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Fact Check: 9 दिन में सूरत से सीवान पहुंचने वाली ट्रेन की खबर निकली फेक, दो दिन में पहुंचीं थी

  • Updated on 5/26/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना संकट के बीच महामारी के साथ-साथ लोगों को फेक खबरों से भी सावधान रहने की जरूरत है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक फोटो बहुत तेजी से वायरल हो रही है जिसमें यह दावा किया गया है कि लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों के लिए चलाई जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन लेट से गंतव्य तक पहुंच रही है। इसके अलावा यह कहा जा रहा था कि उसमें भूख के कारण मजदूरों की मौत हो रही है।

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क्या था दावा
फोटो में एक अखबार की कटिंग है जिसमें दावा किया गया है कि ट्रेन निर्धारित समय से तो जंक्शन से खुल रही है लेकिन गंतव्य तक पहुंचते-पहुंचते उसको 9 दिन का समय लग जा रहा है। कितनी ट्रेनें अपने रास्ते को भूल कहीं और पहुंच जा रही है। पहले प्रवासी मजदूर घर जाने के लिए ट्रेन की मांग करते रहे और अब ट्रेन से उतरने के लिए बेचैन रहते हैं। ट्रेन की भीषण लेट लतीफी के कारण कई मजदूर व उनके परिवार के सदस्यों ने ट्रेन में ही दम तोड़ दिया। महाराष्ट्र से आ रहे मजदूर को  जब आरा में लोगों ने उठाना चाहा तो पाया कि उसकी मौत हो चुकी है।

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ट्रेन में ही दम तोड़ रहे हैं प्रवासी
फोटो में आगे यह दावा किया गया था कि मृतक की पहचान नबी हसन के पुत्र निसार खान के रूप में हुई है। वह गया का रहने वाला है। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के हालत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि गुजरात के सूरत से 16 मई को सिवान के लिए निकली दो ट्रेनें क्रमश: उड़ीसा के राउरकेला और बेंगलुरू पहुंच गई। वाराणसी रेल मंडल की खोजबीन के बाद ट्रेन का पता चला तो 18 मई की जगह 25 मई को सिवान जंक्शन पर पहुंचा। 

Train 3

क्या है सच्चाई
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस तस्वीर की पड़ताल पीआईबी ने किया है। पीआईबी के मुताबिक वायरल हो रही तस्वीर फेक है। पीआईबी ने बताया कि सूरत से सीवान जाने वाली ट्रेन 9 दिन में नहीं बल्कि दो दिन में ही पहुंच गई थी। साथ ही ट्रेन के अंदर हुई मौत के बारे में पीआईबी ने बताया कि इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। सरकार पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

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