Thursday, Jan 27, 2022
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experts said on the controversial question it is necessary to review ncert books

डैमेज कंट्रोल करने में जुटा सीबीएसई, विशेषज्ञों ने विवादित सवाल पर कहा एनसीईआरटी पुस्तकों की समीक्षा

  • Updated on 12/3/2021

नई दिल्ली/पुष्पेंद्र मिश्र। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा आयोजित कीं जा रहीं टर्म-1 बोर्ड परीक्षाओं में एक दिसम्बर को 12वीं कक्षा के छात्रों से समाजशास्त्र के पेपर में गुजरात दंगों पर पूछे गए सवाल की सोशल मीडिया ने जमकर आलोचना की। इस मामले पर जेएनयू प्रोफेसर उमेश कदम ने कहा कि एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने की आवश्यकता है। यह सही समय इस काम को किया जाना चाहिए। उमेश कदम एनसीईआरटी की समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। सीबीएसई के इस प्रश्न पर जामिया मिलिया इस्लामिया के एसो. प्रो. नावेद जमाल ने कहा कि आप दंगों पर अलग-अलग विचार रख सकते हैं इस तरह का सवाल अ'छा नहीं है। दंगों पर सवाल पूछने से राजनीति होगी। जब हम दंगों के बारे में बात करते हैं तो हमें समझना होगा कि वे राष्ट्रीय एकता तथा राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष ताने वाने के खिलाफ हैं।

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एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में शामिल है गुजरात दंगे का यह सवाल
गुजरात दंगों से जुड़ा यह विवादित सवाल एनसीईआरटी की 12वीं कक्षा की समाजशास्त्र पाठ्यपुस्तक भारतीय समाज के अध्याय सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियां के एक अनु'छेद से लिया गया है। किताब की पेज संख्या 134 में राष्ट्र रा'य और धर्म से जुड़े मुद्दे और पहचान विषय के अंतर्गत दिए गए एक अनु'छेद में सांप्रदायिकता को विस्तार से बताया गया है। इस अनु'छेद में सांप्रदायिक हिंसा के दो समकालीन उदाहरण दिए गए हैं जो दो प्रमुख राजनीतिक दलों के अधीन घटित हुए हैं। इसमें साल 1984 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान दिल्ली में हुआ सिख विरोधी दंगा और साल 2002 में भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुआ गुजरात दंगा शामिल है।

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यह सवाल पूछा गया था
12वीं के छात्रों से समाजशास्त्र के पेपर में उस पार्टी का नाम बताने के लिए कहा गया जिसके कार्यकाल में गुजरात में 2002 के दौरान मुस्लिम विरोधी ङ्क्षहसा हुई थी। इस सवाल के चार विकल्पों में कांग्रेस, बीजेपी, डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियों के नाम दिए गए थे। हालांकि सीबीएसई ने इस गलती को स्वीकारते हुए जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई की बात कही है।

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इससे पहले भी हुई हैं सीबीएसई से ऋुटियां
हाल ही में आयोजित हुए पेपर की उत्तर कुंजियों में भी छात्रों ने ऋुटियों की शिकायत की है और इससे पहले भी सीबीएसई द्वारा ली गई बोर्ड परीक्षाओं में प्रश्न पत्रों में ऋुटियां सामने आ चुकी हैं। 2019 में कक्षा 12 के अंग्रेजी के पेपर में छात्रों ने सवाल को आउट ऑफ सिलेबस बताया। हालांकि बाद में पता चला कि इंटरनल 'वाइस देने में गलती हुई। बोर्ड द्वारा निर्धारित सिलेबस के मुताबिक छात्रों को इनविजिबल मैन और सिलास मार्नर उपन्यास पढऩे थे। कई स्कूल एक ही उपन्यास पढ़ाते हैं। लेकिन सवाल दोनों उपन्यासों से आए और दोनों 6-6 अंक के थे। 12वीं कक्षा के अकाउंटेंसी पेपर में प्रिंटिंग में बहुत सी गलतियां मिलीं। 2019 में 6 मार्च को हुए इस पेपर में सवाल नं-13 में गलत शब्द प्रिंट था। कई सवालों का हिंदी अनुवाद नहीं था। 12वीं कक्षा के ही गणित के पेपर में सेट नं-2 के सवाल नं-26 में छात्रों ने एक ही सवाल के लिए अंग्रेजी और हिंदी में अलग-अलग उत्तर देने को कहा गया। 10वीं कक्षा के हिंदी पेपर में कविता का नाम पेपर में आत्मान्तरण प्रिंट होकर आया जबकि कविता का असल में नाम आमंत्रण था।

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