Thursday, Feb 25, 2021
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हाईवे पर जहां तक नजर गई ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर दिखे, किसानों ने दिखाई ताकत

  • Updated on 1/7/2021

नई दिल्ली, (नवोदय टाइम्स)। केएमपी (कुंडली-मनेसर-पलवल) वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे हो या केजीपी (कुंडली-गाजियाबाद-पलवल) ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, वीरवार को  जितनी दूर तक नजर गई, बस ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर दिखे। नए कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ 43 दिनों से आंदोलनरत किसानों ने अपने आंदोलन को गति देते हुए वीरवार को ट्रैक्टर मार्च निकाल कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।

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सुबह से ही हाईवे पर ट्रैक्टरों के साथ किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के सैकड़ों किसान अपना-अपना ट्रैक्टर लेकर इस मार्च में शामिल हुए। गाजीपुर सीमा पर धरनारत किसान भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेता राकेश टिकैत की अगुवाई में डासना के रास्ते केजीपी हाईवे से पलवल की ओर बढ़े। उनके काफिले में हापुड़, मोदीनगर, बुलंदशहर, नोएडा, जेवर आदि से बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ शामिल हुए।

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वहीं सिंघू बॉर्डर पर धरनारत किसान टिकरी बॉर्डर की ओर ट्रैक्टर लेकर निकले तो टिकरी बॉर्डर घेरे बैठे किसान अपने ट्रैक्टरों से कुंडली की ओर और रेवासन से किसानों का एक दल पलवल की ओर ट्रैक्टर मार्च लेकर निकला। लाल, नीले, हरे, पीले ट्रैक्टरों और उन पर लगे तिरंगे समेत तमाम रंगों के झंडों की रंग-बिरंगी छंटा से पूरा हाईवे तारी हो गया। सैकड़ों की संख्या में उतरे ट्रैक्टरों को देखते हुए कुछ घंटों के लिए आम वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी। हरियाणा हो या उत्तर प्रदेश की पुलिस पूरे हाईवे पर चौकस दिखी, लेकिन किसी ने भी किसानों को टोकने तक की जहमत नहीं की। बड़ी संख्या में पैदल और अपने निजी वाहनों से भी किसान इस मार्च का हिस्सा बने।

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भाकियू नेता राकेश टिकैत का कहना है कि यह तो ट्रैलर है। सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी सुरक्षा देने की किसानों की मांग नहीं माना तो 26 जनवरी को राजपथ पर असल ताकत देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब तक तीनों कानून वापस नहीं होते, किसान भी घर वापस नहीं जाएगा। किसानों ने 26 जनवरी को किसान गणतंत्र परेड की घोषणा कर रखी है। इस परेड में बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली में प्रवेश करेंगे औऱ राजपथ पर परेड करेंगे। इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। किसानों की ओर से 250 सौ महिलाएं ट्रैक्टर चलाने का प्रशिक्षण ले रही हैं, जो इस परेड का नेतृत्व करेंगी।

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सरकार के साथ शुक्रवार को प्रस्तावित 8वें दौर की वार्ता से पहले किसानों के ट्रैक्टर मार्च को दबाव बढ़ाने की रणनीति माना जा रहा है। 43 दिनों से दिल्ली की सीमाओं को घेरकर बैठे किसान तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी सुरक्षा देने की मांग कर रहे हैं। इस मसले पर सरकार औऱ किसान प्रतिनिधियों के बीच अब तक सात दौर की वार्ता हो चुकी है। गृहमंत्री अमित शाह अलग से किसान प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक कर चुके हैं। अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।

 

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