Monday, Jan 21, 2019

Interview 2: संघ हिंदुओं का प्रतिनिधि संगठन नहीं

  • Updated on 11/20/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है, लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह खुद को इस चुनावी शोरगुल से दूर किए हुए हैं। राज्य के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह फ्रंट में कहीं भी नहीं दिख रहे हैं। पार्टी ने उन्हें समन्वय समिति का चेयरमैन बना रखा है और टिकट बंटवारे में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। बावजूद इसके वे प्रचार गतिविधियों से अलग-थलग हैं।

10 साल अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के साथ दिग्विजय सिंह ने शिवराज सिंह चौहान के 13 साल के कार्यकाल के साथ मध्य प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव पर नवोदय टाइम्स/पंजाब केसरी के अकु  श्रीवास्तव और शेषमणि शुक्ल के साथ विस्तार से चर्चा की। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश...

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कमलनाथ के नेतृत्व को किस रूप में देखते हैं?
कमलनाथ अनुभवी व्यक्ति हैं। मध्य प्रदेश से पिछले 40 साल से जुड़े हैं। डायनमिक हैं। बतौर सांसद छिंदवाड़ा का विकास उन्होंने जिस तरह से किया है, आज देश का कोई भी सांसद ऐसा नहीं कर पाया है। शिवराज के विकास के मॉडल पर कमलनाथ का विकास मॉडल भारी है। 

लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं से आपके डिफरेंस की बातें आती रहती हैं?
यह गलत प्रचार है। ऐसा कहते हैं  कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मेरे डिफरेंस हैं। कमलनाथ के साथ हमारी करीबी और प्रगाढ़ मित्रता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया तो पुत्रवत हैं। उनके पिता माधवराव सिंधिया को मैं ही 1979-80 में कांग्रेस में लेकर आया था। मेरा किसी से कोई डिफरेंस नहीं है और न ही इसकी कोई संभावना है। सभी एक-दूसरे के बहुत करीब हैं। मुझे समन्वय समिति का चेयरमैन बनाया गया तो मैंने व्यक्तिगत रूप से दो लाख कार्यकर्ताओं से वन-टू-वन मुलाकात की। बाकी नेताओं से  बातचीत की और जो ग्राउंड रिपोर्ट दी, उसी पर 90 फीसदी टिकट आमसहमति से बांटे गए। कोई डिफरेंस होता तो ऐसा क्यों होता? 

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भाजपा के 15, अपने 10 साल के कार्यकाल को  कैसे देखते हैं?
मैं तो शिवराज सिंह चौहान को चुनौती दे चुका हूं कि मेरे कार्यकाल के 10 साल के आंकड़े निकलवा लें और अपनी सरकार के 15 साल के, तुलना कर लें। आंकड़ों के साथ मुझसे चर्चा करें। क्यों नहीं करते? देखिए, आरएसएस और भाजपा ने गलत प्रचार करके  मेरे कार्यकाल के बारे में एक भ्रांति (परसेप्शन) बनाई।

दुखद बात यह है कि इस भ्रांति को कांग्रेस के भी कुछ नेता सही मान बैठे। लेकिन आज तक भाजपा-आरएसएस ने यह नहीं बता सकी कि मेरी सरकार की कौन सी नीति गलत थी। बजट के किस मद में हमने कटौती की या कम बजट दिया। दिग्विजय पर आज तक भ्रष्टाचार का कोई आरोप लगा क्या?

तो मिस कॉन्सेप्ट तोडऩे में 15 साल क्यों लगे?
मैं तो आंकड़ों के साथ सारी बातें कहता रहा, मीडिया में किसी ने छापा ही नहीं। सभी जानते हैं कि मीडिया में आजकल किसकी पकड़ है। बिजली-पानी, सड़क को लेकर मेरे कार्यकाल की आलोचना की जाती है। लेकिन कौन सी सड़क? स्टेट हाईवे या नेशनल हाईवे? लोगों ने सारी सड़के हमारे खाते में डाल दी। 

नहीं चाहता था, जयवर्धन राजनीति में आएं
मैं नहीं चाहता था कि मेरा बेटा राजनीति में आए। मैंने मना भी किया था। वे जब कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ कर आए और उनकी मंशा जानी तभी मैंने अपना इरादा जता दिया था। मैंने यह भी कहा था कि बाद में मत कहना कि कहां फंसा दिया। उन्होंने राजनीति ज्वाइन की और जब विधानसभा चुनाव लड़े तो पहली बार मैंने उनका प्रचार भी किया, लेकिन इस बार उनका प्रचार नहीं कर रहा। मैंने उनसे कह भी दिया है कि केवल वोट डालने जाऊंगा।

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संघ पर प्रतिबंध लगाने की बात, गलत प्रचार
सरकारी परिसरों में आरएसएस की शाखा और इन शाखाओं में सरकारी कर्मियों के शामिल होने पर प्रतिबंध जब से मध्य प्रदेश बना, तब से है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों में भी यह प्रतिबंध बना रहा। कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कहीं भी यह नहीं कहा कि वह आरएसएस पर प्रतिबंध लगाएगी। केवल सरकारी परिसरों में शाखा और सरकारी कर्मियों की भागीदारी प्रतिबंधित करने की  बात कही है। भाजपा और संघ गलत तरीके से इसे प्रचारित कर रहे हंै।

संघ हिंदुओं का प्रतिनिधि संगठन नहीं
आरएसएस कोई हिंदुओं का सर्वमान्य प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन नहीं। मैं एक सनातनी हिंदू हूं। मैं संघ को नहीं स्वीकार करता। संघ की विचारधारा लोगों को बांटने की है। वह केवल मंदिर, हिंदू-मुस्लिम की बात करता है। बाकी किसी बात से उसका कोई मतलब नहीं। 

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