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exclusive interview of rajeev bindal

Exclusive interview: दिल्ली के चुनाव नतीजे मॉडल सैट नहीं करते- राजीव बिंदल

  • Updated on 2/20/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हिमाचल प्रदेश (Himachal pradesh) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष राजीव बिंदल (Rajeev Bindal) ने कहा है कि दिल्ली के चुनाव नतीजे कोई सैट मॉडल नहीं हैं और इनका हिमाचल (Himachal) की राजनीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पंजाब केसरी के संवाददाता नरेश कुमार के साथ विशेष बातचीत के दौरान बिंदल ने हिमाचल में पार्टी के संगठन, आगामी विधानसभा चुनाव ( Assembly election) की तैयारी के साथ-साथ भाजपा नेताओं के आपसी तालमेल पर भी विस्तार से बातचीत की। पेश है बिंदल के साथ हुई पूरी बातचीत -

दिल्ली के चुनाव नतीजों को आप किस तरह से देखते हैं?
यह विकास कार्यों की जीत नहीं है और न ही यह राजनीति में कोई सैट माडल है। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने मुफ्तखोरी की राजनीति की है और देश की जनता का पैसा लुटाकर अपना राजनीतिक हित साधा है। यह निर्माण की राजनीति नहीं है। आज भी दिल्ली में सड़कें टूटी हैं और लोगों को पानी नहीं मिल रहा। हालांकि लोकतंत्र में जनता ही मालिक होती है और लिहाजा इस जीत के लिए उन्हें हाॢदक अभिनंदन लेकिन मुफ्त की चीजें बांट कर कोई भी जीत सकता है। दिल्ली की जीत लम्बी अवधि का माडल नहीं है। 

हिमाचल में हर 5 साल बाद सरकार बदल जाती है। ऐसे में आपके लिए अगला चुनाव कितनी बड़ी चुनौती है?
हम यह राजनीतिक मिथक तोड़ेंगे क्योंकि पार्टी हिमाचल में बूथ स्तर तक मजबूत है और मुख्यमंत्री जयराम रमेश से लेकर पार्टी का हर कार्यकत्र्ता अपने बूथ को लेकर सजग है। हमारा तो नारा ही ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ है। हमें गर्व है कि हमारे प्रदेश का ही एक कार्यकत्र्ता आज पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और हिमाचल में भाजपा के कार्यकत्र्ता पूरी मेहनत और लग्र के साथ काम करते हैं और इसी मेहनत के दम पर हम अगला विधानसभा चुनाव भी जीतेंगे। 

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क्या सिर्फ संगठन से काम चल जाएगा, जनता तो काम मांगती है?
हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने अपने विजन डॉक्यूमैंट में जो वायदे किए थे वे सारे वायदे पूरे किए जा रहे हैं। आप चाहे शिमला में फोरलेन सड़क की बात करें या मंडी अथवा मनाली फोरलेन की बात करें, राज्य में सड़कों का जाल बिछ रहा है और लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए काम किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘जल जीवन’ मिशन में सबसे ज्यादा फायदा हिमाचल को होने वाला है। किसान कल्याण के लिए भी योजनाएं चल रही हैं और खेतों में किसानों की फसलों के संरक्षण के लिए भी कार्यक्रम चल रहे हैं और फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए भी सरकार काम कर रही है। 

इतना विकास हो रहा है तो रेल के लम्बित प्रोजैक्ट क्यों लटक रहे हैं?
हिमाचल एक छोटा-सा राज्य है और इसके चलते राज्य के पास भूमि अधिग्रहण के लिए पैसे की कमी है जिस कारण इस दिशा में काम उतनी तेजी से नहीं हो रहा जितनी तेजी से होना चाहिए। हालांकि इन प्रोजैक्ट्स को लेकर भी प्रोग्रैस जारी है और मुख्यमंत्री जयराम रमेश और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर भी अपने-अपने तरीके से इस मामले में केंद्र सरकार के साथ बातचीत करके इन प्रोजैक्ट्स को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। 

हिमाचल भाजपा में आपसी खींचतान से आप कैसे निपटेंगे?
हिमाचल इकलौता राज्य है जहां पर मुख्यमंत्री जयराम रमेश, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, शांता कुमार पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, सतिन्द्र सत्ती और मेरी टीम आपस में लगातार सम्पर्क में रह कर काम कर रही है और हमारी निरंतर राज्य के मुद्दों को लेकर चर्चा चलती रहती है और हम पूरे तालमेल के साथ पार्टी के हर वायदे को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं

प्रदेश भाजपा के नए संगठन में ऊपरी हिमाचल व राज्य के निचले हिस्से में तालमेल कैसे स्थापित करेंगे?
अब ऊपर और नीचे के हिमाचल का मतलब नहीं है। मुख्यमंत्री ने खुद कहा है कि भाजपा न तो टोपी के रंग में विश्वास रखती है और न ही बदले की राजनीति में। हमारे लिए हमारा प्यारा और छोटा-सा हिमाचल और यह पूरा हिमाचल ही हमारे लिए अहम है। हमारा कार्यकत्र्ता बहुत मेहनती है और कार्यकत्र्ताओं की मेहनत के दम पर ही लोकसभा चुनाव के दौरान हमने 68 विधानसभा सीटों पर बढ़त बनाकर 4 सीटें जीती हैं। 

आर्थिक मोर्चे पर सरकार के प्रदर्शन से जनता निराश है, उसे कैसे संतुष्ट करेंगे?
आर्थिक हालत अच्छी है और ङ्क्षचता वाली कोई बात नहीं है। इस सरकार के कार्यकाल में महंगाई नहीं बढ़ी। हालांकि प्याज के दाम में थोड़ी तेजी आई थी लेकिन उस महंगाई को ही मुद्रास्फीति के पूरे आंकड़े में जोड़ कर दिखा दिया गया। जबकि असल में रिफाइंड ऑयल, दालों, सब्जियों व जरूरत के अन्य सामान के दाम केंद्र की पूर्व मनमोहन सिंह सरकार की तुलना में काफी कम है। हां, सोने और चांदी की महंगाई जरूर बढ़ी है। ये चीजें अमीर आदमी खरीदते हैं। अगर नहीं भी खरीदेंगे तो कोई बात नहीं।  गाडिय़ों के रेट बढ़े हैं उससे हमें ङ्क्षचता नहीं है, साइकिल के रेट नहीं बढऩे चाहिएं। 

मुख्यमंत्री कैबिनेट का विस्तार करने जा रहे हैं, क्या आप कोई सुझाव भेज रहे हैं?
यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और मुझे लगता है कि वह यह फैसला लेने में खुद सक्षम हैं और आने वाले दिनों में काबिल चेहरे मंत्रिमंडल में देखने को मिल सकते हैं। 

सी.ए.ए. को लेकर हिमाचल में इतनी बड़ी मुहिम चलाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सी.ए.ए. देश से जुड़ा मसला है। यदि देश का अस्तित्व है तो हिमाचल का अस्तित्व रहेगा और राज्य की जनता को देश से जुड़े प्रमुख मुद्दे के बारे में जागरूक करना एक राजनीतिक दल होने के नाते हमारा कत्र्तव्य है और हमने अपना वह कर्तव्य पूरा किया है और राज्य के लोगों को सी.ए.ए. के बारे में पूरी तरह जागरूक करके उन्हें इसकी अहमियत बताई गई है।

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