Sunday, Dec 05, 2021
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Exclusive interview: पिता- पुत्री के अनमोल रिश्ते को दिखाती है 'भूमि', नम हो जाएंगी आंखें...

  • Updated on 9/20/2017
  • Author : National Desk

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल। जेल से आने के बाद अभिनेता संजय दत्त फिल्म ‘भूमि’ से बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। उनकी यह फिल्म पिता-बेटी के रिश्तों पर बनी है। फिल्म में वह ऐसे पिता का किरदार निभा रहे हैं, जिसकी बेटी के साथ कुछ ऐसा होता है कि उसकी जिंदगी तबाह हो जाती है। उमंग कुमार निर्देशित यह फिल्म इसी शुक्रवार यानी 22 सितंबर को रिलीज हो रही है।

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सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रही इस फिल्म में संजू बाबा के अलावा अदिति राव हैदरी, शेखर सुमन, सिद्धांत गुप्ता और शरद केलकर भी हैं। ‘भूमि’ प्रतिशोध पर आधारित ऐसी भावनात्मक फिल्म है, जिसके कुछ दृश्य को देखकर आपकी आंखें जरूर नम हो जाएंगी।

फिल्म प्रमोशन के लिए संजू बाबा, अदिति, निर्देशक उमंग कुमार, निर्माता भूषण कुमार के साथ दिल्ली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश :

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फिल्म बाप-बेटी के रिश्ते पर आधारित है, आपने इसके लिए किस तरह की तैयारियां की?

संजय दत्त : फिल्म में खुद को अरुण के किरदार में ढालने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। यह फिल्म आपके दिल को छू जाएगी। ‘भूमि’ प्यारी-सी बच्ची की कहानी है। 

आप इससे सहमत हैं कि आज भी समाज में लड़कियों को उनका हक नहीं मिल पाता?

हां, बिल्कुल। अपने देश की सबसे बड़ी समस्या है कि किसी को न्याय मिलने में बहुत समय लग जाता है। लड़कियों को उनका हक मिलना चाहिए, उन्हें समय पर न्याय मिलना चाहिए। हमारे कानून में कुछ बदलाव बहुत जरूरी है, तभी लोगों को जल्द न्याय मिल पाएगा।  

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आपके मुताबिक कानून में कितना बदलाव होना चाहिए?

मैं यह नहीं कह सकता कि क्या बदलाव होने चाहिए। यह तो हमारे बड़े-बड़े नेता ही जानें कि उन्हें क्या कदम उठाने चाहिए। बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ पर फोकस करना चाहिए। बेटियों की पढ़ाई पर खास ध्यान देना चाहिए। 

आपकी बायोपिक आ रही है, इसके जरिए आप दर्शकों को क्या दिखाना चाहते हैं?

मैं कुछ नहीं दिखाना चाहता...मेरे पास है ही क्या दिखाने को! बस, एक बार राजू (राजकुमार हिरानी) ने मुझसे कहा कि वह मेरे ऊपर बायोपिक बनाना चाहते हैं, तो मैंने कहा क्यों भई, क्या खास होगा इसमें तो राजू ने कहा कि आपकी बायोपिक से युवाओं को कुछ सीखने को मिलेगा। मैं बस इतना चाहता हूं कि मेरी बायोपिक देखकर युवा यह जरूर सीखें कि जो गलतियां मैंने अपनी जिंदगी में की वह कोई न करे। 

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आप युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?

मैं यही कहना चाहूंगा कि अगर आपसे जिंदगी में कोई गलती हुई है, तो उससे सीख लो। फिर कभी उसे न दोहराएं और जिंदगी में आगे बढ़ें। जिंदगी हमेशा खूबसूरत नहीं रहती, उतार-चढ़ाव तो होते ही हैं। बस, जिंदगी में आगे बढ़ जाना चाहिए। पुरानी बातों को लेकर रोते नहीं रहना चाहिए।  

आज देश में सबसे बड़ी समस्या क्या है?

समस्याएं तो बहुत हैं लेकिन सबसे पहले हमें बच्चों को सुरक्षा देनी चाहिए, यह कैसे होगा, यह तो हमारे नेता बता सकते हैं। आज के समय में सुरक्षा नाम की कोई चीज ही नहीं है। आज कोई सुरक्षित नहीं है। मुझे तो यकीन नहीं होता रेयॉन इंटरनेशनल स्कूल में ऐसी घटना घट गई। रेयान स्कूल कोई छोटा नाम नहीं है, बहुत बड़ा स्कूल है, वहां भी इस तरह की घटना हो सकती है। इसके बाद से तो मुझे अपने बच्चों को लेकर भी डर लगने लगा है।

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पहले के समय में और आज के समय में आपको सबसे बड़ा बदलाव क्या नजर आता है?

देखिए, आज से 20 साल पहले इस तरह की घटनाएं बिल्कुल नहीं होती थी। अब तो देश में बहुत ज्यादा क्रूरता बढ़ गई है। पहले अगर कोई किसी लड़की को छेड़ भी देता था तो 10 लोग उसे मारने दौड़ते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। 

 क्या है  फिल्म ‘भूमि’? 

अदिति राव हैदरी : यह फिल्म पिता-बेटी के अनमोल रिश्ते को दर्शाती है। इसमें दिखाया गया है कि एक पिता अकेला अपनी लाडली बेटी को किस तरह पालता है। छोटी-छोटी शरारतों से भरपूर लम्हों को खूबसूरती से दिखाया गया है। उनकी जिंदगी में कुछ ऐसा होता है कि सब कुछ बदल जाता है। यह फिल्म इतनी वास्तविक-सी है कि शूटिंग के वक्त मुझे टॉर्चर-सा महसूस होता था। फिल्म के भारी-भरकम डॉयलॉग और सीन से पहले संजू सर मुझे बहुत हंसाते थे, जिससे मैं थोड़ा हल्का महसूस करूं।  

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आप हैदराबाद के शाही परिवार से हैं, इंडस्ट्री में कितना संघर्ष करना पड़ा?

मुझे बचपन से एक्टिंग का शौक था। शाही परिवार की वजह से इस पेशे को अपनाना थोड़ा मुश्किल था। अपने जुनून के चलते मैंने इस क्षेत्र को चुना। परिवार ने खुले आसमान में मुझे उडऩे को पंख दिए। उन्होंने मुझे पूरी आजादी दी और मैंने उन्हें भरोसा दिया कि आजादी का गलत इस्तेमाल नहीं होगा। ऐसा सभी परिवार को करना चाहिए। बेटियों पर भरोसा कर पूरी आजादी और हौसला देना चाहिए। Navodayatimes

फिल्म इंडस्ट्री में भाई-भतीजावाद पर अक्सर बहस होती है, आपका नजरिया क्या है?

भाई-भतीजावाद फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, हर इंडस्ट्री में है। किसी प्रोड्यूसर का बेटा या भांजा एक्टिंग करना चाहता है, तो वह उसकी मदद नहीं करेगा तो कौन करेगा, क्या गलत है इसमें? अगर उसमें प्रतिभा होगी तो वह खुद को इंडस्ट्री में कायम रख पाएगा, नहीं तो एक-दो फिल्में करके गायब हो जाएगा। 

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बॉलीवुड में नायिका प्रधान फिल्मों के बारे में आपका क्या ख्याल है? 

मेरे ख्याल से तो अब बॉलीवुड से ‘नायिका प्रधान’ शब्द ही हटा दिया जाना चाहिए, तभी  हमारी पीढ़ी में बदलाव आएगा, क्योंकि फिल्में लोगों के जीवन को बहुत हद तक प्रभावित करती हैं। आज महिला और पुरुष समान रूप से काम कर रहे हैं। बॉलीवुड भी इससे अछूता नहीं है। फिल्म सिर्फ महिलाओं पर फोकस हो तो भी सुपरहिट हो सकती है। अब तो दोनों के बीच तुलना ही नहीं करनी चाहिए। 

आपका ड्रीम रोल क्या है, क्या अभी वह आना बाकी है?

मेरी हमेशा से ख्वाहिश थी मणिरत्नम और संजय लीला भंसाली के साथ काम करूं। दोनों ख्वाहिशें पूरी हो चुकी हैं। मैंने 6 साल में बहुत कम फिल्में की लेकिन मैं अपनी सभी फिल्मों से संतुष्ट हूं। मेरा सपना अनुराग बसु, सुजीत सर (पिंक फेम) के साथ काम करने का भी है। मैं योद्धा और राजकुमारी की भूमिका भी निभाना चाहती हूं। संजय सर की ‘पद्मावती’ में काम कर कुछ हद तक ये ख्वाहिश भी पूरी हो गई है।

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