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Corona Exclusive: बचाव से लेकर इलाज तक, यहां Expert से जानें कोरोना से जुड़े अहम सवालों के जवाब

  • Updated on 3/26/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस (Coronavirus) पूरी दुनिया पर अपना कहर बरपा रहा है। दुनिया में अब तक 4,65,163 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं वहीं 21,116 लोगों की इससे मौत हो चुकी है। भारत की बात करें तो अब तक 649 लोग संक्रमित हो चुके हैं और 14 लोगों की मौत हो चुकी है। इस वायरस से निपटने के लिए जहां पूरे देश में 21 दिनों का लॉकडाउन किया जा चुका है वहीं लगातार इससे निपटने की कोशिश की जा रही है। नवोदय टाइम्स के साथ हुए इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. एमएस कंवर के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में जानते हैं कोरोना वायरस से जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब।

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कोरोना (Coronavirus) की काली छाया जो देश और दुनिया पर छाई है, उससे कैसे लड़ा जाए? 
लॉकडाउन किए जाने से ही जानें बचाई जा सकेंगी। बिना ऐसा किए कोरोना के फैलते संक्रमण को रोक पाना असंभव है। लॉकडाउन करके भी इसे पूरी तरह नहीं रोका जा सकता, हां संक्रमण के ग्राफ को एक बार में सीधा ऊपर जाने से जरूर रोका जा सकेगा। लॉकडाउन में लोग एक दूसरे के संपर्क में नहीं आएंगे जिसकी वजह से लोग संक्रमित कम होंगे और उनको इलाज देकर ठीक किया जा सकेगा, साथ ही मौतों को रोका जा सकेगा। ऐसे में खुद को और अपने परिवार को घर में रखकर हम पूरे देश को बचा सकेंगे। लॉकडाउन के निर्देशों को प्रत्येक व्यक्ति मानें जरूर।

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भारत में कोरोना की कौन सी स्टेज चल रही है?
भारत स्टेज-2 में तो चल ही रहा है, लेकिन कहीं-कहीं स्टेज-3 भी चल रही है। यदि कोरोना पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं और उसके ओरिजन को नहीं पकड़ा जा पा रहा है, साथ ही मामले लगातार बढ़ने लगें तो इस स्थिति को स्टेज-3 की शुरुआत ही कहेंगे। जब मामले बहुत ज्यादा हो जाते हैं तो उसको स्टेज-3 कहते हैं।

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लॉकडाउन के दौरान जो लोग जरूरी सेवाओं में हैं, उनको किस तरह का ध्यान रखना चाहिए?
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों को खासा खतरा है। उनमें संक्रमण की आशंका ज्यादा है। पीपीई यानी पर्सनल प्रोटेक्टिव एक्यूपमेंट अस्पतालों में होना जरूरी है। इसके बिना कोरोना रोगियों के बीच डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों को नहीं जाना चाहिए। सरकार व अस्पताल प्रशासन को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि मरीजों के उपचार में बाधा नहीं आए।

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भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं को देखते हुए कोरोना कितनी बड़ी चुनौती है?
चुनौती बड़ी  है। जांच की किट पर्याप्त नहीं हैं, मंगाई जा रही हैं। जिन लैब को जांच का अधिकार मिला है, वहां भी किट नहीं हैं। एक हफ्ते में किट आ जाएंगी वहां। देश जहां की स्वास्थ्य सेवाएं बहुत अच्छी मानी जाती हैं, जब वह कोरोना को रोक नहीं पाए तो ऐसे में क्या कहा जा सकता है।

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आखिर कोरोना से कैसे बचा जा सकता है, कोई दवा है क्या?
दुनिया भर से कई रिपोर्ट आई हैं, जिसमें तरह-तरह की सलाहे हैं, लेकिन उनको लेकर कुछ भी पक्के तरीके से नहीं कहा जा सकता है। आईसीएमआर ने जैसा बताया है, उसके अनुसार हाईड्रॉक्सीक्लोरोक्विन  टैबलेट या उसका विकल्प जो आम मलेरिया में इस्तेमाल किया जाता है 'क्लोरोक्विन' उसमें लिया जा सकता है। लेकिन, डॉक्टर से पूछकर उसकी डोज तय करनी होगी। यदि स्वास्थ्यकर्मी हैं तो उनको चिकित्सक की सलाह पर प्रतिदिन डोज लेनी पड़ सकती है। क्योंकि, मलेरिया में डोज तय है, लेकिन कोरोना संक्रमण में इसकी डोज अभी तय नहीं है। बहुत सारी जगहों पर ट्रायल जरूर हो रहे हैं, लेकिन अभी कुछ ठोस तरीके से तय नहीं किया जा सका। अन्य तरह की दवाओं पर भी ट्रायल हो रहा है।

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कोरोना की महामारी को लेकर चिकित्सक जगत क्या मान रहा है?
सार्स, एच1एन1 के दौरान भी काफी सतर्कता बरती गई थी, लेकिन उसमें संक्रमण की संख्या कम थी। कोरोना तेजी से फैल रहा है। कोरोना की तुलना वर्ल्ड वार-1 के ठीक बाद 1918 और 1919 में फैले स्पेनिश फ्लू से की जा रही है, जिसमें दुनिया के एक तिहाई लोग संक्रमित हुए थे। करीब 6 करोड़ लोगों को बचाया नहीं जा सका था। 1918 में फैली यह महामारी कम हुई थी, लेकिन फिर से 1919 में आई थी। यदि कोरोना कम हो जाए तो भी देश को आगे के लिए सावधान रहना होगा।

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मौसमी बीमारियों के बीच कोरोना की पहचान कैसे की जाए?
सामान्य फ्लू में बुखार, जुकाम-खांसी होती है, लेकिन कोरोना संक्रमण होने पर गले में दर्द के साथ मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। यदि बुखार-जुकाम हो और जांच आदि नहीं करा पाएं तो खुद को आइसोलेट करना चाहिए, बार-बार हाथ धोना चाहिए और चेहरे पर हाथ ले जाने से बचना होगा। गले में दर्द और सांस में तकलीफ शुरू हो तो तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए।

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