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Exclusive Interview: फ्री बिजली-पानी का लॉलीपॉप नहीं, विकास चाहिए- प्रवेश वर्मा

  • Updated on 2/4/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) में भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा (Pravesh Verma) का नाम खासा चर्चा में है। विवादित बयान के बाद चुनाव आयोग (Election) ने उनके प्रचार पर 96 घंटे की रोक लगा दी थी। सोमवार की शाम पांच बजे पाबंदी खत्म हुई और वह प्रचार में फिर से सक्रिय हो गए। दिल्ली में भाजपा की स्थिति, शाहीन बाग (Shaheen Bagh), विवादित बयान आदि को लेकर नवोदय टाइम्स/ पंजाब केसरी ने वर्मा से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश: 

आम आदमी पार्टी की सरकार पर भाजपा काम नहीं करने के आरोप लगा रही है। आखिर पांच साल तक आरोप क्यों नहीं लगाए गए?
दिल्ली ने आम आदमी पार्टी (AAP) को 70 में से 67 सीटें दी थीं। हमारे पास कुछ बोलने को बचा ही नहीं था। वह यह कहकर सत्ता में आए थे कि मैं शीला दीक्षित को जेल भेज दूंगा। मैं सारी कंपनियों का ऑडिट करूंगा। मैं जनलोकपाल लेकर आऊंगा। जिसके अंदर मुख्यमंत्री (CM) भी होगा। न तो जनलोकपाल आया, न किसी बिजली कंपनी का ऑडिट हुआ, ना वह शीला दीक्षित के खिलाफ कोई चार्जशीट लेकर आए। दिल्ली (Delhi) की जनता को यह अहसास भी होना चाहिए, बड़े वादे करके वह सरकार में आए थे और हमने उनको पूरा मौका भी दिया।

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साढ़े चार साल तक वह कूद-फांद करते रहे। एलजी काम नहीं करने दे रहे, मुझे प्रधानमंत्री काम नहीं करने दे रहे। आखिरी के छह महीनों में उनको सबने काम करने दे दिया। बड़ी बात यह है जब आपको काम ही नहीं करने दिया तो नारा कैसे दे दिया कि अच्छे बीते पांच साल...। अब नारा बदलकर कर दिया अच्छे होंगे पांच साल...। इसका मतलब है कि पांच साल अच्छे नहीं बीते अब होने की बात कह रहे हैं। 

आप नेताओं के बच्चे सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ते 
अगर आप सरकार ने शिक्षा इतनी अच्छी कर दी है तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) , उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आप सरकार के मंत्रियों के बच्चे दिल्ली सरकार के स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ते। जबकि 1994 में जब मेरे पिता साहिब सिंह वर्मा दिल्ली में शिक्षा मंत्री बने थे। उस समय मेरा भाई सिद्धार्थ डीपीएस आरकेपुरम में पढ़ता था। पिता जी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक की और सबसे पूछा कि किसी का बच्चा सरकारी स्कूल पढ़ता है तो कोई नहीं बोला। इसके बाद पिता जी घर आए और उन्होंने मेरे छोटे भाई का एडमिशन डीपीएस आरके पुरम से कटवाकर सिविल लाइंस (Civil Lines) के शंकराचार्य नं-4 के स्कूल में करवा दिया। हमने वो उदाहरण स्थापित किया था। 

आपने दिल्ली सरकार के स्कूलों के खस्ताहाल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि खतरनाक इमारतों में चल रहे हैं स्कूल। आखिर चार साल दस महीने तक इस मामले मेें क्यों नहीं बोला गया?
जब हम मटियाला के सर्वोदय विद्यालय गए तो वहां एस्टेट मैनेजर दुबे ने बताया कि बिल्डिंग खतरनाक है और इसके लिए पीडब्ल्यूडी से बात भी की गई है। लेकिन, कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से कुछ कमरों में कक्षाएं चल रही हैं। हमने बच्चों से बात की तो एक बच्चे ने कहा कि ये बिलडिंग हिलती है। एक बच्चे ने कहा कि टीचर बोलते हैं कि जब जयहिंद बोला करो तो सिर्फ सैल्यूट मारा करो, पैरों को नीचे मत मारा करो, सभी बच्चे अगर पैर नीचे मारेंगे तो बिलडिंग गिर जाएगी। एक बच्चे ने कहा कि हमारी डांस की क्लास भी खत्म कर दी गई, कहा गया कि डांस करते वक्त उछलोगे तो बिलडिंग नीचे गिर जाएगी।

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बच्चों ने दिखाया कि बारिश में छत से पानी गिरता है। बच्चों ने कहा कि खिड़की में शीशा नहीं है। कहीं चूहा मरा पड़ा है। बदबू आती है। खिड़की में शीशा नहीं है इसलिए ठंड भी लगती है। 1000 बच्चे उस बिल्डिंग में बैठकर पढ़ रहे थे। अगर वह बिलडिंग गिर गई तो केजरीवाल क्या कहेंगे कि मैं इसकी जांच करवाऊंगा। क्या ये एक मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी नहीं है। क्या इसके ऊपर नेग्लीगेंस का केस नहीं बनना चाहिए। क्या ये उनकी नैतिक जिम्मेदारी नहीं है। ये आंखों देखा हाल है। मैं अकेला तो गया नहीं, मैंने तो केजरीवाल को न्यौता दिया कि आप चलिए मनीष सिसोदिया को बुलाया, दोनों नहीं आए। फिर मैंने मीडिया को दिखाया। तो ये सच्चाई है दिल्ली की शिक्षा की। 

विकास के मुद्दे पर है चुनाव सरकार हमारी बनेगी
चुनाव विकास के मुद्दे पर ही होगा और निश्चित ही हमारी सरकार बनेगी। हम सब लोगों से मिल रहे हैं। दिल्ली में किसी भी कॉलोनी में कोई भी सीवर लाइन, पानी की लाइन, साफ पानी आदि की ठोस व्यवस्था नहीं हुई है। जो सब बातें हम सोचते रहते हैं, बोलते रहते हैं, ये सब बातें हमने बड़े-बड़े विज्ञापनों में देखी हैं। अगर आप दिल्ली की किसी कॉलोनी में जाएंगे तो आपकी आंखें खुल जाएंगी। किसी गांव में जाने पर लगता है सालों से यहां कुछ नहीं हुआ। मैं बार-बार यह कह रहा हूं कि दिल्ली के चुनाव को किसी धर्म के आधार पर नहीं लडऩा चाहिए। दिल्ली के चुनाव को केवल विकास के नाम पर लडऩा चाहिए।

मैं दिल्ली की जनता से भी कह रहा हूं कि अगर आपने अपनी आंखों से कोई भी नया स्कूल देखा हो, एक भी नया अस्पताल देखा हो, एक भी नया कॉलेज देखा हो, एक भी नया स्टेडियम देखा हो, एक भी नया विश्वविद्यालय देखा हो, एक भी नया फ्लाईओवर देखा हो, जिसका शिलान्यास केजरीवाल ने किया हो तो उनको वोट दीजिए। मैं खुल्लमखुल्ला कह रहा हूं। अगर मैं ये बात कह रहा हूं तो मैं केवल विकास की बात कर रहा हूं। अगर आपने यह सारी चीजें नहीं देखी तो आप इस बार भारतीय जनता पार्टी को वोट दीजिए।

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पांच साल तक मुफ्त बिजली-पानी को लेकर आदेश नहीं
मैंने जलबोर्ड कंपनी में फोन किया, पूछा कि क्या कोई ऐसा ऑर्डर है जिसमें मुख्यमंत्री कह रहे हों कि 5 साल के लिए फ्री पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि कोई ऑर्डर नहीं है। मैंने कहा कि फ्री पानी योजना का नाम बताओ, कोई नाम ही नहीं है। क्योंकि कोई स्कीम नहीं है क्योंकि कोई बजट पास नहीं हुआ। मैंने बीएसईएस अधिकारी से पूछा कि कोई लेटर आया है कि 5 साल तक बिजली फ्री दी जाएगी। बोला कि नहीं। मैंने डीटीसी में पूछा कि क्या कोई लेटर आया है कि 5 साल महिलाओं को बसों में फ्री बिठाना है, बोला कि नहीं आया। मैं हर जगह पूछा कि क्या मुख्यमंत्री पानी फ्री योजना, मुख्यमंत्री बिजली फ्री योजना, मुख्यमंत्री महिला बस यात्रा फ्री योजना जैसी कोई स्कीम आई है।

उन्होंने कहा कि नहीं आई है। तीनों के पास ये लेटर आया है कि 31 मार्च तक ये सुविधा देनी है। वो लोगों को पहली बार बेवकूफ नहीं बना रहे वो चाहे जितनी मर्जी कसम खा लें। गुरु गोविंद सिंह ने कहा था कि अगर मुगल मुस्लिम कसम खाकर कुछ बोलें तो भी उनकी बात पर कभी विश्वास मत करना। यही बात अरविंद केजरीवाल पर लागू होती है। चाहे जितनी बार कसम खाकर केजरीवाल कोई बात कहें, उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

क्या दिल्ली का चुनाव फ्री बिजली, फ्री पानी और फ्री बस यात्रा पर होने जा रहा है?
पानी फ्री, बिजली फ्री, बस फ्री ये विकास नहीं है। ये दिल्ली के गरीबों को एक सहायता मिल रही है तीन-चार महीनों के लिए, इसे कोई विकास नहीं मानता। विकास कहलाता अगर साबरमती नदी पर बनाया गया रिवर फ्रंट वो यमुना नदी पर बना देते तो वो विकास होता। जैसे देश में 25 एम्स हॉस्पिटल बने अगर दिल्ली में दो भी एम्स बना देते तो विकास कहलाता। फ्री में कोई चीज देना ये विकास नहीं है। ये दिल्ली के लोगों के मुंह में लॉलीपॉप देने जैसा है। लोग उसे चूस रहे हैं, तीन-चार महीने में लॉलीपॉप खत्म हो जाएगा।  

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भाजपा की सरकार आने पर क्या लॉलीपॉप छीन लेंगे? 
हमारे पिता जी 1996 से 1998 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे। दिल्ली में जितनी भी झुग्गी-झोपड़ी थी, उन्होंने सबको बोला था कि आप केवल 5 रुपए देना और पूरा महीना बिजली इस्तेमाल करना। तो एक गरीब को लगता था कि मैं 5 रुपए दे रहा हूं तो उसके बदले में मुझे पूरे महीने बिजली-पानी मिल रहा है। हमारी सरकार बनती है तो हम दिल्ली के सारे जरूरतमंदों, गरीबों को जिनको जरूरत है, फ्री की बिजली भी देंगे और पानी भी देंगे। बस की यात्रा भी देंगे। मगर महीने का 1 रुपया लेंगे, फ्री नहीं देंगे। हम नहीं चाहते कि किसी भी इंसान का स्वाभिमान खत्म हो जाए। फ्री का शब्द जब देश से हट जाएगा तो हमारा देश आगे बढ़ेगा। 

जीएसटी से बजट बढ़ा और क्रेडिट केजरीवाल ने लिया
केजरीवाल कहते हैं कि शीला की सरकार में जो दिल्ली का बजट था वो 35 हजार करोड़ था। मैंने उस बजट को 60 हजार करोड़ रुपए कर दिया और केवल दिल्ली की सरकार है जो प्रॉफिट में चल रही है बाकी कोई सरकार प्रॉफिट में नहीं चल रही। मोदी सरकार भी लॉस में चल रही है। 2017 में जीएसटी आया। जीएसटी की वजह से पूरा पैसा आ रहा है। केवल दिल्ली का बजट नहीं बढ़ा हर राज्य का बजट बढ़ा है। 2016 में दिल्ली का बजट था 35 हजार करोड़, 2017 में जीएसटी आया। 2018 में दिल्ली का बजट हुआ 50 हजार करोड़ रुपए और 2019 में दिल्ली का बजट हुआ 60 हजार करोड़ रुपए। अब वो बोलते हैं कि केवल मेरी सरकार प्रॉफिट में चल रही है बाकी सारे देश की सरकारें लॉस में चल रही हैं। ये सच है कि केवल उन्हीं की सरकार प्रॉफिट में चल रही है। वो कैसे होता है।

अगर भारत के पास 10 लाख करोड़ रुपया टैक्स में आता है और वो 12 लाख करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट देश में स्टार्ट करते हैं। तो 2 लाख करोड़ रुपए उन्होंने एडवांस में लगाना शुरू किया। दिल्ली में 60 हजार करोड़ का टैक्स आता है। सैलरी देने के बाद में एक भी इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रोजेक्ट उन्होंने स्टार्ट नहीं किया। स्कूल, कॉलेज व अस्पताल कुछ नहीं बनाया। सारा पैसा उनके पास में बचा पड़ा हुआ है। इसलिए वो प्रॉफिट में चल रहे हैं। तो सरकार अगर लॉस में चले तो अच्छा है। सरकार प्रॉफिट में नहीं चलनी चाहिए। दिल्ली का पैसा उनके पास में बचा नहीं रहना चाहिए। 

चुनाव केजरीवाल बनाम किससे हो रहा है?
हमारी पार्टी में इतने मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, इतने केंद्रीय मंत्री, इतने सांसद हैं। इतने विधायक हैं, इतने कार्यकर्ता हैं कि हमारी पार्टी को थोड़ी सी दुविधा होती है कि इन सबमें से अच्छा कौन है। तो किसी एक को चुनने में दिक्कत होती है। जब हमारी सरकार बन जाएगी। पार्लियामेंट्री बोर्ड बैठेगा, सारे विधायक तय करेंगे किसको मुख्यमंत्री बनना चाहिए। वो मुख्यमंत्री बन जाएगा।  

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आप सेहत का काफी ख्याल रखते हैं, दिल्ली में लोग मोटापे से ग्रस्त हैं, उनको कुछ टिप्स देना चाहेंगे क्या?
सबसे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री को सलाह देना चाहता हूं कि उन्होंने अपना वजन बहुत बढ़ा लिया है। जब वो 5 साल पहले चुनाव लड़े थे तो दुबले-पतले थे, अन्ना आंदोलन में तो बहुत ज्यादा कमजोर हो गए थे। उतना नहीं करना चाहिए। लेकिन अभी उनका पेट इतना बड़ा दिखाई देता है, गाल इतने मोटे-मोटे दिखाई देते हैं। अभी वो फिट नहीं दिखाई दे रहे हैं। उनको अपना वजन कम करना चाहिए। अच्छा खाएं, कम खाएं और थोड़ा योग किया करें थोड़ा ध्यान लगाया करें। पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री को खांसी होती थी आज पूरी दिल्ली को खांसी होती है। अगर आज उनका वजन बढ़ गया है तो लोग भी अपना वजन बढ़ा रहे हैं। दिल्ली का मुख्यमंत्री एक उदाहरण होता है। आदर्श होता है तो पहले वो लोगों को दिखाएं। हमारे प्रधानमंत्री (Prime Minister) रोज सुबह योग करते हैं ध्यान लगाते हैं। और वो सारे देशवासियों को बताते हैं कि योग करिए। योग दिवस पूरी दुनिया को भारत ने दिया है। 

मैं मुख्यमंत्री होता तो शाहीन बाग जरूर जाता 
आखिर ऐसी क्या जरूरत आ गई थी कि आपने शाहीन बाग को लेकर इतना बड़ा विवादित बयान दे दिया?
जब दिल्ली के मुख्यमंत्री एक साल पहले ये प्रस्ताव लेकर आते हैं और उसको पास किया जाता है कि दिल्ली की जितनी भी मस्जिद हैं उनके इमामों को 18 हजार रुपए की सैलरी दी जाएगी और उनके सहायक को 16 हजार रुपए की सैलरी दी जाएगी। मगर किसी मंदिर के पुजारी को नहीं दी जाएगी। कोई गुरुद्वारे के गं्रथी को नहीं दी जाएगी। केवल एक ही धर्म के दो-दो लोगों को सैलरी दी जाएगी। दिल्ली की जनता के टैक्स का पैसा मस्जिद के इमामों में बांटा जाएगा। उनके ऊपर लुटाया जाएगा। तब कोई सवाल नहीं पूछा जाता कि गुरुद्वारे के ग्रंथी और मंदिर के पुजारी को सैलरी क्यों नहीं दे रहे। क्या वो वोट बैंक की पॉलिटिक्स नहीं है।

जो कश्मीर में हुआ वैसा ही कुछ यहां
शाहीन बाग में अगर केवल सीएए का प्रोटेस्ट चल रहा होता तो कोई नहीं बोलता। वहां पर ये बोला जा रहा है कि पाकिस्तान जिंदाबाद। आसाम को भारत से अलग कर दिया जाए। कश्मीर को भारत से अलग कर दिया जाए। कहा जा रहा है कि हमें जेहाद चाहिए। हमें जिन्ना वाली आजादी चाहिए। वहां बोला जा रहा है कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को मार देंगे। उसके बाद दिल्ली का मुख्यमंत्री-उप मुख्यमंत्री बोले कि मैं उनके साथ खड़ा हूं। इससे ज्यादा शर्म की बात क्या हो सकती है। कश्मीर के लोगों को जेहाद चाहिए था और जेहाद के नाम पर नारे लगते हैं शाहीन बाग में। अगर यहां पर भी नारे लगेंगे कि हमें जेहाद चाहिए और 5 लाख आदमी 26 जनवरी को यहां पर इकट्ठा हो जाता है तो क्या डर नहीं लगेगा कि अगर ये आग फैल गई तो क्या होगा?  

दिल्ली चुनावः PM मोदी ने कहा- जामिया, शाहीन बाग का प्रदर्शन संयोग नहीं, एक प्रयोग

आपका बयान ठीक था तो चुनाव आयोग ने प्रतिबंध क्यों लगाया? 
किसी भी शिकायत पर चुनाव आयोग संज्ञान लेता है और अपने हिसाब से फैसला लेता है। जो भी निर्देश मुझे दिए गए उसका मैंने पालन किया। मैं न कभी स्टार था। न मैं आज हूं, न मैं कल भी स्टार बनने वाला हूं। मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं और आखिरी दम तक पार्टी का कार्यकर्ता ही रहूंगा। 

शाहीन बाग जैसी स्थिति को खत्म करने के लिए आखिर क्या किया जा सकता है? वहां पर एनआरसी को लेकर विरोध हो रहा है?
अभी तो केवल सीएए आया है। अगर उन्हें कोई विरोध करना है तो सीएए पर ही करना चाहिए। अगर भविष्य में कभी एनआरसी आता है तो वह एनआरसी के ऊपर विरोध करें। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पार्टी यही तो कर रही हैं कि शाहीन बाग के लोगों को आगे का डर दिखा रही हैं। जब कोई गांव बसा ही नहीं है तो वहां कुछ होने वाला है इस तरह की बात करने का क्या अर्थ है। 

शाहीन बाग विरोध नहीं साजिश है
एक तरफ भाजपा कहती है कि सीएए का विरोध बहुत कम लोग कर रहे हैं, लेकिन एक तरफ आप कहते हैं कि शाहीन बाग में पांच लाख लोग जुट गए। इसका मतलब विरोध बड़े स्तर पर हो रहा है?
शाहीन बाग में विरोध नहीं हो रहा है ये साजिश है। ये कोई विरोध नहीं है। सीएए का प्रोटेस्ट देश के कोने-कोने में हुआ। प्रोटेस्ट एक-दो दिन हुए शांत हो गए। शाहीन बाग जहां पर आम आदमी पार्टी का विधायक जाकर बोलता है ये आपको करना चाहिए। आपको देश से निकाल दिया जाएगा। जहां पर कांग्रेस के नेता जाकर बोलते हैं कि बसों में आग पुलिस वाले लगा रहे हैं। अगर कोई दो पार्टी वहां जा-जाकर भाषण दे रही हैं तो ये कोई षड्यंत्र ही है, कोई विरोध नहीं है। उनको वहां पर दिल्ली सरकार द्वारा फंड किया जा रहा है।

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प्रदर्शनकारियों को वहां पर पैसे दिए जा रहे हैं। वहां पर सामान पहुंचाया जा रहा है। 80-80 साल की वहां पर महिलाएं, माताएं बैठी हुई हैं, दिल्ली के मुख्यमंत्री को शर्म नहीं आती? केजरीवाल की मां समान 80 साल की माताएं वहां बैठी हैं, 1 घंटे का प्रचार छोड़कर क्या केजरीवाल वहां जा नहीं सकते। केजरीवाल को उन लोगों ने भी वोट करके मुख्यमंत्री बनाया था। मैं मुख्यमंत्री होता तो वहां पर जाता। वहां जाकर बात करता। दिल्ली के मुख्यमंत्री चाहें तो आज शाहीन बाग प्रोटेस्ट खत्म हो जाए। अगर वहां जाकर वो एक घंटा बात कर लें तो। वो सारे लोग अपने आप ही उठकर चले जाएंगे। 

शाहीन बाग का धरना इतने दिनों से चल रहा है, आप कभी क्यों नहीं गए वहां पर समझाने के लिए?
अगर मैं मुख्यमंत्री होता तो वहां पर जरूर जाता। मैंने, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने पार्लियामेंट में सीएए कानून पर बोला, रामलीला मैदान में बोला कि भारतीयों की नागरिकता पर कोई सवाल नहीं उठता। सीएए (CAA) नागरिकता देने वाला कानून है इससे किसी की नागरिकता नहीं जाएगी। जबकि दिल्ली के मुख्यमंत्री कहते हैं कि इससे नागरिकता ले ली जाएगी। देश से निकाल दिया जाएगा। डिटेंशन कैंप में भेज दिया जाएगा। जो आदमी उनको भड़का रहा है उसे ही शाहीन बाग जाकर ये कहना चाहिए कि नागरिकता नहीं ली जाएगी। हम तो पहले से कह रहे हैं नागरिकता नहीं जाएगी। एक बात और अगर मेरे जाने से धरना देने वाले मेरी बात समझ जाएं तो मैं शाहीन बाग जाने को तैयार हूं। सोते हुए को तो जगाया जा सकता है, लेकिन अगर कोई जानबूझ कर सो रहा हो तो उसे नहीं जगाया जा सकता। 

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