Wednesday, Aug 04, 2021
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fake doctor caught by circling lockdown when he was albsnt

Lockdown को ठेंगा दिखाकर चक्कर लगाने वाले जब पकड़े गए नकली डॉक्टर तो...

  • Updated on 4/1/2020

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। आप सब कुछ सरकार के भरोसे नहीं जीत सकते है। इसके लिये देश के सभी आमजनों का योगदान बहुत जरुरी है। कहने की जरुरत नहीं, हम बात कर रहे है- कोरोना वायरस (Corona Virus) संकट से पल-पल लड़ रहे देश में मजाक बनाकर रोड पर उतरने को आतुर ऐसे लोग जो लॉकडाउन (Lockdown) के बाद भी घर की चाररदीवारों में कुछ दिनों के लिये खुद को रोक नहीं सकते है। ऐसा ही वाकया एनसीआर नोएडा में देखने को मिला है जहां एक  नकली डॉक्टर जब पकड़े गए तो खुल गई उनकी पोल।

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सड़कों पर सबको चलने की नहीं हैं इजाजत

देश की सड़कों पर आजकल सीमित संस्था जैसे डॉक्टर,मीडिया,पुलिसकर्मी.सफाईकर्मियों को ही लॉकडाउन के समय चलने-फिरने की आजादी है। मतलब वैसे लोग जो आवश्यक सेवा देने में जुटे है उसके सिवा किसी को भी रोड पर उतरने की इजाजत नहीं है। लेकिन एक जनाब जब घर में रहते-रहते बोरा गए तो एक नई तरकीब निकाली। कहीं से जुगाड़ करके मास्क,डॉक्टर ड्रेस पहनकर गलियों के चक्कर काटने लगे तभी एक पुलिसकर्मी की नजर उन पर पड़ी तो अपने स्वभाव के अनुसार या यूं कहिये कि ऊपर से प्रेशर में ही सही जब कथित डॉक्टर से अपना कार्ड दिखाने को कहा तो उनको तो सांप ही सूंघ गया।

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पुलिस को शक हुआ तो...

जब यह कथित डॉक्टर इधर-उधर की बात करने लगा तो पुलिस को उनपर शक हुआ और लगे डंडे बरसाने और कहा-- सीधी तरह बता, तू डॉक्टर है या नहीं? हम सभी ने सुना है कि मार के डर से तो भूत भी भाग जाता है। तुरंत सज्जन ने सिर हिलाकर- कहा मैं डॉक्टर तो नहीं हूं। लेकिन असल बात है कि घर में मन नहीं लग रहा था तो पिछले कुछ दिनों से यह ड्रेस पहनकर घूमने लगा। पुलिस ने गिरफ्तार करके उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है।

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जम्मू कश्मीर में भी चार यार ने किया ड्रामा

ऐसा ही एक मिलता-जुलता लेकिन थोड़ा हटकर जम्मूकश्मीर से है। जहां 4 यार ने फैसला किया कि उसे अपने गांव पहुंचना है तो उसके लिये एक नई तरकीब निकाली। जिसमें उऩ सभी ने एक एबुलेंस की व्यवस्था की। उनमें से एक दोस्त ने डेड बॉडी का नाटक करके लेट गया,बांकी उसके पास बैठ कर एंबुलेंस में सवार होकर चल दिये।

A doctor treat patient in Aiims

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हर वक्त सिस्टम को दोष देना सही नहीं

हम सभी का स्वभाव ही बन गया है कि सिस्टम में बैठकर कमी खोजेंगे या सिस्टम को सहयोग नहीं करेंगे। जब ये सभी यार एक जिला को किसी तरह पार करके दूसरे जिले में दाखिल हुए तो जबरदस्त चैकिंग चल रही थी। पुलिस ने डंडा घूमाया और पूछा कि कहां जा रहे हो तो भाईजान घबरा गए। ओर फिर होता वहीं है जो खुदा को मंजूर होता है।

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पुलिस की सख्ती से पस्त होते हैं होसले

पुलिस की सख्ती को देखकर तो बड़े-बड़े मियां के हौसले पस्त हो जाते है। दोस्तों से घिरा मगर मरने का बहाना कर लेटा हुआ व्यक्ति पर जब पुलिस ने डंडा से घूसा लगाया तो एकदम उठ खड़ा हुआ और कहा- मैं तो जिंदा हूं। फिर पुलिस तो वहीं करती है जो आप सभी जानते है।

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पीएम ने देश से किया है आह्वाण

कहने का मतलब साफ है कि कोरोना वायरस की भयावहता से भले ही हम सभी परिचित हो लेकिन सबकुछ चाहते है कि सरकार है तो सब ठीक कर देगी। आजकल तो 'मोदी है तो मुमकिन' वाली थ्योरी बीजेपी के लोग ज्यादा जोर-शोर से उठाते है। लेकिन सभी ने देखा कि पीएम नरेंद्र मोदी कितने संजीदगी है। उन्होंने इशारो ही इशारों में बीजेपी वालों को भी समझा दिया कि अभी मोदी अकेला कुछ नहीं कर सकता तो कृपया करके ऐसे नारों को ठंडे बस्तों में डालों। अगला जब चुनाव होगा तो ऐसै नारें लगाना। फिलहाल हमें देश के सभी नागरिकों का सहयोग चाहिये-कोरोना को हराने के लिये। लेकिन सवाल उठता है कि सरकार के विरोध में खड़ी हमेशा विपक्षी पार्टियां भी समय की नजाकत को समझकर सुर-ताल कर रही है,लेकिन आखिर देश के 1 फीसदी से भी कम लोग कब समझेंगे? जबकि कोरोना वायरस को फैलाने में ऐसे ही 1 प्रतिशत लोग ही काफी है तब।

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