Sunday, Sep 26, 2021
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किसानों ने लिखी पीएम मोदी को चिट्ठी, कहा- फिर से शुरू करें बातचीत, नहीं तो तेज होगा आंदोलन

  • Updated on 5/22/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली की सीमाओं पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन करीब 6 माह से लगातार जारी है। वहीं अब संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने शुक्रवार को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए “तत्काल हस्तक्षेप” करने की मांग की।

एक ईमेल में, संयुक्त किसान मोर्चा ने लिखा है कि श्रीमान प्रधान मंत्री, यह पत्र आपको याद दिलाने के लिए है कि, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सरकार के प्रमुख के रूप में, किसानों के साथ एक गंभीर और ईमानदार बातचीत को फिर से शुरू करने का दायित्व आप पर है। 

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किसानों ने दी आंदोलन तेज करने की धमकी
ईमेल में, सरकार और किसान नेताओं के बीच आखिरी दौर की बातचीत के ठीक चार महीने बाद, 22 जनवरी को, संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग दोहराई, और मांग पूरी ने होने पर अपना आंदोलन तेज करने की धमकी दी। किसानों ने कहा है कि यदि सरकार की ओर से बातचीत शुरू करने के लिए 25 मई तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। 

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा लिखे गए इस पत्र में सभी नौ नेताओं ने पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चधुनी, हन्नान मुल्ला, जगजीत सिंह दल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहन, शिव कुमार कक्का, योगेंद्र यादव और युद्धवीर सिंह शामिल हैं।

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इन केंद्रीय मंत्रियों को भी भेजा गया पत्र
इस ईमेल को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश को कॉपी किया गया है, जिन्होंने कृषि नेताओं के साथ पहले की बातचीत में सरकार का प्रतिनिधित्व किया था।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि मुख्यत: पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान तीन नए कृषि कानूनों 'किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम, किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम, और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर करीब 6 माह से प्रदर्शन कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में भी ये किसान अपनी मांगों पर अड़ें हैं और सरकार से एक बार फिर से बातचीत करना चाहते हैं। 

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