Exclusive Interview: भारत की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती ‘वाई चीट इंडिया’

  • Updated on 1/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सीरियल किसर के नाम से मशहूर इमरान हाशमी जल्द ही फिल्म ‘वाई चीट इंडिया’ में नजर आने वाले हैं। फिल्म शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार पर बनी है। फिल्म में इमरान निगेटिव भूमिका में हैं, जो पैसे लेकर परीक्षाओं में अमीर स्टूडेंट्स को पास कराने के लिए उनकी जगह होशियार स्टूडेंट्स को एग्जाम देने भेजता है।

फिल्म का निर्देशन शौमिक सेन ने किया है। फिल्म से श्रेया धनवंतरी बॉलीवुड डेब्यू कर रही हैं। इस फिल्म के प्रमोशन के लिए दिल्ली स्टूडियो पहुंचे इमरान और श्रेया ने पंजाब केसरी/ नवोदय टाइम्स/ जगबाणी/ हिंद समाचार के साथ खास बातचीत की।

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हमारी शिक्षा व्यवस्था का आईना दिखाती है ये फिल्म: इमरान हाशमी
यह फिल्म हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई दिखाती है। लोग शायद इस चीज से वाकिफ नहीं हैं कि हमारा एजुकेशन सिस्टम कितना खोखला है। मैंने इसमें राकेश सिंह का किरदार निभाया है, जो पैसे लेकर अमीर स्टूडेंट्स की जगह होशियार स्टूडेंट्स को परीक्षा दिलवाने का काम करता है। यह बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारी शिक्षा व्यवस्था के पीछे बहुत बड़ा माफिया चलता है।

नकल में भी अकल की जरूरत
यह फिल्म नकल को प्रमोट नहीं करती और ‘नकल में भी अकल है’ जैसी टैग लाइन हमारी सोच नहीं बल्कि राकेश की सोच है। राकेश चीटिंग माफिया का डॉन है। हमारी शिक्षा व्यवस्था में शुरू से रट्टा मारना सिखाया जाता है, जो बहुत गलत है, इसमें बदलाव होना चाहिए। इसके साथ ही चीटिंग माफिया हर स्टेट में मौजूद हैं।

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ये अयोग्य स्टूडेंट्स को सीट दिलाते हैं और वो स्टूडेंट्स आगे जाकर इंजीनियर और डॉक्टर बनते हैं। काबिल बच्चे पीछे रह जाते हैं। हमारे यहां बच्चों के मन में सिर्फ एक बात डाली जाती है कि कैसे भी करके नंबर अच्छे लाने हैं क्योंकि आगे चलकर नौकरी करनी है। 

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मुझे नहीं पता था चीटिंग माफिया के बारे में
‘मेरे पास फिल्म की कहानी स्क्रिप्ट के फॉरमेट में आई थी। मैं नहीं जानता था कि चीटिंग माफिया भी होता है। मुझे ये तो पता था कि पेपर लीक होते हैं, लेकिन चीटिंग माफिया क्या होता है और कैसे काम करता है ये नहीं पता था। जब मैंने रिसर्च किया तो पता चला कि ये बहुत बड़ा बिजनेस है।

आप खुद सोचकर देखिए कि हमारी शिक्षा व्यवस्था कितनी खराब है पचास पर्सेंट सीटें तो पहले ही कोटे की थीं अब 10 पर्सेंट और होने जा रही हैं, यानि की 60 पर्सेंट तो यही हो गया अब बचा सिर्फ चालीस पर्सेंट। अब इस चालीस पर्सेंट में से कितने स्टूडेंट्स नकल वाले हैं और कितने डिग्री वाले किसी को नहीं पता। बस इस चक्कर में डिग्री वाले बहुत से स्टूडेंट्स बेरोजगार ही रह जाते हैं।’ 

Navodayatimesएग्जामिनेशन सिस्टम बंद होना चाहिए
इमरान ने ये भी कहा कि मुझे तो हैरानी होती है अपने देश की शिक्षा व्यवस्था को देखकर। आईआईटी के बच्चे देखो, कैसे 18 घंटे पढ़ते हैं। टीवी, सिनेमा और स्पोट्र्स से उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहता। ये कैसी जिंदगी है उनकी।

जब हम स्कूल में होते हैं हमें क्लीयर ही नहीं होता कि हम आगे जाकर क्या करेंगे। ये हमारा स्कूल और टीचर हमें क्लीयर ही नहीं करता। बहुत सारे लोग अपनी जिंदगी साइंस कॉमर्स में बेकार कर देते हैं। मेरे हिसाब से तो एग्जामिनेशन सिस्टम ही बंद कर देना चाहिए। लर्निंग के अनुसार चुनाव होना चाहिए।

‘सीरियल किसर’ के टैग से हो गया हूं परेशान
‘मैं 17 साल से’ सीरियल किसर’ का टैग लेकर घूम रहा हूं, चाहकर भी इससे बाहर नहीं आ पाता। इमरान हाशमी का नाम आते ही लोग एक ही चीज सोचने लगते हैं। मैं बताना चाहूंगा कि मेरी ये फिल्म पूरी तरह से परिवार के साथ देखने वाली है। आप इसे परिवार, दोस्तों और अपने टीचर के साथ देख सकते हैं।

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तीन महीने तक दिए ऑडिशन: श्रेया धनवंतरी
तीन महीने की मेहनत के बाद मुझे ये फिल्म मिली। मैने तीन महीने तक अलग-अलग ऑडिशन दिए तब जाकर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर को मेरा चेहरा और काम पसंद आया। इस फिल्म से जुडऩे का मौका मिलना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी।

Navodayatimesआर्ट्स स्टूडेंट का किरदार  
इस फिल्म में मैंने बहुत साधारण सी लड़की नूपुर का किरदार निभाया है। नूपुर लखनऊ में रहती है और लोअर मिडल क्लास फैमिली से है। वह आर्ट्स कॉलेज में पढ़ती है। जब नूपुर इमरान से मिलती है तो एक नया रिश्ता बनता है, यह रिश्ता उसके चीटिंग के बिजनेस से अलग है।

पढ़ाई में कुछ अपडेट नहीं  
श्रेया के अनुसार हमारी शिक्षा व्यवस्था को थोड़ा प्रैक्टिकल होना चाहिए, जिससे इसमें काफी अपडेशन हो सकता है। मैं खुद इंजीनियररिंग की स्टूडेंट थी। उस वक्त हमें जो पढ़ाया गया, उसमें अब काफी बदलाव हो चुका है, लेकिन आज भी वही पुराना पढ़ाया जाता है, इसलिए इसे अपडेट करना जरूरी है।  

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