Wednesday, Mar 03, 2021
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Farm Laws: हरसिमरत कौर ने किया केंद्र पर तीखा हमला, कहा- नहीं सुनी गई हमारी बात

  • Updated on 1/11/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस लेने की मांग पर अड़े किसानों का आंदोलन का आज 47वें दिन भी जारी है। कोरोना संकट और बर्फीली ठंड के बीच किसान दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे हुए हैं। कड़कती ठंड में भी किसानों का हौसला जरा भी कम नहीं हुआ है। ऐसे में पूर्व केंद्रीय मंत्री और शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता हरसिमरत कौर बादल (Harsimrat Kaur Badal) ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। हरसिमरत कौर ने आरोप लगाया कि केंद्र किसानों के संघर्ष को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर इसे लंबा खींच रही है।

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सरकार को किसानों की परवाह नहीं
हरसिमरत कौर ने कहा, 'डेढ़ महीने से किसानों को ठंड में बैठाकर आज सरकार किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है इससे स्पष्ट होता है कि तीन कानूनों को वापस लेने का सरकार का इरादा नहीं है, किसानों की जो जान जा रही है उसकी भी उन्हें परवाह नहीं है।' इतना ही नहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री ने किसानों का सचेत करते हुए कहा कि सरकार किसान आंदोलन को प्रभावित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। 

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कानून लागू करने से पहले केंद्र को दी थी सलाह
हरसिमरत कौर बादल ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि जब इन तीन कृषि कानूनों को लागू किया जा रहा था तब ही उन्होंने केंद्र सरकार को इन कानूनों को लागू करने से पहले किसानों से बातचीत करने की सलाह दी थी। लेकिन सरकार ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया, जिसका नतीजा आज हमें दिल्ली बॉर्डर देखने को मिल रहा है। साथ ही हरसिमरत कौर ने किसानों के आंदोलन को सही ठहराते हुए इसे एक सुयोग्य ढंग से चलाया जा रहा आंदोलन बताया है। उन्होंने कहा कि लेकिन कुछ दल इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। 

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अब तक 70 किसानों की मौत
हरसिमरत कौर बादल ने केंद्र पर तीखा हमला करते हुए कहा कि किसान आंदोलन में अभी तक 70 किसानों की मौत हो चुकी है लेकिन सरकार को इसकी बिल्कुल भी परवाह नहीं है। सरकार की इस तरह की हरकत को देखकर यही लगता है कि सरकार किसानों की आवाज सुनने के मुड में नहीं है। हरसिमत कौर ने आगे कहा कि सरकार इस आंदोलन का हल निकलने के बजाय वो किसानों को कोर्ट में जाने का रास्ता दिखा रही थी। जिसे अब किसानों ने अपना लिया है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार किसी भी हालत में संघर्षशील किसान इन कोशिशों को सफल नहीं होने देंगे। अब अगर सरकार ही ऐसे काम करेगी तो वो लोगों का प्रतिनिधित्व कैसे करेगी लेकिन सरकार की चाहत के उलट अकाली दल हमेशा से किसानों के संघर्ष में उनके साथ है और किसानों का ये संघर्ष उन्हें अवश्य जीत दिलाएगा।

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किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा ये
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का आंदोलन 47वें दिन भी जारी है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में इन बिलों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं और दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। मामले की सुनवाई के दौरान नए कृषि कानूनों को लेकर जिस तरह से सरकार और किसानों के बीच बातचीत चल रही है उस पर सुप्रीम कोर्ट ने निराश जताई। 

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केंद्र सरकरा से खफा कोर्ट
मामले की सुनवाई करते हुए CJI ने कहा कि अगर जाने अनजाने में कुछ भी ग़लत होता है तो इसके लिए हम सभी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि हम इसके लिए एक कमेटी बना सकते हैं। केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए  CJI ने कहा कि आप हमको बताइए कि आप कानून को लागू करने पर रोक क्यों नही लगा सकते आगर आप नही करेंगे तो हम करेंगे।

इससे पहले कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों की सरकार के साथ 8वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के साथ सरकार की बातचीत में गतिरोध बरकरार है। 

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26 को दिल्ली में घुसने को आमादा
कृषि कानूनों को रद्द करने से सरकार की मनाही से नाराज किसान अब आरपार के लिए तैयार हो गए हैं। किसानों ने साफ कर दिया है कि चाहे कुछ हो जाए, दिल्ली में 26 जनवरी को शक्ति प्रदर्शन जरूर करेंगे। किसानों की निगाह सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर भी टिकी हुई है। सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद किसान रणनीति बनाकर बताएंगे कि आगे अब क्या करना है? इस बीच 26 जनवरी के लिए तैयारियों शुरू हो चुकी हैं।

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मीडिया से बातचीत करने से किया मना
सिंघू बार्डर पर जत्थेबंदियों की दिनभर बैठक चली लेकिन किसान नेताओं ने मीडिया से बातचीत से मना कर दिया और कहा कि सोमवार को सारी स्थिति स्पष्ट कर देंगे। इसमें 15 जनवरी की बैठक में शामिल होने का फैसला भी शामिल है। किसानों ने लोहड़ी पर्व पर कानूनों की प्रतियां जलाने का आह्वान किया है। 18 जनवरी को हर जिला व तहसील स्तर पर महिला किसान दिवस मनाया जाना है। अब बार्डर के सभी मंचों की अगुवाई महिलाओं के हाथ देने की भी बात रखी गई है। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय हो गया है।

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भाकियू नेता ने कहा ये
भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है कि गणतंत्र दिवस की परेड के लिए वह बैरिकेड तोड़ते हुए आगे बढ़ेंगे। उनको जिस तरह से दिल्ली जाने से रोकने के लिए हथकंडे अपनाए गए थे लेकिन वे उन सभी को पार करते हुए दिल्ली तक पहुंच गए हैं। ऐसे ही गणतंत्र दिवस की परेड के लिए दिल्ली के अंदर घुसेंगे। वे अपनी परेड निकालेंगे और गणतंत्र दिवस की परेड खराब करने या उसमें व्यवधान डालने का किसानों का कोई इरादा नहीं है। चढूनी ने कहा कि सरकार गोली ही मारेगी, 70 शहीद हो गए हैं 70 या 100 और शहीद हो जाएंगे।

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