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Exclusive interview : दिल्ली को सपनों की दिल्ली बनाएंगे पीएम मोदी- विजेंद्र गुप्ता

  • Updated on 6/6/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली विधानसभा के भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता (Vijender Gupta) ने पंजाब केसरीनवोदय टाइम्स से बातचीत के दौरान कहा की पीएम मोदी दिल्ली (Delhi) को सपनों की दिल्ली बनाएंगे ।पेश है  विजेंद्र गुप्ता के साथ पूरी बातचीत:

दिल्ली की सातों संसदीय सीटों पर हुई जीत को किस तरह से देख रहे हैं?
जीत तो वाकई बड़ी है और इसके साथ ही जिम्मेदारी भी बढ़ी है। जनता ने बड़ा विश्वास करके इतना बड़ा बहुमत दिया है। और जिस पर विश्वास होता है उसकी जिम्मेदारी भी अधिक हो जाती है। 

क्या सोचा था कभी कि 300 सदस्यों वाली पार्टी के नेता होंगे, कितना गर्व होता है?
जब वाजपेयी सरकार एक वोट (vote) से गिरी थी तब भाजपामय माहौल था, सभी सोचते थे कि पार्टी को बहुमत मिलेगा। लेकिन 98 के बाद जब 99 में चुनाव (आतामूगदल) हुए और मात्र पांच सीटों का इजाफा हुआ और पार्टी 186 सीटों तक पहुंची तो सभी ने कहा कि यह भाजपा की अधिकतम सीटे हैं, लोगों ने कहा कि बीजेपी (BJP) 200 का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकती। इस बार तीन सौ पार पहुंचे और घटक दलों को भी जोड़ लें तो आंकड़ा 350 के पार चला जाता है। मुझे लगता है कि संभावनाएं अभी और हंै और भाजपा इससे और अधिक सीटें हासिल कर सकती है, क्योंकि कई राज्यों में पार्टी को मजबूत करना है। पूर्वाेत्तर में पार्टी ने बेहतर किया है। 

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50 फीसदी के लक्ष्य से ज्यादा मत प्रतिशत भाजपा को दिल्ली में मिला, क्या कारण रहे?
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) ने 50 प्रतिशत मत पाने का लक्ष्य रखा था। इसके पहले भाजपा के नेताओं ने कभी इस तरह से सोचकर चुनाव नहीं लड़ा था। राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशन में हमने भी काम किया और दिल्ली में 57 प्रतिशत वोट भाजपा को मिले। दिल्ली ने सातों सीटें तो जीतीं ही, देश भर में पांच लाख से अधिक वोटों के अंतर जीती गई टॉप सात सीटों में दो दिल्ली से ही हैं। 

जीत के लिए क्या रणनीति अपनाई?
सबसे पहले तो इतनी बड़ी जीत के लिए विरोधियों को ही धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने हमारे नेता के बारे में अपशब्द कहने में समय लगाया। जबकि देश के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में सक्षम नेतृत्व रहा। भाजपा सरकार ने अच्छा कार्य किया है। भाजपा ने हमेशा लोगों के सामने अपनी बात सच्चाई के साथ रखी। नतीजा आपके सामने है।

केजरीवाल कहते हैं कि केंद्र दिल्ली के विकास कार्य में हमेशा बाधा डालता है?
इसका जवाब भी दिल्ली की जनता ने केजरीवाल को दे दिया है। केजरीवाल सरकार केवल गवर्मेंट ऑफ एक्सक्यूजेज है, बहाना करती है, काम नहीं करती है। झूठा वातावरण बनाने की कोशिश वह हमेशा करते हैं। लोगों को काम करने वाली सरकार चाहिए। 

मेट्रो, डीटीसी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की घोषणा क्या केजरीवाल का मास्टर स्ट्रोक है, इसे किस तरह से देखते हैं?
मुफ्त उपहार के जरिये केजरीवाल (खारीगैोत) जनता को प्रभावित करना चाहते हैं, लेकिन इसको लागू करना  आसान नहीं है। केजरीवाल शहर की लाइफलाइन के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। मेट्रो (शाूीद) को लेकर किसी पार्टी ने अब तक राजनीति नहीं की थी। लेकिन, अब हो रही है।

लेकिन, इससे तो महिलाओं को सुरक्षा मिलेगी?
महिला सुरक्षा तो केवल बहाना है, साढ़े चार वर्षों तक महिला सुरक्षा पर क्या कदम उठाए। बड़े वायदों जो किए थे उन पर केजरीवाल ने क्या किया। महिला सुरक्षा के नाम पर निजी लाभ लेना ही उद्देश्य है।

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यह भी तो कहा जाता है कि देर आए दुरुस्त आए?
इस योजना में सुरक्षा मोटिव नहीं है। बसें ही नहीं हैं, पहले तो बसें होनी चाहिए। लास्ट माइल कनेक्टीविटी पर केजरीवाल सरकार ने क्या काम किया है। डार्क प्वाइंट खत्म नहीं किए, मेट्रो का विस्तार नहीं होने दिया। हर कदम पर काम रोके हैं। दिल्ली में आप सरकार से पहले रही सरकारों के एजेंडे में जनता का विकास सबसे ऊपर होता था। तब सरकार जनता के लिए होती थी, राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं होती थी। 

भाजपा ने लोकसभा चुनाव राष्ट्रवाद पर लड़ा, दिल्ली विधानसभा किस मुद्दे पर लड़ेंगे?
दिल्ली चुनाव में केजरीवाल सरकार ने साढ़े चार साल में क्या किया, इसे जनता को बताया जाएगा। आप सरकार बहानेबाजी की सरकार है। इन्होंने बहाना बनाया कि केंद्र काम नहीं करने दे रहा है। जबकि केंद्र की आयुष्मान योजना, जिससे गरीबों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकता है, उसे केजरीवाल सरकार दिल्ली में लागू नहीं होने दे रही है।  हमारा कहना है मतदाता एक मौका देकर देखें, देश में भी मोदी और दिल्ली में भी मोदी यानी भाजपा को जनता लाए। 1 और 1 मिलकर हम 11 की तरह काम करेंगे। पीएम मोदी दिल्ली को सपनों की दिल्ली बनाना चाहते हैं। लोग न्यूयार्क और पेरिस का नाम नहीं लें बल्कि दुनिया में दिल्ली का नाम लिया जाए। 

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विधानसभा चुनावों में इस बार क्या वायदे रहेंगे?
विकास की गति इस समय 20 पर है, इसको बढ़ाकर 150 पर ले जाएंगे। अनधिकृत बस्तियों को नियमित करेंगे। इसके लिए सत्ता के आने का इंतजार भी नहीं करेंगे, जहां झुग्गी है, वहीं मकान देने का कार्य कर देंगे। सेटलमेंट कॉलोनियों के लोगों को मालिकाना हक देंगे। केजरीवाल ने तो लोगों के राशन कार्ड तक छीन लिए।  पूरे शासन काल में आप सरकार ने एक भी नया राशन कार्ड नहीं बनाया। 

2015 के चुनावों में आप ने नारा दिया था मोदी फॉर पीएम और केजरीवाल फॉर सीएम।  इस बार इसको किस तरह से काउंटर करेंगे?
नारा तो दिया था, लेकिन केजरीवाल ने पहले ही दिन से मोदी को रोकने की कोशिश की, केजरीवाल का दोहरा चरित्र तो इसी बात से सामने आ गया था। जहां तक बात काउंटर करने की है तो यह पार्टी का फैसला है।

2014 में भी भाजपा दिल्ली की सातों संसदीय सीटें जीती थी और 2015 में विधानसभा चुनाव में हार गई, इस बार भी सातों सीटें भाजपा ने जीती हैं और फिर विधानसभा चुनाव हैं, क्या लगता है?
2014 और 2019 के बीच बड़ा अंतर आ गया है। उस समय मतदाताओं ने केजरीवाल का शासन नहीं देखा था और ना ही मोदी का शासन ही ठीक से देखा था। अब तो जनता ने मोदी का शासन और केजरीवाल दोनों का शासन देख रखा है। पांच वर्षों के बाद लोगों ने पहले से भी अधिक वोट मोदी के नाम पर भाजपा को दिये हैं। केंद्र सरकार के कार्य को लोगों ने सराहा है। इस दौरान भ्रष्टाचार पर भाजपा की जीरो टोलरेंस की नीति रही है। जबकि आप सरकार के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। लोगों ने आम आदमी पार्टी की सरकार भ्रष्टाचार मिटाने के लिए बनाई थी, लेकिन आज केजरीवाल सरकार में भ्रष्टाचार हो रहे हैं। कांग्रेस को गाली देकर सत्ता में आए थे, लेकिन चुनावों में उसके सामने गठबंधन के लिए गिड़गिड़ाते रहे। जनता सब देख रही है। विधानसभा चुनाव जिसमें आप को प्रचंड बहुमत मिला, उसके बाद जो भी चुनाव हुए उसमें केजरीवाल को हार मिली। चाहे हाल के लोकसभा चुनाव हों या उसके पहले हुए निगम चुनाव रहे हों, उनका मत प्रतिशत 54 गिरकर 18 पर आ गया है। 

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भाजपा शासित निगम में तो भ्रष्टाचार चरम पर है, क्या कहेंगे?
भाजपा ने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए बढ़चढ़कर कार्य किया है। हम उसमें काफी सफल रहे हैं। इसी कारण चुनाव में भ्रष्टाचार मुद्दा ही नहीं बना।

मुफ्त सेवाएं और यात्रा फ्री की घोषणा के बाद आप ने 18 फीसदी मत से आगे बढऩे की कोशिश शुरु कर दी है?
लोगों ने देख लिया है। घोषणा के बाद बिजली, पानी के भारी बिल आ रहे हैं। लोगों के घरों में गंदा पानी आ रहा है। भाजपा का कहना है कि मुफ्त सफर तो बाद में पहले बसें लाओ, पानी तो दो, अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितिकरण के मामले में काम करो। लेकिन, यह सरकार तो अच्छे कामों में बाधा पहुंचा रही है, झुग्गी वालों को मकान मिले, केन्द्र की इस योजना में अड़चन डाल रही है। इस योजना से जुड़ी फाइल को आप सरकार दबाकर बैठी है। 

मेरी आपराधिक छवि बनाना चाहते हैं केजरीवाल 

इफ्तार में साथ दिखे और अगले ही दिन मानहानि का मुकदमा, क्या हुआ?
जिसकी बात पर ही विश्वास नहीं उससे क्या दोस्ती। इफ्तार एक धार्मिक कार्यक्रम था। उसी नाते मैं वहां गया था। जहां तक मानहानि केस की बात है तो उसका कारण है कि एक मुख्यमंत्री खुद अपने ट्वीट में कहे कि मैं उनकी हत्या की साजिश कर रहा हूं तो यह गंभीर आरोप हैं। पहले तो मैंने आरोप वाला ट्वीट हटाने के लिए कहा, फिर नोटिस भेजकर चेताया भी। लेकिन जब वह मेरी हर बात को अनसुना कर गए तो फिर यह मुकदमा किया।

दरअसल पहले ही दिन से केजरीवाल विधानसभा में मुझे प्रताडि़त करते रहे हैं। सदन में मुझे बोलने नहीं दिया गया। जितनी बार मार्शल का प्रयोग करके मुझे सदन से बाहर कराया गया है और मुझे जनहित के मुद्दे उठाने से रोका गया है। जितनी बार मुझे मार्शल से बाहकर कराया गया शायद आने वाले दिनों में यह गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज हो जाए। प्रताडऩा का ही हिस्सा है कि उन्होंने मुझ पर अपनी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा दिया। केजरीवाल मेरी आपराधिक छवि बनाना चाहते हैं। इसके लिए वह किसी भी तरह का हथकंडा अपनाने से परहेज नहीं कर रहे। जबकि सदन में प्रताडऩा के साथ मुझ पर बाहर हमला भी कराया गया है, मुझे धमकी भरी कॉल भी आती हैं। मैंने पुलिस रिपोर्ट भी की है। मुझे झूठे मुकदमे में जेल भेजने की साजिश भी की गई। मैंने उन्हें कहा था कि इस तरह के झूठे आरोप न लगाएं, इसे वापस ले लें। लेकिन वह मेरी साफ-सुथरी छवि को बिगाडऩा चाहते हैं, यह ठीक नहीं है। वास्तव में केजरीवाल सरकार पूरी तरह से घमंडी सरकार है। जनता ने विश्वास करके प्रचंड बहुमत दिया लेकिन, इतनी अधिक सीटें मिलने से उसे घमंड हो गया। 

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दिल्ली को दो हिस्सों में बांटना ठीक नहीं
केजरीवाल ने पूर्ण राज्य के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था, आपका स्टैंड क्या है?
पूर्ण राज्य के मामले में केजरीवाल के मॉडल से हम सहमत नहीं हैं। क्योंकि मैं खुद दिल्ली से हूं, दिल्ली देश की राजधानी है। केजरीवाल दिल्ली को दो हिस्सों में बांटना चाहते हैं। एक लुटियन दिल्ली और शेष दूसरी दिल्ली बन जाए। हम यह नहीं चाहते हैं।

भाजपा की सरकार बनती है तो पूर्ण राज्य पर काम किया जाएगा या नहीं?
भाजपा ने इस मुद्दे को छोड़ा नहीं है। वैसे भी यह मामला दिल्ली के हाथ में नहीं है। केंद्र के पास ही इसका अधिकार है। संसद में इससे संबंधित प्रस्ताव रखे जाने से लेकर संविधान में संशोधन आदि प्रक्रिया के तहत ही यह संभव हो सकता है। यह संवेदनशील विषय है। लेकिन, इस मुद्दे के तहत दिल्ली के लिए जो श्रेष्ठ मॉडल होगा उसे ही अपनाया जाएगा। हां, वोट पाने के लिए इस मुद्दे को उछाला जाए, यह भाजपा नहीं होने देगी। 

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