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Exclusive Interview : नई राह बना रही है ‘आर्टिकल 15’

  • Updated on 6/25/2019
  • Author : chandan jaiswal

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ‘विक्की डोनर’ (Vicky Donor), ‘बधाई हो’ (Badhaai Ho), ‘अंधाधुन’ (Andhadhun) जैसी सुपरहिट फिल्मों में अलग तरह के किरदार निभाकर मशहूर हुए आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) अब एक बार फिर फिल्म ‘आर्टिकल 15’ (Article 15) के साथ नया धमाका करने जा रहे हैं। ‘आर्टिकल 15’ एक ऐसी फिल्म है, जो प्रत्येक व्यक्ति द्वारा समाज में बदलाव लाने की मांग करती है और सभी से इसकी हार्ड-हिटिंग लाइन, ‘अब फर्क लाएंगे’ के साथ एक्शन लेने के लिए कहती है।

यह फिल्म लंदन इंडियन फिल्म फैस्टीवल (London Indian Film Festival) के 10वें संस्करण में वल्र्ड प्रीमियर (World Premiere) के लिए भी तैयार है। लंदन इंडियन फिल्म फैस्टीवल दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा फिल्मी त्यौहार माना जाता है और यह इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा ओपनिंग नाइट फिल्म होगी। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में काफी संवेदनशील मुद्दे पर बनी इस फिल्म में ईशा तलवार (Isha Talwar), एम नसार (M Nassar), मनोज पाहवा (Manoj Pahwa), सयानी गुप्ता (Sayani Gupta), कुमुद मिश्रा (Kumud Mishra) और मोहम्मद जीशान अयूब (Mohammed Zeeshan Ayyub) भी नजर आएंगे। 27 जून को रिलीज हो रही इस फिल्म की प्रोमोशन (Promotion) के लिए दिल्ली (New Delhi) पहुंचे आयुष्मान ने पंजाब केसरी/ नवोदय टाइम्स/ जगबाणी/ हिंद समाचार से  खास बातचीत की...

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इस फिल्म का हिस्सा बनना बेहद गर्व की बात 
अनुभव (Anubhav Sinha) सर की फिल्म ‘मुल्क’ (Mulk) देखकर मैं उनका बहुत बड़ा फैन बन गया था। एक मुलाकात में उन्होंने मुझे कहा कि वह कोई हार्ट हिटिंग फिल्म करना चाहते हैं। उन्होंने दो-तीन सब्जैक्ट सुनाए। मैं ‘आर्टिकल 15’ को लेकर बहुत एक्साइटेड हुआ। इसकी वजह ये थी कि जब मैं चंडीगढ़  (Chandigarh) में स्ट्रीट प्ले करता था, उस समय जाति भेदभाव के बारे में जानने और पढऩे को उत्सुक था। अनुभव ने इस विषय पर बेहतरीन तरीके से स्क्रिप्ट (Script) सुनाई तो मुझे पसंद आ गई। इस फिल्म का हिस्सा बनकर मुझे बेहद गर्व महसूस हो रहा है। 

रियल कॉप से इंस्पायर है कैरेक्टर 
कॉप रोल के लिए मैंने किसी तरह की तैयारी एक्टर (Actor) को देखकर नहीं की, बल्कि रियल लाइफ कॉप को देखकर की है। इसकी वजह है कि फिल्म में यह कैरेक्टर बिल्कुल रियल लाइफ कॉप की तरह ही दिखाया जाना था। इसके साथ ही हमारे कॉप का सुर अलग है। मैं इसमें आई.पी.एस. ऑफिसर का रोल प्ले कर रहा हूं। इस कैरेक्टर का अपना रुतबा है, बहुत पढ़ा-लिखा और जागरूक है। वह बाहर से आया है और उसकी पोस्टिंग ऐसी जगह पर होती है, जहां जातीय भेदभाव बेहद ज्यादा है। ऐसे में यहां वह अपने तरीके से बदलाव लाने की कोशिश करता है, इसको लेकर यह फिल्म है। 

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नहीं खत्म हो रहा जातीय भेदभाव
अभी तक हिंदी के मैनस्ट्रीम सिनेमा में इतने बेबाक तरीके से ऐसा कुछ नहीं कहा गया। ‘आर्टिकल 15’ के जरिए पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि कास्ट का नाम ले रहे हैं और खुलेआम बात कर रहे हैं। मैनस्ट्रीम या कमर्शियल सिनेमा में लोग इस विषय पर बात करने से हिचकिचाते रहे हैं लेकिन ‘आर्टिकल 15’ हटकर है और नई राह बना रही है। हमारे यूथ खासतौर पर ऊपरी तबका इस जातीय भेदभाव से रूबरू नहीं है। उनको लगता है कि हम तो भेदभाव करते ही नहीं है। सब सामान्य है लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। खासतौर पर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में। अभी हाल ही में मुंबई में डॉक्टर पायल के सुसाइड (Suicide) का जो केस हुआ है, वह इस बात की पुष्टि करता है कि शहरी इलाकों में भी जातीय भेदभाव खत्म नहीं हुआ है।

‘आर्टिकल 15’ ने बदली मेरी सोच
इस फिल्म को करने के बाद मेरी सोच और बदली है। प्रीवेज क्लास होने के नाते आपको इसके बारे में बहुत कुछ नहीं पता होता। आप उस नजरिए से सोच ही नहीं सकते। आपकी संवेदना तब जगती है, जब आप उनके बारे में जानते हैं या उनके नजरिए से सोचते हैं।

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अब लोग चाहते हैं बदलाव
मेरे कैरेक्टर और फिल्म में निश्चित तौर पर विविधता आई है। मैं अब ज्यादा थिंकर बन गया हूं और ‘विक्की डोनर’ के बाद ऐसा हुआ है। मेरे फिल्म के कैरेक्टर ऐसे हैं कि वे मुझे हर फिल्म के साथ कुछ ना कुछ सिखा कर जाते हैं। अगर फिल्म नहीं चलती तो और सिखा कर जाते हैं। आप सीख सकते हैं कि क्या नहीं हुआ, लोग और क्या चाहते हैं। लोग अब बदलाव भी चाहते हैं, तभी आप सिनेमा में बदलाव देख रहे हैं। 2018 यूनिक ईयर है, इंडियन सिनेमा में बदलाव के नजरिए से। स्क्रिप्ट और कॉन्सैप्ट के जरिए काफी अच्छा काम हुआ है। ऐसा पहले भी हुआ है लेकिन 100 करोड़ रुपए से ऊपर जाने के बारे में नहीं सोचा गया था।

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