Thursday, Feb 22, 2018

Exclusive interview: सपनों की कहानी है रांची डायरीज

  • Updated on 10/6/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। छोटे शहर के युवाओं के भी सपने होते हैं। उन्हें सपने देखने का भी हक है और उन्हें पूरा करने का भी। इन्हीं सपनों की बदौलत क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया। फिल्मों में भी कई सुपरस्टार छोटे शहरों से आए और संघर्ष करके अपने काम का लोहा मनवाया। इन्हीं सपनों को समेटती एक जीवंत कहानी है, ‘रांची डायरीज’। यह फिल्म 13 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म से पहली बार निर्माता के रूप में डेब्यू कर रहे हैं अभिनेता अनुपम खेर। फिल्म को सत्विक मोहंती ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में अनुपम खेर के अलावा जिम्मी शेरगिल, सौंदर्या शर्मा, हिमांशु कोहली और ताहा शाह भी मुख्य भूमिका में हैं। प्रमोशन के सिलसिले में अनुपम खेर, हिमांशु कोहली, सौंदर्या शर्मा और सत्विक मोहंती के साथ दिल्ली स्थित नवोदय टाइम्स के दफ्तर पहुंचे और फिल्म के साथ ही कई दूसरे मुद्दों पर खुलकर बातचीत की।

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आखिर क्या है ये रांची डायरीज? 
‘रांची डायरीज’ तीन चार लोगों की डायरी है। जब सत्विक मेरे पास ये स्क्रिप्ट लेकर आए थे। तब उन्होंने बताया कि वे इस पर 2 साल काम कर चुके हैं। मुझे स्क्रिप्ट बहुत पसंद आई और सबके किरदार भी अच्छे लगे। मैंने उनसे पूछा कि प्रोड्यूसर कौन हैं, तो वो बोले कि प्रोड्यूसर तो अभी नहीं है। फिर मैंने और सत्विक ने मिलकर रांची में कुल 40 दिनों तक अलग-अलग लोकेशन पर शूटिंग की। यह फिल्म छोटे शहर की कहानी है। अक्सर छोटे शहर के लोग ही बड़े सपने देखते हैं। इसलिए सपने देखना बंद मत कीजिए। 

क्या छोटे और बड़े शहरों के लोगों की आकांक्षाएं समान हो गई हैं?
अब पहले जैसा समय नहीं है। आज के समय में छोटे शहरों और बड़े शहरों के लोगों की आकांक्षाएं बिल्कुल एक जैसी हो गई हैं। आज बड़े से बड़े अभिनेता की भी फिल्म फ्लॉप हो सकती है और कोई छोटी सी फिल्म सुपरहिट हो सकती है। अब फिल्मों के हिट होने की परिभाषा बदल चुकी है और अब ये सिर्फ फिल्म के बिजनेस पर निर्भर करता है।

हाल ही में आप धोनी के घर गए तो क्या वो फिल्म प्रमोशन था या फैमिली इनविटेशन? 
दरअसल, मैं अपनी फिल्म ‘रांची डायरीज’ के प्रमोशन के लिए रांची गया था तो धोनी की पत्नी साक्षी ने मुझे घर पर बुलाया था। मुझे उनके पिता से मिलकर बहुत खुशी हुई। 

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पहले के दर्शकों और आज के दर्शको में क्या अंतर है? 
आजकल के दर्शक काफी होशियार और पढ़े-लिखे हैं। उन्हें पता है कि उनका टेस्ट क्या है और क्या उन्हें देखना चाहिए। सबसे खास बात ये कि आजकल लोगों के पास मनोरंजन के हजारों साधन है जबकि पहले ऐसा नहीं था। 

Navodayatimesखुद को भाग्यशाली मानता हूं: हिमांशु

फिल्म यारियां के साथ बॉलीवुड में कदम रखने वाले हिमांशु, अनुपम खेर के साथ काम के अनुभव के बारे में पूछे जाने पर कहा कि मेरे अब तक किए कामों में सबसे अच्छा है। बॉलीवुड में कम उम्र का एक्टर होने के कारण मुझे यूथ बेस्ड फिल्में मुझे मिल रही हैं। इस फिल्म में मैं रांची का लड़का बना हूं। जिसका नाम है मोनू। वह अपनी मेहनत के बूते आसमां की ऊंचाई छूना चाहता है। मोनू एक आशिक है और जुगाड़ू मैकेनिक (इंजीनियर) भी। मैं भाग्यशाली हूं कि मैंने उनके साथ काम किया और जितना सीख सकता था सीखा। उनके साथ काम करते हुए मुझे पता चला कि शूटिंग शुरू करने से पहले मुझे अपनी भूमिका की तैयारी किस तरह करनी है। सबसे बड़ी बात ये है कि मुझे इस फिल्म के लिए अपने अभिनय कौशल में और निखार लाना पड़ा। 

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बहुत कुछ सीखा: सौंदर्या 
फिल्म की अभिनेत्री सौंदर्या ने कहा कि यह उनकी पहली फिल्म है। फिल्म की कहानी सकारात्मक रहने और सपने को पूरा करने की जद्दोजहद पर टिकी है, जिसके लिए वो कुछ भी कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि अनुपम खेर, जिमी शेरगिल जैसे कलाकारों के साथ काम करके काफी कुछ सीखा। इसके अलावा सौंदर्या ये बताना भी नहीं भूली कि शूटिंग के लिए वो रांची में काफी दिनों तक रही और उन्हें वहां के लोग काफी मिलनसार और स्टाइलिश लगे।

डर नहीं सहयोग मिला: सात्विक
फिल्म  के डायरेक्टर सात्विक मोहंती ने बताया कि  फिल्म की कहानी युवाओं के आसपास रहती है। इसमें उनके सपने व स्थानीय अपराधियों से होनेवाले संघर्ष आदि को दिखाया गया है। कलाकारों ने इस फिल्म में अपनी अदा से जान डालने की कोशिश की है। उन्हें रांची शहर और यहां के लोग बहुत अच्छे लगे। 27 दिनों तक शूटिंग के दौरान कभी कोई दिक्कत नहीं आई। भुवनेश्वर के रहने वाले सात्विक ने बताया कि पहले उन्हें लोगों ने झारखंड में शूटिंग करने को लेकर नक्सलवाद के नाम पर डरा दिया था, जबकि उन्हें हर जगह लोगों का सहयोग मिला। 

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