Wednesday, May 18, 2022
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कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन को एक महीना पूरा, आगे की रणनीति पर अहम बैठक आज

  • Updated on 12/26/2020

 नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्र के नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के खिलाफ किसानों को आंदोलन करते हुए आज एक महीना पूरा हो गया। कानूनों को रद्द करने की मांग के लेकर किसान बीते 26 नवंबर से लगातार सिंघु बॉर्डर पर डटे हुए हैं। किसान और सरकार के बीच इस मुद्दे पर अब तक पांच दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। इसी क्रम में शनिवार यानी आज किसान संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस मीटिंग में आगे की रणनीति को लेकर चर्चा हो सकती है।

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फिर से वार्ता शुरू करने को लेकर रणनीति
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार, किसान संगठन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बातचीत के लिए दी गई नई पेशकश पर चर्चा करगें, साथ ही सरकार से फिर से वार्ता शुरू करने को लेकर रणनीति तैयार कर सकते हैं।  मालूम हो कि सरकार इससे पहले कृषि कानूनों में संशोधन करने के लिए तैयार थी, लेकिन किसान कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं।

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विपक्ष पर किसानों को गुमराह करने का आरोप
उधर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को विपक्ष पर अपना एजेंडा आगे बढ़ाने के लिये नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार अपने कटु आलोचकों समेत सभी से बातचीत के लिये तैयार है, लेकिन यह बातचीत 'तर्कसंगत, तथ्यों और मुद्दों' पर आधारित होनी चाहिये। एक ओर जहां मोदी ने केन्द्र और किसानों के बीच वार्ता में गतिरोध के लिये राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधा वहीं दूसरी ओर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किसानों से एक या दो साल के लिये 'प्रयोग' के तौर पर नए कृषि कानूनों का इस्तेमाल करने की अपील करते हुए कहा कि अगर ये लाभकारी सिद्ध नहीं हुए तो सरकार सभी जरूरी संशोधन करने के लिये तैयार है।

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अब तक पांच दौर की बातचीत रही बेनतीजा
उल्लेखनीय है कि सरकार और किसान यूनियनों के बीच कृषि कानूनों को लेकर पांच दौर की बातचीत बेनतीजा रही है। यूनियन सितंबर में लागू किये गए इन कानूनों को निरस्त करने की मांग पर अड़े हैं। प्रधानमंत्री पीएम-किसान योजना के तहत नौ करोड़ किसानों को 18,000 करोड़ रुपये का कोष जारी करने के बाद बोल रहे थे। मोदी ने अपने भाषण में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब आंदोलन की शुरुआत हुई थी तब नये कानूनों को लेकर उनकी एमएसपी सहित कुछ वाजिब चिंताएं थीं लेकिन बाद में इसमें राजनीतिक लोग आ गए और हिंसा के आरोपियों की रिहाई और राजमार्गों को टोलमुक्त बनाने जैसी असंबद्ध मांगे करनी शुरू कर दीं।

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किसानों की मांग को लेकर पीएम ने कही ये बात 
मोदी ने कहा, 'आपने देखा होगा कि जब आंदोलन की शुरुआत हुई थी तो उनकी मांग एमएसपी गारंटी की थी। उनके मुद्दे वाजिब थे क्योंकि वे किसान थे। लेकिन अब इसमें राजनीतिक विचारधारा के लोग हावी हो गए।' उन्होंने कहा, 'एमएसपी वगैरह को अब किनारे रख दिया गया है। अब वहां क्या हो रहा है। वे हिंसा के आरोपियों की जेल से रिहाई की मांग कर रहे हैं, वे राजमार्गों को टोल-फ्री करवाना चाहते हैं। किसानों की मांग से वह दूसरी मांगों की ओर क्यों चले गए?'

मोदी ने कहा कि देश की जनता ने जिन राजनीतिक दलों को नकार दिया है वे अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए किसानों को गुमराह कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार वार्ता के लिये खुले दिल से प्रदर्शनकारी किसानों के पास जा रही है।

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