Monday, May 10, 2021
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केंद्र सरकार ने 2 साल में 18 सौ करोड़ रूपये खर्च किए लेकिन पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 46% बढ़ीं

  • Updated on 11/25/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के पीछे हरियाणा और पंजाब में जलाई जाने वाली पराली को माना जाता रहा है। जिसे रोकने के लिए केंद्र सरकार ने दो साल में लगभग 18 सौ करोड़ रूपये खर्च किए हैं। लेकिन इसके बाद भी पराली जलाना बंद नहीं हुआ। 

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ती ठंड के बीच वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है। जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी आसपास के राज्यों में पराली जलने की है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के कई रोकथाम संबंधी कार्यों के बाद भी प्रदूषण जस का तस बना हुआ है। 

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एक रिपोर्ट की माने तो केंद्र सरकार ने दो साल में 18 सौ करोड़ रुपये पराली जलाने से रोकने में खर्च कर दिए। इसके बावजूद पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 46 फीसदी बढ़ गईं। हालांकि हरियाणा में पिछले साल की तुलना में इस बार 28 फीसदी पराली जलाई गई। 

रिपोर्ट के अनुसार, 21 सितंबर से 22 नवंबर तक पंजाब में पराली जलाने की 76537 घटनाएं दर्ज की गईं थीं। जबकि पिछले साल ये संख्या सिर्फ 52,225 थी। इन घटनाओं के तेजी से बढ़ने के आधार पर कहा जा सकता है कि पंजाब में पराली जलाने से रोकने को लेकर सभी इंतजाम नाकाम रहे हैं। 

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उधर, हरियाणा में इस अवधि में पराली जलाने की 4675 घटनाएं हुईं, जो 2019 में 6551 थीं।  इस बारे में पर्यावरण मंत्रालय का कहना था कि सभी तरह की सतर्कता बरतने के बावजूद पंजाब में पराली जलाने के खासे मामले आए। जबकि हरियाणा ने पिछले साल की तुलना में पराली जलाने के मामलों को नियंत्रित कर लिया।

वहीं, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने मंगलवार को केंद्र सरकार द्वारा हाल में गठित वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से अनुरोध किया कि वह पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए वहां पूसा के बायो-डिकम्पोजर के छिड़काव पर विचार करे।

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