Monday, Sep 20, 2021
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कोर्ट ने कहा - एसडीएमसी में कामकाज के मुकाबले वेतन पर खर्च बहुत ज्यादा है

  • Updated on 8/3/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम द्वारा कर्मचारियों को दिया जा रहा वेतन भुगतान उसके कामकाज के मुकाबले बहुत ज्यादा है और यह बिल्कुल ताॢकक नहीं है।  अदालत ने निगम से यह भी पूछा कि क्या कर्मचारियों की बायोमिट्रिक उपस्थिति उनके आधार कार्ड से लिंक है।  

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    उच्च न्यायालय ने कहा कि जब नगर निगम सफाई और विकास के बहुत ज्यादा कार्य नहीं कर रहा है, ऐसे में वह कर्मचारियों को इतना ज्यादा वेतन भुगतान कैसे कर सकता है।  न्यायमूॢत विपिन सांघी और न्यायमूॢत जसमीत सिंह की पीठ ने सवाल किया, ‘‘क्या एमसीडी में बायोमिट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू है? क्या आपने उसे आधार के साथ ङ्क्षलक किया है? क्या उनके लोकेशन का पता लगाने के लिए जियो टैगिंग की जा रही है?’’   

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  एसडीएमसी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि निगम में बायोमिट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू है और उसके आधार से लिंक होने तथा जियो टैगिंग के बारे में वह पता करेंगे।      निगम के वकील दिव्य प्रकाश पांडे ने कहा कि इस संबंध में स्थानीय निकाय द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर वह हलफनामा दायर करेंगे।   

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  उन्होंने अदालत को बताया कि निगम के मासिक खर्च में 214 करोड़ रुपये वेतन पर और 30 करोड़ रुपये पेंशन पर खर्च होते हैं।  पीठ ने कहा कि नगर निगम का काम सिर्फ वेतन भुगतान करना नहीं है, बल्कि सफाई और विकास कार्य करना भी है।   

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अदालत की सलाह पर एसडीएमसी ने कहा कि वह समीक्षा कर रहे हैं कि क्या निगम में कर्मचारियों की संख्या आवश्यकता से अधिक है।  अदालत ने इस मामले को अब 11 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है जब शिक्षकों, अस्पताल कर्मचारियों, सफाई कर्मचारियों और इंजीनियर आदि के वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं होने संबंधी अन्य याचिकाओं पर विचार किा जायेगा। 

 

 


 

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