ा करना होगा। उसे ऊर्जा प्रदान करनी होगी और उसे फ्री हैंड देना होगा। ताकि एक-एक राज्य जब बनेगा, एक-एक ईंट जब ठीक तरह से तैयार होगी, तभी मजबूत इमारत तैयार होगी।

कांग्रेस में अच्छे नेता व थिंक टैंक हैं, फिर पार्टी उबर नहीं पा रही?
थिंक टैंक से राजनीति नहीं होती। राजनीति में सफलता या असफलता, यह निर्मित होता है क्रियान्वयन के आधार पर। हम यहां बैठकर आपको बहुत सारे जादू के मंत्र दे दें। ठीक हो या गलत यह विश्लेषण की बात है। लेकिन अगर उन मंत्रों पर क्रियान्वयन न हो तो उस जादू का क्या नतीजा आप पा सकोगे और जहां कहीं क्रियान्वयन हुआ वहां सकारात्मक नतीजे भी मिले।

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आपका इशारा पंजाब की ओर तो नहीं, जहां कैप्टन अमरिंदर को फ्री हैंड दिया गया था..?
मैं यह कतई नहीं मानता कि केवल एक व्यक्ति विशेष को छूट दे दो और वह सफल रहेगा। हां यह मानता हूं, आज समय आ चुका है कि लोकसभा चुनाव हो, विधानसभा हो, जिला पंचायत, पार्षद, या फिर निगम का चुनाव, मतदाता देखना चाहता है कि वह अगर विश्वास दे रहा है तो किस व्यक्ति के हाथ में उसकी बागडोर पांच साल रहने वाली है। यह भी सही है कि भारत में चुनाव व्यक्ति विशेष के इर्द गिर्द आजकल घिर चुका है। लेकिन, वह ऐसी पर्सनालिटी हो, जो सभी को एक ही माले में पिरो कर ले चल सके।

क्या आप मध्य प्रदेश में पार्टी का चेहरा हैं..?
मैं अपने बारे में चर्चा नहीं करता। निर्णय हाईकमान का कि मेरा उपयोग कहां किया जाए। चाहे सांसद, चाहे सचेतक या फिर एक मंत्री के रूप में, जो निर्णय लिया जाए उसका पालन करना मेरा दायित्व। यही मेरे मूल्य और सिद्धांत हैं। यही मेरे पूज्य पिता जी के सिद्धांत थे। 

आप एकजुटता की बात कर रहे हैं, उस पर क्रियान्वयन क्यों नहीं..? 
मैं यह समझता हूं कि आज समय आ चुका है जहां एक-एक राज्य में एक-एक करके कांग्रेस को दोबारा अपने आपको मजबूत करना होगा। वह तभी संभव है, जहां एक-एक राज्य में निर्णय लें। ऐसा निर्णय लें, जहां वह टीम सभी कांग्रेसियों को एक साथ लेकर आगे चले।

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भाजपा ने 3 साल पहले कांग्रेस मुक्त भारत की बात कही थी। उस बयान की क्या प्रासंगिकता है?
किसी प्रजातंत्र में कोई दल व्यक्ति विशेष ऐसा वक्तव्य दे, वह मान्य नहीं। चाहे कांग्रेस की बात करें, भाजपा की या किसी और दल की। हेल्दी डेमोक्रेसी मतलब क्या..? यह नहीं कि वन मैन रूल, वन पार्टी रूल। अगर आपकी आइडियोलॉजी, विचारधारा और सोच विपक्षमुक्त भारत, कांग्रेस मुक्त भारत, किसान मुक्त भारत, दलित मुक्त भारत की है तो इसका परिणाम आने वाले समय में जो निकलेगा इनको ही चौकाएगा।

यह धारणा है कि यूपीए सरकार में पीएम ऑफिस की भूमिका शून्य थी। कितना सच है...?
मैं इसका विरोध करता हूं। कौन कहता है ऐसा? मैं खुद उस सरकार में छह साल तक मंत्री रहा। एक बार भी कांग्रेस हाईकमान की बात छोडि़ए, किसी भी संगठन के किसी भी व्यक्ति के द्वारा एक भी फोन कॉल मुझे कभी नहीं आया। 

नेतृत्व की कमजोरियां क्या पार्टी का नुकसान कर रही हैं?
हर राजनीतिक दल के इतिहास में उतार-चढ़ाव आता है। जिस दल के लोग आज ढिंढोरा पीट रहे हैं, 20-25 साल पहले संसद में वह दो सीटों पर था। यह हम कभी न मानें कि दूसरे राजनीतिक दल के क्षमता के आंकलन में हम उन्हें अंडरएस्टीमेट करें। वर्तमान में कांग्रेस को दोबारा खड़ा करना है। उसमें केंद्र के स्तर पर हम स्ट्रेटजी बना रहे हैं। लेकिन, राज्य के स्तर पर भी हमें बनाना होगा। उसका ब्लूप्रिंट प्रोसेस में है। दो-तीन महीनों में सब कुछ सामने होगा। 

Navodayatimesकांग्रेस का पुनरोत्थान कैसे होगा..?
जितना मुझे ज्ञान है उसके मुताबिक मैं यही कहना चाहूंगा कि पहले आपको चिह्नित करना होगा कि किन राज्यों पर फोकस करना है। जाहिर है कि कि 2019 से जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव है, वही प्राथमिकता में होंगे। ऐसे राज्यों में एक ऐसा क्षमतावान नेतृत्व देना होगा, जिसकी पैठ जनता में हो, जो सभी को साथ लेकर चल सके। ऐसी नीति बनानी होगी।

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चीन से युद्ध जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। आप किस तरह देख रहे हैं?
सवाल यह है कि ऐसी स्थिति निर्मित क्यों हुई। चुनाव के पहले तो आप कहते थे कि हम चीन को लाल आंख दिखाएंगे। आपकी विदेश नीति है कहां..? चीन के राष्ट्रपति यहां आते हैं, आप साबरमती में झूले पर झुला देते हैं और ढोकले खिला देते हैं। आज हर मुद्दे पर, हर प्लेटफार्म पर चीन विरोध कर रहा है। चाहे मसूद अजहर की बात हो, चाहे न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप, बैलेंस ऑफ ट्रेड की बात हो। भाजपा कहती थी न कि बैलेंस ऑफ ट्रेड ठीक करेंगे।

 विश्व स्तर पर संबंध बेहतर करने की बात कहते थे। किसके साथ है। रूस से इतने घनिष्ठ संबंध थे, आज क्या स्थिति है। चीन-पाकिस्तान की बात छोडि़ए, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, मालदीव जैसे पड़ोसी देशों के साथ भी हमारे वर्षों पुराने रिश्ते बोरी में बांध कर डाल दिए गए हैं और ऐसा मायाजाल पिरो रहे हो, जैसे पहले भारत कभी भी इतना मजबूत नहीं रहा।

क्रिकेट से आप जुड़े रहे हैं। इसकी इतनी खराब हालत क्यों है..?
आज जनता चाहती है पारदर्शिता। जवाबदेही चाहती है। छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो हिचकिचाहट क्यों। सब कुछ सामने क्यों नहीं रख देते। टीम सेलेक्शन जरूर पब्लिक डोमेन में नहीं होना चाहिए। लेकिन, वित्तीय मामलों को पब्लिक डोमेन में होना चाहिए। क्रिकेट में वही लोग होने चाहिए, जो क्रिकेट को कुछ देना चाहते हैं।

नर्मदा यात्रा राजनीतिक नहीं
दिग्विजय सिंह नर्मदा यात्रा निकालने जा रहे हैं। इसका कोई सियासी मायने तो नहीं?
मैं यह नहीं मानता कि उनकी कोई राजनीतिक यात्रा है। उन्होंने खुद भी कहा है कि उनकी परिक्रमा करने की अभिलाषा रही है। उन्होंने जो वक्तव्य दिया है, वही मैंने भी पढ़ा है। अगर कोई व्यक्ति अपनी आशा को पूरा करना चाहता है तो दिक्कत ही क्या है ?

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मजबूत होगी कांग्रेस
2019 में कांग्रेस का पीएम कंडीडेट कौन...
राहुल गांधी। ऐसा मैं मानता हूं। उनके नेतृत्व में कांगे्रस पार्टी और मजबूत होगी।

नीतीश ने की है बड़ी गलती
इतना कुछ गलत हो रहा है तो नीतीश कुमार भाजपा के साथ क्यों गए..?
कई कारण हैं। वह केवल नीतीश जी और भाजपा के बीच में एक नया गठजोड़़, दोस्ती की बात नहीं। अनेक मुद्दे जुड़े हुए हैं। मैं मानता हूं कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। इससे ज्यादा मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। वे मुझसे उम्र और अनुभव में काफी बड़़े हैं।

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